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श्रीनगर में CIK की बड़ी कार्रवाई: टेरर फंडिंग के साइबर नेक्सस का पर्दाफाश

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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जम्मू. जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ जारी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत, काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (CIK) ने हाल ही में श्रीनगर सहित घाटी के कई जिलों में एक बड़ा ऑपरेशन चलाकर टेरर फंडिंग के नए और खतरनाक ‘साइबर नेक्सस’ का भंडाफोड़ किया है।

ऑपरेशन की मुख्य बातें (जनवरी 2026)

7 जनवरी 2026 को CIK ने कश्मीर घाटी में एक साथ 22 ठिकानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई का मुख्य केंद्र श्रीनगर रहा, जहां सुरक्षा एजेंसियों ने टेरर फंडिंग के हाई-टेक नेटवर्क पर प्रहार किया।

विवरणआंकड़े/जानकारी
कुल छापेमारी22 स्थान (17 श्रीनगर में, 3 बडगाम में, 1 शोपियां और 1 कुलगाम में)
हिरासत में लिए गए लोग22 संदिग्ध
मुख्य आरोपसाइबर धोखाधड़ी, ‘म्यूल’ बैंक खातों का उपयोग और टेरर फंडिंग
जब्त सामग्रीमोबाइल फोन, लैपटॉप, फर्जी दस्तावेज और संदिग्ध बैंकिंग रिकॉर्ड

टेरर फंडिंग का नया मोडस ऑपरेंडी: ‘म्यूल अकाउंट्स’

CIK की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि अब आतंकी संगठन पुराने तरीकों के बजाय साइबर अपराध का सहारा ले रहे हैं।

  • धोखाधड़ी से फंडिंग: ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी (Betting) और निवेश के नाम पर लोगों से ठगी की जाती है। इस अवैध पैसे का एक बड़ा हिस्सा आतंकवाद की ओर मोड़ा जाता है।

  • म्यूल अकाउंट्स (Mule Accounts): आतंकी नेटवर्क गरीब और भोले-भले लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते हैं। इन खातों में अवैध पैसा मंगाया जाता है ताकि असली मास्टरमाइंड की पहचान छुपी रहे।

  • डिजिटल पहचान की चोरी: कई मामलों में लोगों को पता भी नहीं होता कि उनके नाम पर बैंक खाते चल रहे हैं या उनमें करोड़ों का लेन-देन हो रहा है।

सुरक्षा एजेंसियों का कड़ा रुख

CIK के अधिकारियों के अनुसार, यह छापेमारी विशेष NIA कोर्ट, श्रीनगर से सर्च वारंट प्राप्त करने के बाद की गई। यह कार्रवाई केवल गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे के ‘पारिस्थितिकी तंत्र’ (Ecosystem) को ध्वस्त करना है।

“हमारा लक्ष्य संगठित साइबर अपराध सिंडिकेट्स को खत्म करना और उनके वित्तीय पाइपलाइनों को बंद करना है जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं।” — CIK प्रवक्ता

कानूनी कार्रवाई

इन संदिग्धों के खिलाफ BNS (भारतीय न्याय संहिता), आईटी एक्ट और UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

आगे की राह

CIK का मानना है कि इस छापेमारी के बाद पूछताछ में कई और बड़े नामों का खुलासा हो सकता है। यह नेटवर्क न केवल जम्मू-कश्मीर बल्कि देश के अन्य हिस्सों से भी जुड़ा होने की आशंका है। सुरक्षा एजेंसियां अब इन खातों के ‘एंड-यूजर’ की तलाश कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह पैसा किन आतंकी गतिविधियों (हथियार खरीदने या ओजीडब्ल्यू को भुगतान करने) में इस्तेमाल होना था।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।