सोमवार, जनवरी 19 2026 | 11:50:17 PM
Breaking News
Home / खेल / अनुराग सिंह और अश्मिता चंद्रा ने केआईबीजी 2026 में स्वर्ण पदक जीते; भारत में प्रतिस्पर्धी ओपन वॉटर स्विमिंग अब बना रही पकड़

अनुराग सिंह और अश्मिता चंद्रा ने केआईबीजी 2026 में स्वर्ण पदक जीते; भारत में प्रतिस्पर्धी ओपन वॉटर स्विमिंग अब बना रही पकड़

Follow us on:

केआईबीजी में इस वर्ष ओपन वॉटर स्विमिंग के प्रतिभागियों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है
वर्षों तक ओपन वॉटर स्विमिंग को एक तरह के अभियान के रूप में देखा जाता रहा, जहाँ तैराकों का ध्यान इंग्लिश चैनल पार करने या लंबी दूरी की तैराकी पर केंद्रित रहता था
ओपन वॉटर स्विमिंग अब एक ओलंपिक खेल बन चुका है और इससे उम्मीद है कि पूल स्विमिंग से जुड़े कई और तैराक इस विधा की ओर आकर्षित होंगे

दिल्ली, जनवरी 2026: भारत में ओपन वॉटर या समुद्री तैराकी का उल्लेख होते ही दशकों तक सहनशक्ति आधारित अभियानों की तस्वीर उभरती रही है। ऐसी लंबी और एकाकी यात्राएँ, जिनका उद्देश्य इंग्लिश चैनल को पार करना या खुले समुद्र में मैराथन दूरी तय करना होता था। मिहिर सेन और बुला चौधरी जैसे दिग्गजों ने इन तैराकियों को साहस और दृढ़ संकल्प का प्रतीक बना दिया। उनके बाद कई तैराकों ने धरमतर से गेटवे ऑफ इंडिया जैसे मार्गों पर लहरों से मुकाबला करते हुए रिकॉर्ड बनाने और पहचान हासिल करने का सपना देखा।

हालाँकि, समय के साथ ऐसे अभियानों पर असर पड़ा। इंग्लिश चैनल में यह नियम लागू किया गया कि केवल 14 वर्ष से अधिक आयु के तैराक ही प्रयास कर सकते हैं और धीरे-धीरे अन्य अभियानों ने भी इसी नियम का पालन करना शुरू कर दिया। इससे कई युवा प्रतिभाओं के सपनों को झटका लगा।

महाराष्ट्र टीम की मैनेजर नेहा सपटे भी उन्हीं में से एक थीं, जिन्होंने यह नियम लागू होने से पहले मात्र नौ वर्ष की उम्र में धरमतर से गेटवे तक तैराकी पूरी की थी। उन्होंने कहा, “उस नियम की वजह से मैंने शूटिंग को अपना लिया और मुझे खुशी है कि आगे चलकर मैं उस खेल में भारत का प्रतिनिधित्व कर सकी।”

लेकिन, अब ओपन वॉटर स्विमिंग एक ओलंपिक खेल बन चुकी है। इसे 2008 बीजिंग ओलंपिक में शामिल किया गया, जिसमें समुद्र या नदी में 10 किलोमीटर की सर्किट रेस कराई जाती है। इसी बदलाव ने इस खेल को नए सिरे से दिशा दी है और अब फोकस अभियानों से हटकर प्रतिस्पर्धा पर आ गया है।

खेलो इंडिया बीच गेम्स 2026 में उत्तर प्रदेश के अनुराग सिंह और कर्नाटक की अश्मिता चंद्रा ने क्रमशः पुरुष और महिला वर्ग की 10 किलोमीटर रेस में स्वर्ण पदक जीते। दोनों खिलाड़ी इससे पहले खेलो इंडिया यूथ गेम्स और खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में पदक जीत चुके हैं।

अनुराग और अश्मिता दोनों ने इस प्रतियोगिता की तैयारी स्विमिंग पूल में की, जहाँ उन्होंने सहनशक्ति पर विशेष ध्यान दिया। उनके प्रशिक्षण सत्र इतने कठोर थे कि वे दिन में दो या तीन बार, लगभग छह से सात घंटे पानी में बिताते थे। अनुराग ने 2:22:02 सेकेंड का समय लेकर स्वर्ण पदक जीता, जबकि अश्मिता ने 2:46:34 सेकेंड में रेस पूरी की।

