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कावेरी जल विवाद: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली, जानिए क्यों आमने-सामने हैं तमिलनाडु और कर्नाटक

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चेन्नई । बुधवार, 12 अगस्त 2026
कावेरी नदी जल बंटवारे को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच चल रहा गतिरोध एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। तमिलनाडु सरकार द्वारा कर्नाटक से तय मात्रा में पानी छोड़ने के निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई 17 अगस्त 2026 तक स्थगित कर दी है।

क्या है 12,000 क्यूसेक पानी का मुख्य विवाद?

विवाद के केंद्र में कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के वे निर्देश हैं, जिनके तहत तमिलनाडु के लिए प्रतिदिन 12,000 क्यूसेक पानी छोड़े जाने का प्रावधान है।
  • तमिलनाडु का पक्ष: राज्य के कावेरी डेल्टा (तंजावुर, तिरुचिरापल्ली आदि) के किसान सिंचाई और अपनी ‘कुरुवई’ तथा ‘संबा’ फसलों के लिए पूरी तरह कावेरी जल पर निर्भर हैं। पानी समय पर न मिलने से कृषि गतिविधियां ठप हो रही हैं।
  • कर्नाटक का पक्ष: कर्नाटक का तर्क है कि मानसून में कम बारिश के कारण उसके अपने जलाशयों (जैसे कृष्णराजसागर और काबिनी) में जल स्तर गिर जाता है। राज्य के अनुसार, बेंगलुरु शहर की पेयजल जरूरतों और स्थानीय किसानों की मांग को देखते हुए निर्धारित मात्रा में पानी छोड़ना व्यावहारिक नहीं है।

कावेरी विवाद का ऐतिहासिक घटनाक्रम

1892 एवं 1924 के समझौते
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेन्सी और मैसूर रियासत के बीच जल वितरण को लेकर पहला समझौता हुआ।
CWDT का गठन
1990 – 2007
केंद्र ने ‘कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण’ (CWDT) गठित किया, जिसने 2007 में अंतरिम और अंतिम जल आवंटन का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट का लैंडमार्क फैसला
फरवरी 2018
सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम फैसला सुनाते हुए तमिलनाडु का वार्षिक हिस्सा 177.25 TMC तय किया और बेंगलुरु के लिए कर्नाटक का आवंटन बढ़ाया।
CWMA और CWRC का गठन
जून 2018
जल बंटवारे की दैनिक एवं मासिक निगरानी के लिए केंद्रीय प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) और नियमन समिति (CWRC) बनाई गई।

क्यों संवेदनशील है कावेरी नदी जल बंटवारा?

कावेरी नदी दक्षिण भारत की सबसे प्रमुख नदियों में से एक है। मानसून के दौरान बारिश की अनिश्चितता इस विवाद को और जटिल बना देती है:
  1. सिंचाई निर्भरता: तमिलनाडु का डेल्टा क्षेत्र भारत के प्रमुख चावल उत्पादक क्षेत्रों में से एक है, जो पूरी तरह नदी के प्रवाह पर आश्रित है।
  2. पेयजल की आवश्यकता: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु सहित कई शहरी केंद्रों की पेयजल आपूर्ति कावेरी के पानी से जुड़ी है।
  3. कम बारिश और संकट-बंटवारा (Distress Sharing): जब मानसून सामान्य से कम रहता है, तब दोनों राज्यों के बीच ‘संकट के समय पानी का वितरण कैसे हो’ (Distress Formula) को लेकर मतभेद गहरा जाते हैं।
17 अगस्त 2026 को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर दोनों राज्यों के किसानों और सरकारों की निगाहें टिकी हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. कावेरी नदी किन राज्यों से होकर गुजरती है?
कावेरी नदी का उद्गम कर्नाटक के कोडागु जिले में तालाकावेरी से होता है। यह कर्नाटक और तमिलनाडु से बहते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरती है, जबकि इसका जलग्रहण क्षेत्र केरल और पुडुचेरी तक फैला है।
Q2. कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) क्या काम करता है?
CWMA सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप विभिन्न राज्यों (तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और पुडुचेरी) के बीच जल भंडारण, प्रवाह और दैनिक/मासिक वितरण का नियमन करता है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख उपलब्ध कानूनी याचिकाओं, सरकारी रिपोर्टों और सार्वजनिक समाचार स्रोतों पर आधारित एक विश्लेषणात्मक विवरण है। 
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