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इल्तिजा मुफ्ती का ‘X’ अकाउंट भारत में बैन: अलगाववादी वीडियो शेयर करने पर साइबर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

जम्मू | सोमवार, 11 मई 2026

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की सक्रिय नेता इल्तिजा मुफ्ती का पर्सनल सोशल मीडिया अकाउंट ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) भारत में ब्लॉक कर दिया गया है। यह कार्रवाई भारत सरकार की एक ‘कानूनी मांग’ (Legal Demand) के अनुपालन में की गई है।

विवाद की जड़: क्या था उस वीडियो में?

इल्तिजा मुफ्ती के खिलाफ यह कार्रवाई हाल ही में उनके द्वारा साझा किए गए एक पुराने वीडियो के कारण हुई है। यह वीडियो दिवंगत अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी से संबंधित है, जिसमें वह कश्मीर में उर्दू भाषा के महत्व पर चर्चा कर रहे हैं।

हालाँकि इल्तिजा ने स्पष्ट किया था कि वह गिलानी की विचारधारा से सहमत नहीं हैं, लेकिन उर्दू पर उनके विचारों को उन्होंने “देखने लायक” बताया था। प्रशासन का तर्क है कि प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-हुर्रियत से जुड़े नेताओं के कंटेंट को साझा करना अलगाववादी विमर्श को बढ़ावा देने जैसा है।

साइबर पुलिस की FIR (नंबर 11/2026)

श्रीनगर साइबर पुलिस स्टेशन में इल्तिजा मुफ्ती के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है।

  • आरोप: वीडियो साझा करने के माध्यम से अलगाववादी और देशद्रोही विचारों को जानबूझकर फैलाने का प्रयास।

  • पुलिस का तर्क: ऐसी सामग्री से जनता में असंतोष भड़क सकता है और सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order) बिगड़ने की संभावना है।

इल्तिजा मुफ्ती की प्रतिक्रिया

अपने अकाउंट पर बैन लगने से पहले इल्तिजा मुफ्ती ने सार्वजनिक रूप से इस पोस्ट की पूरी जिम्मेदारी ली थी। उन्होंने अधिकारियों से अपील की:

“मैं इस वीडियो को पोस्ट करने के लिए पूरी तरह जिम्मेदार हूँ। कृपया उन आम नागरिकों या समर्थकों को परेशान न करें जिन्होंने इसे केवल लाइक या रीपोस्ट किया है।”

राजनीतिक पृष्ठभूमि

इल्तिजा मुफ्ती ने 2024 के जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में अपनी पारंपरिक सीट बिजबेहड़ा से चुनाव लड़ा था, हालांकि उन्हें नेशनल कॉन्फ्रेंस के उम्मीदवार से हार का सामना करना पड़ा था। वह अपनी मां की गिरफ्तारी के समय से ही कश्मीर के मुद्दों पर सोशल मीडिया पर काफी मुखर रही हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।