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पैकेज्ड फूड पर वॉर्निंग लेबल में देरी क्यों? सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI को लगाई कड़ी फटकार; पूछा- क्या फूड इंडस्ट्री के दबाव में काम कर रहा है नियामक?

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read
नई दिल्ली । गुरुवार, 13 अगस्त 2026
क्या आप जानते हैं कि आपके बच्चे जो पैकेट बंद चिप्स, बिस्किट या ज्यूस बड़े चाव से खाते हैं, उनमें चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट की कितनी मात्रा है? इन्हीं नुकसानदेह तत्वों की पहचान आसान बनाने के लिए Front-of-Pack Warning Labels (FOPWL) अनिवार्य करने की मांग लंबे समय से उठ रही है।
हालिया सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने पैकेज्ड फूड पर स्पष्ट चेतावनी लेबल लागू करने में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की हिचकिचाहट और ढिलाई पर सख्त नाराजगी जताई है।

सुप्रीम कोर्ट के तीखे सवाल: उपभोक्ता का स्वास्थ्य या कंपनियों का मुनाफा?

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान FSSAI की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने नियामक से पूछा कि क्या उसका यह ढुलमुल रवैया बड़ी फूड कंपनियों और कॉर्पोरेट लॉबी के दबाव का नतीजा है?
अदालत की मुख्य टिप्पणी:
“उपभोक्ताओं, विशेषकर बच्चों के स्वास्थ्य से समझौता नहीं किया जा सकता। क्या खाद्य नियामक की प्राथमिकता नागरिकों का स्वास्थ्य है या खाद्य उद्योग के व्यावसायिक हित?”
कोर्ट ने केंद्र सरकार और FSSAI को इस मामले पर अपना अंतिम रुख स्पष्ट करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि नियामक कोई सख्त और ठोस कदम उठाने में असमर्थ रहता है, तो अदालत स्वयं इसके लिए अनिवार्य दिशानिर्देश जारी करेगी।

FOPWL और Indian Nutrition Rating (INR) में क्या अंतर है?

वर्तमान में सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर है कि खाद्य पदार्थों के पैकेट के सामने किस प्रकार की जानकारी दी जाए:
विशेषताFront-of-Pack Warning Label (FOPWL)Indian Nutrition Rating (INR)
प्रारूपपैकेट के सामने साफ चेतावनी संकेत।1 से 5 स्टार रेटिंग (स्वास्थ्यप्रद के आधार पर)।
मुख्य उद्देश्यHigh Sugar, High Salt या High Fat को तुरंत हाइलाइट करना।उत्पाद की ओवरऑल न्यूट्रिशन क्वालिटी दर्शाना।
कमजोरी/लाभउपभोक्ता को सेकंडों में समझ आ जाता है कि कौन सा उत्पाद हानिकारक है।कंपनियां फाइबर या प्रोटीन जोड़कर हाई-शुगर को स्टार रेटिंग से छिपा सकती हैं।
विशेषज्ञों की रायजनस्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे सर्वोत्तम मानते हैं।उपभोक्ता भ्रमित हो सकते हैं।

आम उपभोक्ताओं और बच्चों की सेहत पर क्या होगा असर?

यदि देश में स्पष्ट Front-of-Pack Warning Labels अनिवार्य किए जाते हैं, तो इसका सीधा असर भारतीय परिवारों के खान-पान पर पड़ेगा:
  1. आसान पहचान: आम नागरिक बिना किसी जटिल न्यूट्रिशन चार्ट को पढ़े तुरंत जान सकेंगे कि कौन सा पैकेट सेहत के लिए हानिकारक है।
  2. मोटापे और डायबिटीज पर लगाम: भारत में बच्चों और युवाओं में बढ़ती डायबिटीज और मोटापे (Obesity) की रोकथाम में यह क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है।
  3. प्रोडक्ट सुधार (Reformulation): वॉर्निंग लेबल के डर से कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स में अनहेल्दी नमक, चीनी और फैट की मात्रा कम करने पर मजबूर होंगी।

बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. FOPWL (Front-of-Pack Warning Label) क्या है?

FOPWL का अर्थ है पैकेज्ड खाद्य पदार्थों के पैकेट पर सामने की तरफ दी जाने वाली स्पष्ट चेतावनी, जो यह बताती है कि उस उत्पाद में चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट की मात्रा तय सीमा से अधिक है या नहीं।

2. FSSAI की ‘स्टार रेटिंग’ प्रणाली का विरोध क्यों हो रहा है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि स्टार रेटिंग मॉडल से उपभोक्ता भ्रमित हो सकते हैं, क्योंकि इसमें प्रोटीन या फाइबर जैसे तत्वों के कारण अत्यधिक मीठे या नमकीन उत्पादों को भी बेहतर रेटिंग मिल सकती है।

3. सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI को कितना समय दिया है?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और FSSAI को पैकेज्ड फूड चेतावनी लेबल पर अपना अंतिम फैसला पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

 

अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख सुप्रीम कोर्ट में पैकेज्ड फूड लेबलिंग और FSSAI से जुड़े मामले पर जन-जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह किसी भी ब्रांड का विज्ञापन या चिकित्सीय सलाह नहीं है। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी निर्णय के लिए योग्य न्यूट्रिशनिस्ट या डॉक्टर से परामर्श लें।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।