शनिवार, जून 20 2026 | 12:54:50 AM
Breaking News
Home / व्यापार / 8th Pay Commission: क्या उम्र के साथ बढ़ेगी बुजुर्गों की पेंशन? जानिए क्या है नया Age-Based Pension Formula

8th Pay Commission: क्या उम्र के साथ बढ़ेगी बुजुर्गों की पेंशन? जानिए क्या है नया Age-Based Pension Formula

Follow us on:

नई दिल्ली । शनिवार, 13 जून 2026

देश में 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर सुगबुगाहट बहुत तेज हो चुकी है। केंद्रीय कर्मचारियों से लेकर पेंशनभोगियों तक, हर कोई अपनी-अपनी मांगों को लेकर सरकार के सामने प्रस्ताव रख रहा है। जहां एक तरफ फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) और महंगाई भत्ते (DA/DR Reset) को लेकर जोरों-शोरों से चर्चाएं हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ देश के रिटायर हो चुके बुजुर्ग कर्मचारियों ने एक ऐसा ऐतिहासिक प्रस्ताव सामने रखा है जो भारत के पूरे पेंशन ढांचे (Pension Structure) को बदल कर रख सकता है।

विभिन्न पेंशनभोगी संगठनों और नेशनल काउंसिल जेसीएम (NC-JCM) की स्टाफ साइड ने सरकार और वेतन आयोग के पैनल के सामने उम्र-आधारित पेंशन व्यवस्था (Age-Based Pension Structure) का एक नया फॉर्मूला पेश किया है। यदि इस क्रांतिकारी प्रस्ताव को सरकार हरी झंडी दे देती है, तो केंद्र सरकार के लाखों रिटायर्ड कर्मचारियों और फैमिली पेंशनभोगियों (Family Pensioners) को बुढ़ापे में बहुत बड़ी आर्थिक राहत मिल सकती है।

क्या कभी आखिरी सैलरी की बराबरी कर पाएगी पेंशन?

वर्तमान पेंशन व्यवस्था में सबसे बड़ी चुनौती यही है कि रिटायरमेंट के ठीक बाद मिलने वाली पेंशन कर्मचारी के अंतिम मूल वेतन (Last Pay Drawn – LPD) के अधिकतम 50% हिस्से पर ही आधारित होती है। इसका मतलब यह है कि सामान्य परिस्थितियों में पेंशन कभी भी कर्मचारी की एक्टिव वर्किंग सैलरी की बराबरी नहीं कर पाती।

इसी खाई को पाटने के लिए कर्मचारी संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले पैनल और संसदीय स्थायी समिति के सुझावों का हवाला देते हुए एक नया फॉर्मूला पेश किया है। इस नए प्रस्ताव के मुताबिक, जैसे-जैसे व्यक्ति की उम्र बढ़ेगी, वैसे-वैसे उसकी पेंशन का प्रतिशत भी बढ़ता जाएगा और 90 साल या उससे ऊपर की उम्र होने पर पेंशन निश्चित रूप से आखिरी सैलरी (100% LPD) की बराबरी कर लेगी।

आखिर क्यों की जा रही है उम्र से जुड़ी पेंशन (Age-Linked Pension) की मांग?

पेंशनभोगी संगठनों का तर्क बेहद व्यावहारिक है। बुढ़ापे में जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, वरिष्ठ नागरिकों के सामने दो बड़ी चुनौतियाँ आती हैं:

  1. लगातार बढ़ती महंगाई (Inflation): समय के साथ दैनिक जीवन-यापन का खर्च बढ़ता जाता है।

  2. महंगा मेडिकल ट्रीटमेंट (Medical Expenses): 70 से 80 वर्ष की उम्र पार करने के बाद गंभीर बीमारियों और स्वास्थ्य संबंधी खर्चों में बेतहाशा बढ़ोतरी होती है।

ऐसी स्थिति में यदि पेंशन शुरुआती स्तर (यानी 50%) पर ही रुकी रहे, तो सुपर सीनियर सिटीजंस के लिए आर्थिक सुरक्षा बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। इसीलिए हर 5 साल में पेंशन के प्रतिशत को धीरे-धीरे बढ़ाने की मांग की जा रही है।

उम्र के साथ पेंशन बढ़ने का प्रस्तावित फॉर्मूला (Slab-Wise Breakdown)

पेंशनर्स संगठनों द्वारा सौंपे गए प्रस्ताव के अनुसार, उम्र के विभिन्न पड़ावों पर मिलने वाली अतिरिक्त पेंशन का गणित कुछ इस प्रकार होगा:

पेंशनर की उम्र (वर्ष) अंतिम मूल वेतन (LPD) का मिलने वाला प्रतिशत
65 साल की उम्र होने पर अंतिम मूल वेतन (LPD) का 70%
70 साल की उम्र होने पर अंतिम मूल वेतन (LPD) का 75%
75 साल की उम्र होने पर अंतिम मूल वेतन (LPD) का 80%
80 साल की उम्र होने पर अंतिम मूल वेतन (LPD) का 85%
85 साल की उम्र होने पर अंतिम मूल वेतन (LPD) का 90%
90 साल या उससे अधिक होने पर अंतिम मूल वेतन (LPD) का 100% (पूरी सैलरी के बराबर)

नए अपडेट्स

8वें वेतन आयोग के वर्तमान घटनाक्रमों और जून 2026 की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझना जरूरी है:

  • वेतन आयोग की बैठकें: जून 2026 से आयोग विभिन्न राज्यों में कर्मचारी यूनियनों, संगठनों और स्टेकहोल्डर्स के साथ औपचारिक बैठकें शुरू करने जा रही है ताकि उनके ज्ञापनों (Memorandums) पर विचार किया जा सके।

  • वित्तीय व्यवहार्यता (Financial Feasibility): हालांकि संगठन 65 वर्ष की उम्र से ही बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार के वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि इसे पूरी तरह हूबहू लागू करने से सरकारी खजाने पर पेंशन बिल का अत्यधिक बोझ पड़ेगा। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार 80 वर्ष से ऊपर वालों के लिए पहले से मौजूद अतिरिक्त पेंशन (Additional Pension) के नियमों में सुधार करके इसे अधिक लचीला बनाने पर विचार कर सकती है, लेकिन 65 वर्ष से ही 70% देने के प्रस्ताव पर कड़ा मंथन होना बाकी है।

  • न्यूनतम पेंशन और फिटमेंट फैक्टर: उम्र-आधारित फॉर्मूले के अलावा न्यूनतम पेंशन को भी मौजूदा ₹9,000 से बढ़ाकर ₹20,000 से ₹25,000 के बीच तय करने और फिटमेंट फैक्टर को 1.83 से बढ़ाकर 2.46 से अधिक करने की समानांतर मांगें भी चल रही हैं।

निष्कर्ष

8वें वेतन आयोग के तहत उम्र-आधारित पेंशन का यह प्रस्ताव निश्चित रूप से देश के बुजुर्गों को एक सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन देने की दिशा में बड़ा कदम है। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो यह भारतीय पेंशन इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव होगा। अब देखना यह है कि जून 2026 की बैठकों के बाद वेतन आयोग सरकार को क्या अंतिम सिफारिशें सौंपता है।

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

कानपुर मंडी भाव: अनाज, दलहन और तिलहन की आवक सामान्य, जानें गेहूं से लेकर अरहर दाल के ताजा रेट

कानपुर । बुधवार, 17 जून 2026 उत्तर प्रदेश के प्रमुख व्यापारिक और औद्योगिक केंद्र कानपुर …