मुंबई |
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने वायदा एवं विकल्प (F&O) खंड में एक्सपायरी वाले दिन होने वाले निपटान (Settlement) और क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए 12 सितंबर 2026 को एक विस्तृत परामर्श पत्र (Consultation Paper) जारी किया है। 3 अगस्त 2026 को F&O शेयरों के लिए लागू की गई CAS प्रणाली के बाद बाजार प्रतिभागियों से मिले फीडबैक और एक्सपायरी के दौरान दिखी तेज वोलेटिलिटी को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
इस परामर्श पत्र का मुख्य उद्देश्य कैश मार्केट और डेरीवेटिव्ज़ मार्केट के बीच प्राइज डिस्कवरी का बेहतर तालमेल बैठाना और अंतिम क्षणों में होने वाली अनिश्चितता को कम करना है।
1. Expiry Settlement Price तय करने के लिए 2 विकल्प
SEBI ने एक्सपायरी के दिन निफ्टी, बैंक निफ्टी या F&O स्टॉक्स का फाइनल सेटलमेंट प्राइस तय करने के लिए दो नए रास्ते दिए हैं:
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विकल्प 1: Blended VWAP (मिश्रित वॉल्यूम Weighted Average Price): इसमें Continuous Trading Session (CTS) के अंतिम 30 मिनट और CAS (10 मिनट) में हुए वास्तविक कारोबार दोनों को मिलाकर सेटलमेंट प्राइस तय होगा। इसमें किसी तय फॉर्मूले के बजाय ट्रेड हुई वास्तविक वैल्यू के अनुपात में दोनों सेशन का योगदान तय होगा।
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विकल्प 2: CTS VWAP (अस्थाई पुरानी व्यवस्था): इसमें केवल अंतिम 30 मिनट के CTS VWAP को ही आधार माना जाएगा और CAS को सेटलमेंट से बाहर रखा जाएगा। कम से कम 1 साल तक इस व्यवस्था के जरिए बाजार की तरलता (liquidity) का आकलन करने के बाद ही Blended VWAP पर शिफ्ट किया जाएगा।
2. Market Timing और F&O Window में कटौती
SEBI ने ट्रेडिंग सेशन और ऑक्शन टाइमिंग को लेकर दो नए टाइम टेबल प्रस्तावित किए हैं, जिसमें पोस्ट-CAS F&O विंडो को 10 मिनट से घटाकर 5 मिनट और ट्रांजेक्शन गैप को घटाकर 1 मिनट करने की बात कही गई है:
| चरण / सेशन | विकल्प A (Option A) | विकल्प B (Option B) |
| Continuous Trading (CTS) | शाम 3:30 बजे तक | दोपहर 3:15 बजे तक |
| Closing Auction (CAS) | 3:31 PM से 3:40 PM | 3:16 PM से 3:25 PM |
| F&O Post-CAS Window | शाम 3:45 बजे तक | शाम 3:30 बजे तक |
3. Indicative Index Value (IIV) के प्रसारण पर रोक
CAS के दौरान सिंगल स्टॉक्स के Indicative Equilibrium Prices (IEPs) लाइव दिखाए जाते रहेंगे, लेकिन इनसे बनने वाले Indicative Index Value (IIV) को ब्रॉडकास्ट करने पर रोक का प्रस्ताव है। SEBI का मानना है कि IIV वास्तविक रूप से निष्पादित (executed) ट्रेड नहीं होता, जिसे देखकर ट्रेडर्स गलतफहमी में आकर ऑप्शंस में गलत पोज़िशन बना लेते हैं।
4. Limit Orders और Iceberg Orders पर नए नियम
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1% से दूर Limit Orders पर नियंत्रण: Reference Price से ±1% से ±3% के दायरे में रखे गए लिमिट ऑर्डर्स को कैंसिल (रद्द) करने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, ऑर्डर में प्राइज सुधारने (Price-improving modification) की छूट रहेगी।
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Iceberg Orders की भागीदारी: CTS के असंसाधित Iceberg ऑर्डर्स को CAS के दौरान सामान्य लिमिट ऑर्डर में बदल दिया जाएगा, जिससे पूरे मार्केट की लिक्विडिटी ऑक्शन बुक में नज़र आ सके।
ट्रेडर्स और निवेशकों पर क्या असर होगा?
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Spoofing और हेरफेर पर लगाम: एक्सपायरी के दिन आखिरी 15 मिनटों में ऑप्शंस प्राइसेज में होने वाले अचानक और अस्वाभाविक उतार-चढ़ाव (Slippages) में कमी आएगी।
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अनुशासित एग्जिट: Post-CAS F&O विंडो 5 मिनट की रहने के कारण इन-द-मनी (ITM) या आउट-ऑफ-द-मनी (OTM) कॉन्ट्रैक्ट्स को स्क्वायर-ऑफ करने के लिए अधिक मुस्तैदी की आवश्यकता होगी।
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पारदर्शिता: केवल वास्तविक एक्सिक्यूटेड ट्रेड्स के आधार पर इंडेक्स क्लोजिंग तय होने से रिटेल ट्रेडर्स को सटीक डेटा मिलेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. क्या SEBI ने Closing Auction Session (CAS) को पूरी तरह बंद कर दिया है?
उत्तर: नहीं, SEBI अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने स्पष्ट किया है कि CAS बना रहेगा। केवल F&O सेटलमेंट और ऑक्शन के तालमेल से जुड़े नियमों में सुधार का प्रस्ताव रखा गया है।
Q2. यह नियम कब से लागू होंगे?
उत्तर: अभी ये प्रस्ताव (Draft Guidelines) के रूप में हैं। SEBI ने बाजार प्रतिभागियों से 3 अक्टूबर 2026 तक सुझाव मांगे हैं, जिसके बाद अंतिम नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा।
Q3. F&O Expiring Settlement के लिए Blended VWAP क्या है?
उत्तर: Blended VWAP में अंतिम 30 मिनट के continuous trading session और 10 मिनट के closing auction session दोनों में हुए वास्तविक ट्रेड वॉल्यूम के आधार पर औसतन क्लोजिंग प्राइस निकाली जाएगी।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख केवल शैक्षणिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए लिखा गया है। यह किसी भी प्रकार की वित्तीय, कानूनी या ट्रेडिंग सलाह नहीं है। शेयर बाजार में वायदा एवं विकल्प (F&O) ट्रेडिंग जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश या ट्रेडिंग निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार (SEBI Registered Advisor) से परामर्श अवश्य लें।
