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नाबालिग धर्म परिवर्तन मामले में महाराष्ट्र की कल्याण अदालत का ऐतिहासिक फैसला: ‘नाबालिग की सहमति कानूनी रूप से अमान्य’

Saransh Kanaujia
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ठाणे । 
महाराष्ट्र की कल्याण अदालत ने नाबालिगों के अधिकारों और सहमति से जुड़े एक अहम कानूनी मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि कानून की नजर में नाबालिग का धर्म परिवर्तन किसी भी स्थिति में स्वतंत्र या स्वैच्छिक निर्णय नहीं माना जा सकता। इस मामले में फैसला सुनाते हुए अदालत ने आरोपी को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
इस मामले के विस्तृत तथ्यों से लेकर अदालत की मुख्य टिप्पणियों तक, पूरा ब्योरा नीचे दिया गया है।
मामले का विवरण और कानूनी कार्यवाही
यह मामला वर्ष 2011 का है, जब ठाणे जिले के डोंबिवली की रहने वाली 15 वर्षीय नाबालिग लड़की को 25 वर्षीय आरोपी (अजहर उर्फ बदू मुश्ताक कुरैशी) लखनऊ ले गया। वहां एक धर्मगुरु से संपर्क कर नाबालिग से कागजात पर हस्ताक्षर करवाकर उसका धर्म परिवर्तन कराया गया।
बचाव पक्ष का तर्क था कि नाबालिग अपनी मर्जी से गई थी और उनके बीच प्रेम संबंध थे। हालांकि, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पी. पी. मुले (कल्याण सेशन कोर्ट) ने इस दलील को खारिज कर दिया।
  • आरोपी का नाम: अजहर उर्फ बदू मुश्ताक कुरैशी
  • नाबालिग की उम्र: 15 वर्ष
  • संबद्ध अदालत: विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट / सेशन कोर्ट, कल्याण (ठाणे जिला)
  • सजा: 10 वर्ष का कठोर कारावास (IPC धारा 376 के तहत) और जुर्माना
अदालत के महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु
  • कानूनी सहमति का अभाव: कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि नाबालिग “प्यार में अंधी” भी थी, तो भी कानूनन उसके पास सहमति देने की कानूनी क्षमता (Legal Capacity) नहीं थी।
  • स्वैच्छिक प्रक्रिया का खंडन: अदालत ने माना कि नाबालिग की उम्र और परिस्थितियों को देखते हुए धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया में उसकी भागीदारी को ‘स्वैच्छिक कार्य’ नहीं माना जा सकता।
  • योजनाबद्ध साजिश: अदालत ने नोट किया कि फर्जी नाम से टिकट बुक कराना और जबरन धर्मांतरण के तुरंत बाद संबंध बनाना आरोपी की पहले से तय दुर्भावनापूर्ण मंशा को दर्शाता है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1: कल्याण कोर्ट ने नाबालिग के धर्म परिवर्तन को लेकर क्या फैसला दिया?
अदालत ने माना कि एक नाबालिग की सहमति कानूनन मान्य नहीं होती, इसलिए उसका धर्म परिवर्तन स्वैच्छिक नहीं हो सकता।
Q2: इस मामले में आरोपी को क्या सजा सुनाई गई?
आरोपी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 (बलात्कार) के तहत 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।
Q3: क्या नाबालिग अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन कर सकता है?
भारतीय कानून के तहत 18 वर्ष से कम आयु के नाबालिगों के पास ऐसी गंभीर कानूनी सहमति देने का अधिकार नहीं होता।
Disclaimer
यह लेख मीडिया रिपोर्ट्स और अदालत द्वारा दिए गए फैसलों की सार्वजनिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल कानूनी जागरूकता और सूचना प्रदान करना है।

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