नई दिल्ली. साल 2026 की शुरुआत के साथ ही वैश्विक स्तर पर यात्रा की सुगमता को लेकर नई रैंकिंग जारी कर दी गई है। ‘हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026’ (Henley Passport Index 2026) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारतीय पासपोर्ट की ताकत में मामूली सुधार देखा गया है। अब भारतीय नागरिक दुनिया के 55 देशों में बिना किसी पूर्व वीजा (Visa-Free) या ‘वीजा-ऑन-अराइवल’ के यात्रा कर सकते हैं। यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक धमक और ‘पीपल-टू-पीपल’ कनेक्टिविटी को दर्शाती है।
भारत की नई रैंकिंग और पहुंच
इस साल की रैंकिंग में भारत 82वें स्थान पर काबिज है। हालांकि रैंकिंग में बड़ा उछाल नहीं आया है, लेकिन गंतव्य देशों की सूची में कई नए नाम जुड़े हैं।
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वीजा-मुक्त पहुंच: भारतीय पासपोर्ट धारक अब 55 देशों में सीधे प्रवेश पा सकते हैं। इनमें भूटान, नेपाल, मॉरीशस, फिजी, और थाईलैंड जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल शामिल हैं।
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हालिया बदलाव: हाल के महीनों में कई दक्षिण-पूर्वी एशियाई और अफ्रीकी देशों ने भारतीय पर्यटकों के लिए अपनी वीजा नीतियों में ढील दी है ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिल सके।
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पाकिस्तान और बांग्लादेश का हाल: पड़ोसी पीछे छूटे
दक्षिण एशिया में भारत अपने पड़ोसियों के मुकाबले काफी मजबूत स्थिति में है। रैंकिंग में पाकिस्तान और बांग्लादेश की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है:
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पाकिस्तान: पाकिस्तानी पासपोर्ट दुनिया के सबसे खराब पासपोर्ट्स की सूची में बना हुआ है। वह 102वें स्थान पर है, जहाँ केवल 32-34 देशों में ही वीजा-मुक्त प्रवेश की अनुमति है।
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बांग्लादेश: बांग्लादेश की रैंकिंग 95वीं है। राजनीतिक अस्थिरता और कड़े इमिग्रेशन नियमों के कारण बांग्लादेशी नागरिकों को वैश्विक स्तर पर अधिक वीजा बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
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श्रीलंका: श्रीलंका भारत से काफी नीचे 91वें स्थान पर है।
दुनिया के सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट (Top Rankers)
2026 की सूची में एक बार फिर एशियाई और यूरोपीय देशों का दबदबा है:
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सिंगापुर और जापान: ये देश संयुक्त रूप से पहले स्थान पर हैं। इनके नागरिकों को 194 देशों में वीजा-मुक्त प्रवेश मिलता है।
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फ्रांस, जर्मनी, इटली और स्पेन: यूरोपीय देश दूसरे स्थान पर मजबूती से डटे हुए हैं।
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अमेरिका: अमेरिकी पासपोर्ट की रैंकिंग में पिछले कुछ वर्षों में गिरावट आई है, लेकिन यह अभी भी शीर्ष 10 में बना हुआ है।
क्या होता है ‘हेनले पासपोर्ट इंडेक्स’?
यह इंडेक्स इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के विशेष आंकड़ों पर आधारित होता है। यह रैंकिंग इस बात पर निर्भर करती है कि किसी देश का पासपोर्ट धारक बिना पूर्व वीजा के कितने गंतव्य देशों में जा सकता है। जिस देश की रैंकिंग जितनी अधिक होती है, वहां के नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय यात्रा में उतनी ही कम कानूनी औपचारिकताओं का सामना करना पड़ता है।
भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग में स्थिरता यह बताती है कि भारत की विदेश नीति ‘मोबिलिटी’ (गतिशीलता) पर केंद्रित है। ई-वीजा और वीजा मुक्त यात्रा के समझौतों के चलते आने वाले वर्षों में भारतीय नागरिकों के लिए यूरोपीय देशों की यात्रा भी आसान होने की उम्मीद है।
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