लखनऊ. किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में महिला डॉक्टर के साथ यौन उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन के दबाव के मामले में फरार चल रहे आरोपी डॉक्टर रमीज मलिक (रमीज़ुद्दीन नायक) को लखनऊ पुलिस ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, जो पिछले दो हफ्तों से गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार चल रहा था।
ठाकुरगंज इलाके से हुई गिरफ्तारी
लखनऊ पुलिस की टीम ने सटीक सूचना के आधार पर शुक्रवार (9 जनवरी) को आरोपी डॉक्टर को राजधानी के ठाकुरगंज इलाके से धर दबोचा। आरोपी डॉक्टर रमीज मलिक के खिलाफ पिछले महीने मामला दर्ज हुआ था, जिसके बाद से ही वह पुलिस की पकड़ से बाहर था। पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में जुटी हुई थीं।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब केजीएमयू की एक हिंदू महिला डॉक्टर ने डॉक्टर रमीज मलिक पर गंभीर आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई। महिला डॉक्टर के आरोपों के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
यौन शोषण: शादी का झांसा देकर लंबे समय तक शारीरिक शोषण करना।
गर्भपात: पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने उसे धोखे में रखकर उसका गर्भपात कराया।
धर्म परिवर्तन का दबाव: पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपी उस पर इस्लाम धर्म स्वीकार करने के लिए लगातार दबाव बना रहा था।
विशाखा कमेटी की रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष और सिफारिशें :
यौन उत्पीड़न की पुष्टि: कमेटी ने पीड़िता द्वारा डॉक्टर रमीज मलिक पर लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों को सही पाया है।
दाखिला और बर्खास्तगी की सिफारिश: जाँच रिपोर्ट के आधार पर, विशाखा कमेटी ने आरोपी डॉक्टर रमीज मलिक का दाखिला (Admission) तत्काल प्रभाव से निरस्त करने और उसे यूनिवर्सिटी से बर्खास्त करने की कड़ी सिफारिश की है।
‘लव जिहाद’ के दावे पर रुख: कमेटी ने पीड़िता के साथ हुए शारीरिक शोषण और उत्पीड़न की बात तो मानी है, लेकिन मामले में लगाए गए ‘लव जिहाद’ (धार्मिक साजिश) के आरोपों से इनकार किया है।
यूनिवर्सिटी प्रशासन का कदम: कमेटी की इन सिफारिशों को केजीएमयू प्रशासन द्वारा अंतिम निर्णय और कार्यान्वयन के लिए शासन को भेज दिया गया है।
अपर्णा यादव का दौरा और बढ़ता दबाव
इस हाई-प्रोफाइल मामले में राजनीति भी गरमा गई है। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने स्वयं KGMU का दौरा किया। उनके आगमन के दौरान कुलपति (VC) कार्यालय में काफी गहमागहमी और हंगामा भी देखने को मिला। महिला आयोग ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई और पीड़िता को न्याय दिलाने की प्रतिबद्धता जताई थी, जिसके बाद पुलिस प्रशासन पर गिरफ्तारी का दबाव काफी बढ़ गया था।
Matribhumisamachar


