अमेरिका-भारत व्यापार पर 75% टैरिफ का खतरा: एक विस्तृत विश्लेषण
नई दिल्ली. डोनल्ड ट्रंप के ‘टैरिफ बम’ ने वैश्विक व्यापार जगत में हलचल मचा दी है। जनवरी 2026 में ट्रंप ने घोषणा की है कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार करेगा, उसे अमेरिका के साथ अपने व्यापार पर 25% अतिरिक्त टैरिफ (Tariff) चुकाना होगा।
भारत के लिए यह स्थिति काफी जटिल है, क्योंकि अमेरिका हमारा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है और ईरान के साथ हमारे पुराने रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंध हैं। यहाँ इस पूरे घटनाक्रम का एक विस्तृत विश्लेषण दिया गया है:
1. ‘टैरिफ बम’ का गणित और भारत पर असर
भारत पहले से ही ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ (जिसमें रूसी तेल खरीद के कारण लगा दंड शुल्क भी शामिल है) का सामना कर रहा है। अब ईरान के साथ व्यापार करने के कारण यदि 25% का नया टैरिफ जुड़ता है, तो भारत से अमेरिका जाने वाले सामानों पर कुल टैरिफ 75% तक पहुँच सकता है।
| व्यापारिक स्थिति | विवरण |
| वर्तमान स्थिति | भारत पर पहले से 50% टैरिफ लागू है। |
| नया खतरा | ईरान के साथ व्यापार जारी रखने पर +25% अतिरिक्त शुल्क। |
| कुल संभावित बोझ | कुछ क्षेत्रों में अमेरिकी आयात पर 75% तक टैक्स। |
| भारत-ईरान व्यापार | 2024-25 में करीब $1.68 बिलियन (कुल व्यापार का मात्र 0.15%)। |
2. क्या ईरान से दोस्ती व्यापारिक रिश्तों पर भारी पड़ेगी?
विशेषज्ञों और सरकारी सूत्रों के अनुसार, इसके दो पहलू हैं:
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आर्थिक पक्ष (सीमित असर): भारत का ईरान के साथ व्यापार अब काफी कम हो गया है। 2019 के बाद से भारत ने ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया था। वर्तमान में भारत ईरान को मुख्य रूप से चावल (Basmati Rice), चाय, दवाइयां और चीनी निर्यात करता है। निर्यातकों के संगठन FIEO का मानना है कि चूंकि यह व्यापार ‘मानवीय आधार’ (Humanitarian ground) पर है, इसलिए यह अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे से बाहर रहना चाहिए।
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रणनीतिक पक्ष (चाबहार बंदरगाह): भारत के लिए ईरान व्यापार से ज्यादा रणनीतिक महत्व रखता है। चाबहार पोर्ट के जरिए भारत मध्य एशिया तक पहुंच बनाता है। यदि अमेरिका इस प्रोजेक्ट पर भी सख्ती दिखाता है, तो भारत के ‘कनेक्टिविटी’ प्रोजेक्ट्स को झटका लग सकता है।
3. प्रभावित होने वाले प्रमुख क्षेत्र
अमेरिकी टैरिफ का सबसे ज्यादा असर उन सेक्टरों पर पड़ेगा जो अमेरिका को बड़े पैमाने पर निर्यात करते हैं:
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टेक्सटाइल और कपड़े: अमेरिका भारतीय कपड़ों का बड़ा बाजार है।
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रत्न और आभूषण: टैरिफ बढ़ने से भारतीय ज्वेलरी महंगी हो जाएगी।
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आईटी और सेवाएं: हालांकि टैरिफ मुख्य रूप से वस्तुओं पर हैं, लेकिन व्यापारिक तनाव सेवाओं को भी प्रभावित कर सकता है।
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कृषि: ईरान को होने वाला बासमती चावल का निर्यात ($12,000 करोड़ का कारोबार) फिलहाल अधर में लटक गया है क्योंकि निर्यातक नए कॉन्ट्रैक्ट करने से डर रहे हैं।
4. भारत की रणनीति: आगे क्या?
भारत सरकार और कूटनीतिज्ञों के सामने अब दो मुख्य चुनौतियां हैं:
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सौदा या बातचीत (Trade Deal): भारत अमेरिका के साथ एक व्यापक व्यापार समझौते की कोशिश कर रहा है ताकि इन दंडात्मक टैरिफ से राहत मिल सके।
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विकल्पों की तलाश: भारत धीरे-धीरे अपनी निर्भरता कम करने के लिए अन्य बाजारों (जैसे अफ्रीका और दक्षिण-पूर्वी एशिया) की ओर देख रहा है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा दे रहा है।
निष्कर्ष: ट्रंप का यह कदम भारत को ‘ईरान या अमेरिका’ में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर करने की कोशिश है। हालांकि ईरान के साथ व्यापार का आकार छोटा है, लेकिन अमेरिकी बाजार (जहां भारत $80 बिलियन से अधिक का सामान बेचता है) को दांव पर लगाना भारत के लिए जोखिम भरा होगा।
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