गुरुवार, सितंबर 10 2026 | 04:41:56 AM

लखनऊ KGMU कांड: डॉक्टर रमीज की जमानत याचिका खारिज, शादी का झांसा और जबरन धर्मांतरण के गंभीर आरोप

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ । शनिवार, 9 मई 2026

राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में एक बार फिर नैतिकता और कानून की सीमाओं को लांघने का मामला सामने आया है। एक हिंदू महिला डॉक्टर को प्रेम जाल में फँसाने, उसकी पहचान और वैवाहिक स्थिति छुपाकर शारीरिक शोषण करने और बाद में धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने के आरोपी रेजीडेंट डॉक्टर रमीज को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी की जमानत अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि और खुलासे

अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के अनुसार, यह विवाद वर्ष 2025 की शुरुआत में तब शुरू हुआ जब पीड़िता की मुलाकात डॉक्टर रमीज से हुई। आरोपी ने खुद को अविवाहित बताकर महिला डॉक्टर के साथ नजदीकियां बढ़ाईं और शादी का भरोसा देकर लगातार शारीरिक संबंध बनाए।

मामले में नया मोड़ सितंबर 2025 में आया, जब पीड़िता को अपनी गर्भावस्था का पता चला। आरोप है कि रमीज ने शादी की बात को टालते हुए उसका जबरन गर्भपात करा दिया। इसी दौरान पीड़िता की मुलाकात एक अन्य महिला से हुई, जिसने स्वयं को रमीज की पत्नी बताया। उस महिला ने खुलासा किया कि रमीज ने फरवरी 2025 में उसका भी धर्मांतरण कराकर निकाह किया था।

धर्मांतरण का दबाव और प्रताड़ना

जब पीड़िता ने इन सच्चाइयों पर सवाल उठाए, तो आरोपी ने अपना असली चेहरा दिखाते हुए निकाह के लिए धर्म परिवर्तन की अनिवार्य शर्त रख दी। कोर्ट में यह भी बताया गया कि रमीज और उसका परिवार संगठित रूप से महिलाओं पर इस्लाम अपनाने का दबाव बनाता था। लगातार हो रही ब्लैकमेलिंग और मानसिक प्रताड़ना से टूटकर पीड़िता ने 17 दिसंबर 2025 को आत्महत्या का प्रयास भी किया था।

कोर्ट का सख्त फैसला

न्यायालय ने जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि आरोपी पर लगे आरोप अत्यंत गंभीर हैं। पीड़िता द्वारा पेश किए गए साक्ष्य और यूपी के सख्त धर्मांतरण कानून के तहत दर्ज धाराओं को देखते हुए आरोपी को फिलहाल राहत देना समाज और न्याय प्रक्रिया के हित में नहीं होगा।

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।