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UP News: ‘छोटी काशी’ में काशी विश्वनाथ जैसा अहसास, 12 हजार वर्ग फीट में बनेगा भव्य ग्रीन पार्क; जानें नया अपडेट

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

लखनऊ | शनिवार, 11 अप्रैल 2026

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में स्थित ‘छोटी काशी’ यानी गोला गोकर्णनाथ मंदिर के कायाकल्प का कार्य अब अपने अंतिम चरण में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘शिव मंदिर कॉरिडोर’ के तहत मंदिर परिसर को भव्य और सुविधाजनक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। ताज़ा अपडेट के अनुसार, मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं को प्रकृति के करीब लाने के लिए 12 हजार वर्ग फीट के विशाल क्षेत्र में एक आधुनिक ग्रीन पार्क विकसित किया जा रहा है।

12 हजार वर्ग फीट में हरियाली का कवच

यूपीपीसीएल (UPPCL) के अधिकारियों की देखरेख में मुख्य मंदिर के पास स्थित समाधि स्थल की भूमि को समतल करने का काम पूरा होने वाला है।

  • घास और पौधारोपण: यहाँ विशेष किस्म की घास बिछाई जाएगी और चारों तरफ छायादार वृक्ष लगाए जाएंगे।

  • श्रद्धालुओं के लिए सुविधा: पार्क में बैठने के लिए आधुनिक सीटों और बेंचों की व्यवस्था होगी, जहाँ भक्त दर्शन के बाद विश्राम कर सकेंगे।

कैटेगरी लिंक: Matribhumisamachar – उत्तर प्रदेश समाचार

औषधीय खुशबू से महकेगा तीर्थ सरोवर मार्ग

कॉरिडोर के आकर्षण का केंद्र तीर्थ सरोवर होगा। सरोवर के चारों ओर बन रहे पाथवे (पैदल मार्ग) के किनारे कम ऊंचाई वाले औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए विभाग ने सैकड़ों गमले तैयार कर लिए हैं। जैसे ही सरोवर का फिनिशिंग कार्य पूरा होगा, इन पौधों को वहां स्थापित कर दिया जाएगा, जिससे पूरा वातावरण शुद्ध और सुगंधित बना रहेगा।

विकास के साथ पर्यावरण का संगम: सुरक्षित रहेगा ‘पीपल’

परियोजना में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि किसी भी पुराने वृक्ष को नुकसान न पहुंचे। तीर्थ सरोवर के दक्षिण-पूर्व कोने और ग्रीन पार्क के पश्चिम में स्थित दशकों पुराने पीपल के वृक्ष को कॉरिडोर के नक्शे में इस तरह शामिल किया गया है कि वह सुरक्षित रहे।

मुख्य समाचार लिंक: UP News: ‘छोटी काशी’ में काशी विश्वनाथ जैसा अहसास – Matribhumisamachar

कॉरिडोर की 5 बड़ी नई सुविधाएं (Latest Update 2026):

सुविधाविवरण
नया प्रवेश द्वारग्रीन पार्क से कानपुर धर्मशाला तक सीधा रास्ता, जिससे श्रद्धालु कैंटीन और शौचालय का उपयोग कर सकेंगे।
5 भव्य द्वारपूरे कॉरिडोर में 5 अलग-अलग प्रवेश द्वार बनाए जा रहे हैं, जिनके नाम पौराणिक आधार पर रखे जाएंगे।
म्यूरल पेंटिंग्समुख्य प्रवेश द्वार की दीवारों पर राजस्थान के शिल्पकारों द्वारा भगवान शिव की अद्भुत कलाकृतियां और मंत्र उकेरे जा रहे हैं।
थ्री-लेयर सिक्योरिटीसुरक्षा के लिए आधुनिक CCTV कंट्रोल रूम और हाई-टेक लाइटिंग की व्यवस्था की गई है।
पार्किंग व्यवस्थाडल्लूराम धर्मशाला के पास दो पहिया वाहन पार्किंग तैयार है; चार पहिया वाहनों के लिए बड़ी पार्किंग का काम प्रस्तावित है।

मई के अंत तक पूरा होगा प्रोजेक्ट

यूपीपीसीएल के जूनियर इंजीनियर एपी सिंह के अनुसार, “कॉरिडोर का लगभग 80% कार्य पूरा हो चुका है। अब फिनिशिंग और सौंदर्यकरण पर जोर दिया जा रहा है। हमारा लक्ष्य है कि मई 2026 के अंत तक इसे पूरी तरह श्रद्धालुओं के लिए समर्पित कर दिया जाए।”

अहम जानकारी: 69.15 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस कॉरिडोर के पूरा होने के बाद गोला गोकर्णनाथ न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र होगा, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के नक्शे पर एक बड़े धार्मिक पर्यटन (Religious Tourism) स्थल के रूप में उभरेगा।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।