गुरुवार, अगस्त 13 2026 | 08:05:32 AM
Breaking News
Home / राज्य / दक्षिण-भारत / सुप्रीम कोर्ट का बड़ा रुख: यूएपीए मामलों में देरी पर कर्नाटक सरकार को फटकार, नई विशेष अदालतों का आदेश

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा रुख: यूएपीए मामलों में देरी पर कर्नाटक सरकार को फटकार, नई विशेष अदालतों का आदेश

Follow us on:

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया भवन परिसर, नई दिल्ली
बेंगलुरु | गुरुवार, 13 अगस्त 2026
सुप्रीम कोर्ट ने आतंकवाद विरोधी कड़े कानून ‘गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम’ (UAPA) के तहत दर्ज मामलों की धीमी सुनवाई को लेकर बेहद कड़ा और सख्त रुख अपनाया है। कर्नाटक सरकार द्वारा यूएपीए मुकदमों के निपटारे के लिए पेश की गई लंबी समय-सीमा (टाइमलाइन) पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्या कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट कहा कि “राज्य सरकार के पास मुकदमों को सालों-साल तक खींचने का लग्जरी विकल्प नहीं है।”
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार की ट्रायल योजना को अत्यधिक अवास्तविक करार दिया, जिसमें 700 से अधिक गवाहों की जांच कराने की बात कही गई थी। शीर्ष अदालत ने जोर देकर कहा कि आरोप भले ही कितने भी गंभीर क्यों न हों, आरोपी के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत ‘त्वरित सुनवाई’ (Right to Speedy Trial) के मौलिक अधिकार का हनन नहीं किया जा सकता।

मामला क्या है? (पृष्ठभूमि)

यह मामला Popular Front of India (PFI) से जुड़े एक आरोपी शाहिद खान की जमानत याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता के वकीलों ने अदालत को बताया कि आरोपी पिछले लगभग 4 वर्षों से जेल में बंद है, जबकि अभियोजन पक्ष ने 707 गवाहों की सूची सौंपी है। आरोप तय होने के महीनों बाद भी केवल एक गवाह की जांच पूरी हो पाई है।
शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि 700 से ज्यादा गवाहों की गवाही इस तरह की धीमी रफ्तार से कराने में दशकों बीत जाएंगे। जज साहिबान ने स्पष्ट कहा कि किसी विचाराधीन कैदी की जिंदगी 300 साल नहीं होती, इसलिए न्याय प्रणाली को व्यावहारिक बनाना होगा।

सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश और सख्त टिप्पणियां

  1. अतिरिक्त विशेष अदालतों का गठन: सर्वोच्च अदालत ने कर्नाटक सरकार को निर्देश दिया है कि वह यूएपीए मुकदमों के लिए तुरंत अतिरिक्त विशेष अदालतों (Special Courts) का ढांचा, जजों के पद और जरूरी सपोर्ट स्टाफ स्वीकृत करे।
  2. डे-टू-डे (रोजाना) सुनवाई: हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया गया है कि वे समर्पित न्यायिक अधिकारी तैनात करें, जो यूएपीए मुकदमों की रोजाना (Day-to-day basis) सुनवाई करें।
  3. गवाहों की प्राथमिक सूची: अदालत ने निर्देश दिया कि 700 गवाहों की अंतहीन फेहरिस्त में से केवल महत्वपूर्ण और मुख्य गवाहों (विशेषकर सुरक्षित/संरक्षित गवाहों) की सुनवाई अगले 3 महीनों के भीतर प्राथमिकता पर पूरी की जाए।
  4. जजों के काम का बोझ कम करना: अदालत ने संज्ञान लिया कि वर्तमान में एक-एक विशेष अदालत के पास 90 से अधिक यूएपीए मामले लंबित हैं। शीर्ष अदालत के अनुसार, न्याय की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए एक विशेष अदालत के पास 12 से 15 से ज्यादा केस नहीं होने चाहिए।
अदालत की मुख्य टिप्पणी:
“यदि मुकदमों को निरंतर और दैनिक आधार पर नहीं चलाया गया, तो इन्हें तार्किक समय-सीमा में पूरा करना व्यावहारिक रूप से असंभव होगा। न्याय प्रक्रिया का उद्देश्य मामले को लटकाना नहीं, बल्कि समयबद्ध तरीके से सच सामने लाना है।”

 

सामान्य प्रश्नोत्तरी (FAQ)

Q1: यूएपीए (UAPA) क्या है?
उत्तर: UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) यानी ‘गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम’ भारत का एक सख्त आतंकवाद-रोधी कानून है, जिसका उपयोग देश की संप्रभुता, अखंडता और सुरक्षा को खतरे में डालने वाली गतिविधियों से निपटने के लिए किया जाता है।
Q2: सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को क्या आदेश दिया है?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को यूएपीए मामलों की रोजाना सुनवाई के लिए नई विशेष अदालतें बनाने, आवश्यक बुनियादी ढांचा, न्यायिक अधिकारी और कर्मचारी तुरंत मुहैया कराने का आदेश दिया है।
Q3: क्या यूएपीए के तहत आरोपियों को त्वरित सुनवाई का अधिकार है?
उत्तर: हाँ, सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया है कि UAPA जैसे कड़े कानून के तहत भी आरोपी का ‘त्वरित सुनवाई’ (Speedy Trial) का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है।
Q4: कर्नाटक में यूएपीए सुनवाई में देरी क्यों हो रही थी?
उत्तर: अदालतों पर अत्यधिक मुकदमों का बोझ (एक ही अदालत में 90+ केस) और अभियोजन पक्ष द्वारा सैकड़ों गवाहों (जैसे 700 से अधिक गवाह) की लंबी सूची पेश करने के कारण मुकदमों में अत्यधिक देरी हो रही थी।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख उपलब्ध अदालती कार्यवाहियों, जनहित में प्रकाशित न्यायिक जानकारियों और सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेशों पर आधारित एक सूचनात्मक समाचार रिपोर्ट है। इसका उद्देश्य किसी भी विचाराधीन मामले पर कानूनी सलाह देना नहीं है। कानूनी मामलों के सटीक विवरण के लिए आधिकारिक अदालती आदेशों और दस्तावेजों का संदर्भ लें।
मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

आंध्र प्रदेश में विकास परियोजनाओं के शुभारंभ के अवसर पर प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ

भारत माता की जय।   भारत माता की जय।   भारत माता की जय।   …