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भारत के वो 10 चक्रवर्ती सम्राट, जिनसे थर-थर कांपते थे विदेशी आक्रमणकारी

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सम्राट अशोक के मौर्य साम्राज्य का विस्तार दिखाने वाला मानचित्र

प्राचीन भारत का इतिहास शौर्य, कूटनीति, सांस्कृतिक उत्कर्ष और महान साम्राज्यों के उत्थान की गौरवशाली कहानी है। भारत के इन महान राजाओं ने केवल युद्ध नहीं जीते, बल्कि कला, धर्म, प्रशासन, शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। यही कारण है कि भारतीय सभ्यता विश्व की सबसे प्राचीन और प्रभावशाली सभ्यताओं में गिनी जाती है।

1️⃣ चंद्रगुप्त मौर्य (321–297 ई.पू.)

मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य ने आचार्य चाणक्य के मार्गदर्शन में नंद वंश का अंत कर एक शक्तिशाली केंद्रीय साम्राज्य की नींव रखी।
🔹 उन्होंने यूनानी शासक सेल्यूकस निकेटर को पराजित कर हेरात और कंधार जैसे क्षेत्रों को भारत में मिलाया।
🔹 उनका शासन सुदृढ़ प्रशासन और अर्थव्यवस्था के लिए जाना जाता है, जिसका उल्लेख अर्थशास्त्र में मिलता है।

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2️⃣ सम्राट अशोक (268–232 ई.पू.)

चंद्रगुप्त के पौत्र अशोक को विश्व इतिहास के सबसे महान शासकों में गिना जाता है।
🔹 कलिंग युद्ध के बाद उन्होंने हिंसा त्यागकर धम्म (धर्म) का मार्ग अपनाया।
🔹 उनके शिलालेख भारत के पहले लिखित ऐतिहासिक दस्तावेज माने जाते हैं।
🔹 बौद्ध धर्म को श्रीलंका, म्यांमार और यूनान तक पहुँचाया।

3️⃣ समुद्रगुप्त (335–375 ई.)

गुप्त वंश के महान सम्राट समुद्रगुप्त को इतिहासकारों ने ‘भारत का नेपोलियन’ कहा है।
🔹 प्रयाग प्रशस्ति उनके विजय अभियानों का प्रमाण है।
🔹 वे न केवल अपराजेय योद्धा थे, बल्कि कवि और संगीतज्ञ भी थे।

4️⃣ चंद्रगुप्त द्वितीय (375–415 ई.)

उनके शासनकाल को भारत का स्वर्ण युग कहा जाता है।
🔹 शकों का अंत कर पश्चिमी भारत को सुरक्षित किया।
🔹 उनके दरबार के नवरत्न (कालिदास, वराहमिहिर) ने विज्ञान, गणित और साहित्य को नई दिशा दी।

5️⃣ कनिष्क (127–150 ई.)

कुषाण शासक कनिष्क ने भारत को रेशम मार्ग (Silk Road) से जोड़कर वैश्विक व्यापार केंद्र बनाया।
🔹 चौथी बौद्ध संगीति का आयोजन
🔹 महायान बौद्ध धर्म का विस्तार

6️⃣ राजा राज चोल प्रथम (985–1014 ई.)

राजराज चोल ने दक्षिण भारत को एक महाशक्ति नौसैनिक साम्राज्य बनाया।
🔹 श्रीलंका और मालदीव पर विजय
🔹 तंजावुर का भव्य बृहदेश्वर मंदिर चोल वास्तुकला का शिखर है।

7️⃣ राजेंद्र चोल प्रथम (1014–1044 ई.)

उन्होंने भारतीय नौसेना की शक्ति को दक्षिण-पूर्व एशिया तक पहुँचाया।
🔹 श्रीविजय साम्राज्य पर विजय
🔹 गंगा तट तक अभियान → ‘गंगैकोंड चोल’ की उपाधि

8️⃣ पुलकेशिन द्वितीय (610–642 ई.)

चालुक्य वंश के इस महान शासक ने
🔹 नर्मदा तट पर हर्षवर्धन को पराजित कर दक्षिण भारत की रक्षा की
🔹 कांची के पल्लवों से निर्णायक संघर्ष किए

9️⃣ सम्राट हर्षवर्धन (606–647 ई.)

कन्नौज को राजधानी बनाकर उन्होंने उत्तर भारत में राजनीतिक स्थिरता स्थापित की।
🔹 चीनी यात्री ह्वेनसांग के यात्रा विवरण आज भी ऐतिहासिक स्रोत हैं
🔹 दानशीलता और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए प्रसिद्ध

🔟 अमोघवर्ष प्रथम (814–878 ई.)

राष्ट्रकूट वंश के अमोघवर्ष
🔹 शांतिप्रिय और विद्वान शासक
🔹 कन्नड़ साहित्य का प्रथम ग्रंथ कविराजमार्ग
🔹 ‘दक्षिण का अशोक’ की उपाधि

प्राचीन भारत के ये महान सम्राट केवल विजेता नहीं थे, बल्कि सभ्यता-निर्माता थे। उनकी नीतियाँ, स्थापत्य, धर्म और संस्कृति आज भी भारत की पहचान हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हुई हैं।

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