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रूस का भीषण प्रहार: ‘ओरेशनिक’ मिसाइल से पश्चिमी यूक्रेन दहल उठा

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कीव. जनवरी 2026 में रूस-यूक्रेन युद्ध ने एक बार फिर पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। रूस ने यूक्रेन पर अपनी सबसे घातक ‘ओरेशनिक’ (Oreshnik) हाइपरसोनिक मिसाइल से दूसरी बार हमला किया है। यह हमला न केवल सामरिक दृष्टि से विनाशकारी है, बल्कि नाटो (NATO) और यूरोपीय सुरक्षा के लिए एक सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

लक्ष्य और स्थान: रूसी रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि 9 जनवरी की रात ‘ओरेशनिक’ मिसाइल का उपयोग पश्चिमी यूक्रेन के ल्वीव (Lviv) क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को नष्ट करने के लिए किया गया। यह स्थान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह नाटो सदस्य पोलैंड की सीमा से बहुत करीब है।

मिसाइल की रफ्तार: यूक्रेनी वायु सेना के अनुसार, इस मिसाइल ने 13,000 किमी/घंटा (ध्वनि की गति से लगभग 10 गुना तेज) की रफ्तार से हमला किया। इतनी गति के कारण इसे मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम से रोकना लगभग असंभव है।

जानी-मानी क्षति: इस व्यापक हमले में कीव और अन्य क्षेत्रों में कम से कम 4 लोगों की मौत हो गई और 25 से अधिक लोग घायल हुए हैं। हमले के कारण राजधानी के आधे हिस्से में बिजली और पानी की आपूर्ति ठप हो गई। साथ ही, कीव स्थित कतरी (Qatari) दूतावास की इमारत को भी नुकसान पहुँचा है।

प्रतिशोध का दावा बनाम अंतरराष्ट्रीय खंडन

  • रूस का तर्क: क्रेमलिन ने इस हमले को दिसंबर 2025 के अंत में राष्ट्रपति पुतिन के आवास (नवगोरोड क्षेत्र) पर हुए कथित ड्रोन हमले का “प्रतिशोध” करार दिया है।

  • पश्चिमी प्रतिक्रिया: यूक्रेन और अमेरिका ने पुतिन के आवास पर हमले के रूसी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसे रूस द्वारा तनाव बढ़ाने का एक “मनगढ़ंत बहाना” बताया है।

‘ओरेशनिक’ मिसाइल: क्यों है इतनी खतरनाक?

‘ओरेशनिक’ (जिसका रूसी में अर्थ ‘हेज़ल ट्री’ है) एक मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) है। इसकी मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

  • MIRV तकनीक: यह एक साथ कई वॉरहेड्स ले जाने में सक्षम है, जो अलग-अलग लक्ष्यों को निशाना बना सकते हैं।

  • परमाणु क्षमता: यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है, जिससे इसकी तैनाती वैश्विक परमाणु संतुलन के लिए खतरा मानी जा रही है।

  • इतिहास: इसका पहला परीक्षण नवंबर 2024 में नीप्रो शहर पर किया गया था। अब जनवरी 2026 का यह हमला इसके सीरियल प्रोडक्शन और सक्रिय युद्ध में इस्तेमाल की पुष्टि करता है।

वैश्विक सुरक्षा पर प्रभाव और शांति वार्ता में बाधा

यूक्रेन के विदेश मंत्री ने इस हमले को “यूरोपीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा” बताया है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब पेरिस में युद्ध विराम को लेकर बातचीत के प्रयास फिर से शुरू हुए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि पोलैंड की सीमा के इतने करीब हाइपरसोनिक मिसाइल का उपयोग करना नाटो के लिए रूस की एक स्पष्ट चेतावनी है।

मुख्य नोट: इस हमले के बाद ल्वीव क्षेत्र में गैस स्टोरेज सुविधाओं को भारी नुकसान पहुँचा है, जिससे कड़ाके की ठंड के बीच यूक्रेन में ऊर्जा संकट गहराने की आशंका है।

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