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कानपुर में स्वास्थ्य माफियाओं पर बड़ा एक्शन: बिठूर कांड के बाद 22 अवैध अस्पताल चिन्हित, कई सेंटर सील

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कानपुर. बिठूर में 19 घंटे की नवजात बच्ची की दर्दनाक मौत के बाद प्रशासन ने स्वास्थ्य माफियाओं पर नकेल कसना शुरू कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कल्याणपुर और आसपास के इलाकों में ताबड़तोड़ छापेमारी की, जिसमें स्वास्थ्य सेवाओं की एक डरावनी तस्वीर सामने आई है। जांच में शामिल 27 अस्पतालों में से 22 अवैध रूप से संचालित पाए गए हैं।

वार्मर कांड के बाद बढ़ी सख्ती

बिठूर के एक निजी अस्पताल में वार्मर से जलकर हुई नवजात की मौत ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए थे। इस घटना से सबक लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के निर्देश पर गठित टीमों ने न्यू शिवली रोड और कल्याणपुर में जांच अभियान चलाया। प्रशासन ने पाया कि कई अस्पतालों में न डॉक्टर थे और न ही प्रशिक्षित स्टाफ, फिर भी वहां गंभीर मरीजों का इलाज किया जा रहा था।

इन अस्पतालों पर गिरा प्रशासन का चाबुक

जांच के दौरान विभाग ने तत्काल प्रभाव से निम्नलिखित कार्यवाही की है:

  • खाटू नर्सिंग होम: बिना लाइसेंस ICU चलता मिला, जिसे तुरंत सीज कर दिया गया।

  • एहसास हेल्थ सेंटर: अस्पताल पंजीकृत था, लेकिन अवैध रूप से NICU संचालित करने पर उसे सील किया गया।

  • एंजल, रिलैक्स और जीवन हेल्थ सेंटर: इन तीनों अस्पतालों की ओटी (OT) सील कर दी गई है।

  • नोटिस की जद में: श्री राधे, चरक, आरोग्य, रुद्राक्ष, माधव, और मां वैष्णवी सहित 14 अन्य अस्पतालों को नोटिस थमाया गया है।

आंकड़ों का बड़ा खेल: 485 पंजीकृत, 2000 सक्रिय

स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, शहर में केवल 485 अस्पताल ही पंजीकृत हैं, जबकि वास्तविकता में 2000 से ज्यादा अस्पताल और नर्सिंग होम धड़ल्ले से चल रहे हैं। छापेमारी में पाया गया कि कई जगह मानकों को ताक पर रखकर गंदगी के बीच मरीजों का उपचार किया जा रहा था।

“अवैध रूप से संचालित किसी भी अस्पताल को बख्शा नहीं जाएगा। सील किए गए केंद्रों के मरीजों को सुरक्षित शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। यह अभियान लगातार जारी रहेगा।” > — जिलाधिकारी, कानपुर

3 दिन का अल्टीमेटम

प्रशासन ने चिन्हित किए गए 22 अस्पतालों को 3 दिन के भीतर अपनी व्यवस्था सुधारने या मरीजों को शिफ्ट करने का नोटिस दिया है। यदि समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो इन केंद्रों को पूरी तरह बंद कर विधिक कार्यवाही की जाएगी।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।