पूल से ओपन वॉटर में संक्रमण कितना चुनौतीपूर्ण होता है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्विमिंग पूल में सबसे लंबी प्रतिस्पर्धी दूरी 1500 मीटर होती है, जबकि ओलंपिक आंदोलन ओपन वॉटर स्विमिंग में केवल 5 किलोमीटर और 10 किलोमीटर की दूरी को मान्यता देता है।

चार ओपन वॉटर वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा ले चुकीं अश्मिता ने पूल और समुद्र में तैराकी के बीच तकनीकी अंतर को समझाया। उन्होंने कहा, “समुद्र में दूरी के अलावा लहरें और कोर्स अपने आप में बड़ी चुनौती होते हैं। रेस से एक दिन पहले मैं खुद को सबसे खराब हालात के लिए मानसिक रूप से तैयार करती हूँ। आमतौर पर एक लैप में ही ज्वार-भाटे को समझ लिया जाता है और फिर मैं अपनी गति पर ध्यान केंद्रित करती हूँ।”

समुद्र में ओपन वॉटर प्रतियोगिता आयोजित करना भी अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। आयोजकों को एक महीने पहले ज्वार-भाटे की तालिका का अध्ययन करना पड़ता है और फिर हर हफ्ते उस पर नजर रखनी होती है, ताकि रेस का सटीक समय तय किया जा सके।

खेलो इंडिया बीच गेम्स 2026 के प्रतियोगिता प्रबंधक राहुल चिपलुंकर ने बताया, “हमें ज्वार के अंतर में सबसे कम रहने वाला समय चुनना होता है, क्योंकि अगर धार बहुत तेज हो तो लूप में तैराकी करना बेहद कठिन हो जाता है।”

उन्होंने आगे कहा, “पानी उथल-पुथल भरा होता है और उसमें ग्लाइड ज्यादा होती है, जिसकी वजह से स्ट्रोक भी पूल से अलग होते हैं। तैराकों को दिशा पहचानने और ज्वार की स्थिति के अनुसार अपनी रेस की योजना बनाने का भी अभ्यास करना पड़ता है।”

अनुराग ने स्वीकार किया कि समुद्री तैराकी के इन तकनीकी पहलुओं का उन्होंने अभी तक गहराई से अध्ययन नहीं किया है, क्योंकि यह उनके लिए नया अनुशासन है और खेलो इंडिया बीच गेम्स से पहले उन्होंने केवल कुछ ही ओपन वॉटर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया था। उन्होंने कहा, “मैं दिल्ली में ट्रेनिंग करता हूँ और वहाँ समुद्र नहीं है, इसलिए मेरी सारी तैयारी पूल में ही हुई है।”

वर्ष 2016 की सी हॉक रिले टीम का हिस्सा रहे राहुल चिपलुंकर, जिन्होंने मुंबई से मंगलुरु तक 1000 किलोमीटर की दूरी तैरकर पूरी की थी, का मानना है कि खेलो इंडिया बीच गेम्स में समुद्री तैराकी को शामिल किए जाने से इस खेल में खिलाड़ियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और अब भारत को इस अनुशासन के लिए एक संरचित विकास योजना की जरूरत है।

उन्होंने कहा, “पहले दीव बीच गेम्स में लगभग 40 प्रतिभागी थे। पहले खेलो इंडिया बीच गेम्स में यह संख्या बढ़कर 50 हो गई और इस संस्करण में 70 तैराक हिस्सा ले रहे हैं।”

उन्होंने आगे जोड़ा, “भारत की तटरेखा बेहद लंबी है और हम ओपन वॉटर स्विमिंग में काफी अच्छा कर सकते हैं। गोवा और कर्नाटक का समुद्र अपेक्षाकृत शांत है और समुद्री तैराकी के लिए अनुकूल है। फिलहाल समुद्र में प्रशिक्षण लेना विभिन्न अनुमतियों के कारण चुनौतीपूर्ण है। यदि इसे सुलझा लिया जाए, तो यह भारत कई और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के तैराक तैयार कर सकता है।”

Featured Article

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

T20 सीरीज के लिए टीम इंडिया का ऐलान: श्रेयस अय्यर की 2 साल बाद वापसी, तिलक वर्मा बाहर—क्या गंभीर का दांव सफल होगा?

नई दिल्ली. भारत और न्यूजीलैंड के बीच 21 जनवरी 2026 से शुरू होने वाली 5 …