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18th BRICS Summit: चीन से व्यापार और निवेश बाधाओं पर भारत सरकार ने मांगी उद्योग जगत की राय

Saransh Kanaujia
4 Min Read
नई दिल्ली ।
18वें BRICS Summit से पहले भारत सरकार ने चीन के साथ जारी व्यापारिक विषमताओं, हाई-टेक उत्पादों के आयात पर लगे प्रतिबंधों और निवेश की रुकावटों को लेकर ठोस कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry) का China Desk इस समय भारतीय उद्योगों और विभिन्न सेक्टर एसोसिएशनों के साथ मिलकर उन प्रमुख चिंताओं का ब्यौरा जुटा रहा है, जिन्हें द्विपक्षीय व बहुपक्षीय बातचीत में उठाया जा सके।

1. हाई-टेक टेक्नोलॉजी और कच्चे माल के आयात पर बढ़ती चिंताएं

भारतीय उद्योग जगत, विशेष रूप से ऑटोमोबाइल और क्लीन-टेक क्षेत्र, चीन से मिलने वाले आवश्यक कच्चे माल और हाई-टेक पार्ट्स की अनिश्चित आपूर्ति को लेकर चिंतित हैं। वाणिज्य मंत्रालय मुख्य रूप से निम्नलिखित उत्पादों से जुड़ी अड़चनों की समीक्षा कर रहा है:
  • रेयर-अर्थ मैग्नेट (Rare-Earth Magnets): इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक। आपूर्ति में देरी से घरेलू ऑटो इंडस्ट्री प्रभावित हुई है।
  • बैटरी सेल एवं मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी: एडवांस केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी निर्माण के लिए तकनीकी हस्तांतरण और उपकरणों का आयात।
  • सोलर इनगॉट-वेफर टेक्नोलॉजी (Solar Ingot-Wafer Tech): भारत के सौर ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सिलिकॉन वेफर्स और इनगॉट बनाने की तकनीक।
  • HVDC उपकरण: हाई-वोल्टेज डायरेक्ट करंट (HVDC) पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क के लिए आवश्यक उन्नत उपकरण।

2. चीन में भारतीय कंपनियों के सामने निवेश संबंधी चुनौतियां

बातचीत का एक बड़ा हिस्सा चीन में भारतीय व्यवसायों और निवेशों के सामने आने वाली प्रक्रियात्मक बाधाओं पर केंद्रित है।
  • कस्टम्स और नॉन-टैरिफ बैरियर्स (NTBs): भारत सरकार चीन के कस्टम्स नियमों, कड़े प्रमाणन (certification) प्रक्रियाओं और गैर-टैरिफ बाधाओं पर अधिक पारस्परिकता (Reciprocity) चाहती है।
  • बाजार पहुंच (Market Access): भारतीय आईटी, फार्मास्यूटिकल्स और कृषि उत्पादों को चीनी बाजार में सुगम पहुंच दिलाने की मांग।

3. राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता में संतुलन

भारत ने रणनीतिक क्षेत्रों में चीनी कंपनियों और उपकरणों पर नियम कड़े किए थे। हालांकि, घरेलू निर्माण क्षमता को रफ्तार देने और सप्लाई चेन में अचानक आए व्यवधानों से बचने के लिए हाल के महीनों में कुछ गैर-संवेदनशील क्षेत्रों में सीमित ढील दी गई है।
प्रमुख रणनीति: भारत का लक्ष्य अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत रखते हुए रणनीतिक क्षेत्रों में आवश्यक वैश्विक तकनीक तक भारतीय उद्योगों की पहुंच बनाए रखना है।

4. BRICS शिखर सम्मेलन के माध्यम से सप्लाई चेन का विविधीकरण

BRICS मंच का उपयोग करते हुए भारत किसी एक देश (जैसे चीन) पर अत्यधिक आर्थिक और तकनीकी निर्भरता को कम करना चाहता है। भारत का ध्यान ‘री-शोरिंग’ और ‘नियर-शोरिंग’ के माध्यम से ग्लोबल वैल्यू चेन को अधिक टिकाऊ और विविध बनाने पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: 18वें BRICS Summit का आयोजन कहाँ और कब हो रहा है?
A1: 18वां BRICS Summit भारत की अध्यक्षता में 12–13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है।
Q2: भारत-चीन व्यापार वार्ता में ‘China Desk’ की क्या भूमिका है?
A2: वाणिज्य मंत्रालय का China Desk दोनों देशों के बीच व्यापार घाटे, चीन के कस्टम्स नियमों, निवेश प्रतिबंधों और भारतीय उद्योगों की समस्याओं का विश्लेषण करता है।
Q3: रेयर-अर्थ मैग्नेट भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?
A3: रेयर-अर्थ मैग्नेट का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटरों, पवन टर्बाइनों, रक्षा उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक्स में होता है। चीन वैश्विक आपूर्ति पर हावी है, जिससे भारत की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होती है।

Disclaimer (अस्वीकरण)

यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक बयानों, वाणिज्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों और उद्योग जगत से मिली जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। व्यापार नीतियों और सरकारी नियमों में आधिकारिक घोषणाओं के अनुसार परिवर्तन हो सकता है।

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