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ममता बनर्जी बनाम ED: कलकत्ता हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कानूनी जंग – अब तक की बड़ी खबरें

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कोलकाता. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बनाम प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कानूनी लड़ाई इस समय अपने सबसे संवेदनशील मोड़ पर है। यह विवाद जनवरी 2026 की शुरुआत में I-PAC (प्रशांत किशोर द्वारा स्थापित राजनीतिक सलाहकार फर्म) के दफ्तरों पर हुई छापेमारी के बाद चरम पर पहुँचा है।

1. विवाद की जड़: I-PAC पर छापेमारी (8 जनवरी 2026)

  • ED का आरोप: ED ने कोयला तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में I-PAC के कोलकाता स्थित मुख्यालय और उसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की।

  • ममता बनर्जी का हस्तक्षेप: ED का आरोप है कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद मौके पर पहुँचकर जाँच में बाधा डाली और अधिकारियों से ‘अहम डिजिटल सबूत और दस्तावेज’ छीन लिए।

  • TMC का पक्ष: ममता बनर्जी का कहना है कि ED आगामी चुनावों से पहले उनकी पार्टी की चुनावी रणनीति चुराने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है।

2. कलकत्ता हाई कोर्ट में सुनवाई (14 जनवरी 2026)

कलकत्ता हाई कोर्ट में इस मामले को लेकर आज एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है:

  • लाइव स्ट्रीमिंग: पिछले शुक्रवार (9 जनवरी) को कोर्टरूम में भारी हंगामे और शोर-शराबे के कारण जस्टिस सुभ्रा घोष को सुनवाई स्थगित करनी पड़ी थी। इसके बाद कोर्ट ने आदेश दिया कि आज (14 जनवरी) की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग की जाएगी।

  • सीमित प्रवेश: कोर्टरूम में केवल संबंधित वकीलों को ही रहने की अनुमति दी गई है ताकि दोबारा हंगामा न हो।

  • ED की मांग: ED ने कोर्ट से मांग की है कि मुख्यमंत्री और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ CBI जांच के आदेश दिए जाएं, क्योंकि उन पर जाँच में बाधा डालने और सबूत मिटाने का आरोप है।

3. सुप्रीम कोर्ट में स्थिति

ED ने कलकत्ता हाई कोर्ट की कार्यवाही में हो रही देरी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया है:

  • रिट याचिका: ED ने सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर कर ममता बनर्जी, राज्य के DGP और कोलकाता पुलिस कमिश्नर के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है।

  • बंगाल सरकार का ‘कैविएट’: ममता सरकार ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट में ‘कैविएट’ दाखिल कर दिया था। इसका मतलब है कि अदालत बिना राज्य सरकार का पक्ष सुने ED की याचिका पर कोई एकतरफा (ex-parte) आदेश पारित नहीं कर सकती।

  • मामले का स्थानांतरण: ED संभवतः इस मामले को पश्चिम बंगाल से बाहर (जैसे दिल्ली हाई कोर्ट) ट्रांसफर करने की मांग भी कर सकती है, यह तर्क देते हुए कि राज्य में निष्पक्ष जाँच का माहौल नहीं है।

4. मुख्य कानूनी बिंदु और आरोप

पक्ष मुख्य तर्क / आरोप
ED (प्रवर्तन निदेशालय) मुख्यमंत्री ने छापेमारी वाली जगह में जबरन घुसकर सबूत नष्ट किए और अधिकारियों को डराया।
ममता बनर्जी / TMC ED ने बिना किसी ठोस आधार के ‘पार्टी डेटा’ और ‘वोटर रणनीति’ को जब्त करने की कोशिश की।
पुलिस कार्रवाई कोलकाता पुलिस ने ED अधिकारियों के खिलाफ ‘जबरन घुसपैठ’ और ‘चोरी’ की FIR दर्ज की है।

वर्तमान स्थिति: आज (14 जनवरी) कलकत्ता हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई बेहद अहम है, क्योंकि यहीं से तय होगा कि क्या इस मामले की जाँच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाएगी या नहीं।

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