भोपाल । मंगलवार, 9 जून 2026
मंगलवार की शाम दिल्ली में निर्वाचन सदन (चुनाव आयोग मुख्यालय) के बाहर उस समय भारी राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला, जब मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया। इस फैसले की खबर आते ही कांग्रेस के शीर्ष नेताओं का गुस्सा फूट पड़ा। कांग्रेस डेलिगेशन चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंचा, जहां अंदर जाने की अनुमति न मिलने पर सुरक्षाकर्मियों और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद नेता वहीं गेट पर धरने पर बैठ गए।
क्यों रद्द हुआ मीनाक्षी नटराजन का नामांकन?
शुरुआती खबरों में केवल नामांकन रद्द होने और हंगामे की बात सामने आई थी, लेकिन इसके पीछे की कानूनी वजह बेहद गंभीर है।
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तथ्य और कारण: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अधिवक्ताओं ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने आपत्ति दर्ज कराई थी कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने चुनावी हलफनामे में एक आपराधिक मामले की जानकारी छुपाई है।
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तेलंगाना का कोर्ट केस: नटराजन के खिलाफ हैदराबाद की ‘फोर्थ एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट’ कोर्ट में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत एक शिकायत (Complaint) दर्ज है, जिसमें सितंबर 2025 में उन्हें अदालत की तरफ से नोटिस भी जारी हुआ था।
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कांग्रेस का पक्ष: कांग्रेस नेता सचिन पायलट और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का कहना है कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई एफआईआर (FIR) या चार्जशीट दर्ज नहीं है, बल्कि केवल एक अदालती नोटिस है। कांग्रेस ने इसे “लोकतंत्र की हत्या” बताते हुए इसके खिलाफ अदालत जाने का फैसला किया है।
निर्वाचन सदन के बाहर क्यों भिड़े जयराम रमेश और सुरक्षाकर्मी?
केसी वेणुगोपाल के नेतृत्व में कांग्रेस का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल (जिसमें जयराम रमेश, भूपेश बघेल और सचिन पायलट शामिल थे) शाम करीब 7:30 बजे चुनाव आयोग से मिलने पहुंचा था। विवाद तब शुरू हुआ जब सुरक्षाकर्मियों ने कांग्रेस नेताओं को गेट पर ही रोक दिया।
जयराम रमेश की तीखी प्रतिक्रिया
पिछले 35 वर्षों से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश को जब 10 मिनट से अधिक समय तक बाहर रोका गया, तो उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा:
“मैंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में ऐसे हालात कभी नहीं देखे। हम यहां अपनी शिकायत (Petition) लेकर आए हैं क्योंकि हमारे उम्मीदवार को अयोग्य घोषित किया गया है। जब हम सिर्फ अपना पक्ष रखना चाहते हैं, तो हमें कम से कम वेटिंग रूम में जाने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है? हमें जानबूझकर रोका जा रहा है।”
सचिन पायलट ने चुनाव आयोग को घेरा
धरने पर बैठे सचिन पायलट ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्होंने दो घंटे पहले ही लिखित में बैठक की जानकारी दी थी, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षाकर्मी कह रहे हैं कि अंदर कोई अधिकारी मौजूद नहीं है। पायलट ने आरोप लगाया कि जिस सीट पर कांग्रेस आसानी से जीत रही थी, वहां महज एक नोटिस के आधार पर जानबूझकर उम्मीदवार का पर्चा खारिज किया गया है।
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव का पूरा गणित
मध्य प्रदेश में आगामी 18 जून को राज्यसभा की तीन सीटों के लिए मतदान होना है। विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से यह मुकाबला बेहद दिलचस्प हो चुका था:
| दल (Party) | विधायकों की संख्या | राज्यसभा सीट का गणित |
| भाजपा (BJP) | 164 विधायक | 2 सीटें सुरक्षित (48 अतिरिक्त वोट शेष) |
| कांग्रेस (INC) | 61 प्रभावी विधायक | 1 सीट पर जीत तय (2 विधायक वोटिंग के लिए अपात्र) |
भाजपा ने तीसरी सीट पर भी अपना उम्मीदवार उतारकर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी थी। तीसरी सीट जीतने के लिए भाजपा को 10 अतिरिक्त वोटों की जरूरत थी, जिसके लिए कांग्रेस के विधायकों को बेंगलुरु शिफ्ट करने की तैयारी चल रही थी (यहाँ तक कि विधायकों का चार्टर्ड विमान रनवे से वापस लौटा लाया गया)। लेकिन अब मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद भाजपा के लिए तीसरी सीट की राह बेहद आसान हो गई है।
आगे क्या करेगी कांग्रेस?
कांग्रेस इस फैसले को स्वीकार करने के मूड में नहीं है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि वे इस असंवैधानिक फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे और इसके विरोध में सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर चुनाव आयोग की निष्पक्षता और वीआईपी सुरक्षा प्रोटोकॉल पर राजनीतिक बहस छेड़ दी है।
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