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शिनजियांग में रमजान के दौरान उइगर मुसलमानों पर चीनी कार्रवाई; 500 से अधिक हिरासत में

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शिनजियांग की मस्जिद के बाहर सुरक्षा बल

बीजिंग. चीन के शिनजियांग प्रांत में रमजान के पवित्र महीने के दौरान उइगर मुसलमानों के खिलाफ एक बार फिर बड़े पैमाने पर दमन की खबरें सामने आ रही हैं। हालिया मीडिया रिपोर्ट्स और मानवाधिकार संगठनों के दावों के अनुसार, “अवैध धार्मिक गतिविधियों” के आरोप में अब तक 500 से अधिक उइगरों को हिरासत में लिया गया है। इस कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के उल्लंघन की बहस को फिर से तेज कर दिया है।

मस्जिदों पर पहरा और घरों की तलाशी

खबरों के मुताबिक, प्रशासन ने रमजान के दौरान मस्जिदों के बाहर सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। कई इलाकों में अतिरिक्त पुलिस चौकियां बनाई गई हैं और आधुनिक निगरानी उपकरणों (CCTV) के जरिए इबादत करने वालों पर नजर रखी जा रही है।

  • दहशत का माहौल: स्थानीय सूत्रों का कहना है कि पुलिस द्वारा देर रात घरों की तलाशी ली जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं कोई सामूहिक रूप से रोजा इफ्तार या नमाज तो नहीं पढ़ रहा है।

  • इम्पैक्ट इंटरनेशनल की रिपोर्ट: संस्था ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि रमजान के दौरान धार्मिक रीति-रिवाजों पर लगाए गए इन कड़े प्रतिबंधों ने उइगर समुदाय को अपने ही घरों में कैद होने पर मजबूर कर दिया है।

वैश्विक संगठनों ने जताई चिंता

इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने बीजिंग की आलोचना की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई उइगरों की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मिटाने की चीन की दीर्घकालिक नीति का हिस्सा है।

“धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर इस तरह का दमन वैश्विक समुदाय के लिए असहनीय है। हम अंतरराष्ट्रीय संगठनों से तुरंत हस्तक्षेप की मांग करते हैं।” – मानवाधिकार कार्यकर्ता

मुख्य चिंताएं और भविष्य का संकट

क्षेत्र वर्तमान स्थिति
गिरफ्तारियां 500+ उइगर हिरासत में (कथित अवैध धार्मिक गतिविधियों के लिए)
धार्मिक स्वतंत्रता मस्जिदों में प्रवेश पर कड़ी पाबंदी और सामूहिक इबादत पर रोक
निगरानी AI और अतिरिक्त पुलिस बल के जरिए चौबीसों घंटे निगरानी

बीजिंग की इस सख्त नीति ने न केवल स्थानीय स्तर पर भय पैदा किया है, बल्कि तुर्की, अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ चीन के राजनयिक संबंधों में भी कड़वाहट पैदा कर दी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस मामले में संयुक्त राष्ट्र (UN) के हस्तक्षेप की प्रतीक्षा कर रहा है।

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