नई दिल्ली. मध्य पूर्व (Middle East) में युद्ध के बादल गहराने के बीच भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने बुधवार, 14 जनवरी 2026 को ईरान में रह रहे सभी भारतीय नागरिकों के लिए एक “अर्जेंट ट्रैवल एडवायजरी” जारी की है। इस एडवायजरी में भारतीयों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे उपलब्ध वाणिज्यिक साधनों (Commercial Flights) का उपयोग कर तुरंत ईरान छोड़ दें।
## ⚠️ एडवायजरी की मुख्य बातें: “सब कुछ छोड़ सुरक्षित लौटें”
विदेश मंत्रालय और तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने अपनी गाइडलाइंस में निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:
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किसे लौटना है: ईरान में मौजूद सभी छात्र, तीर्थयात्री, व्यवसायी और पर्यटक जल्द से जल्द स्वदेश वापसी की योजना बनाएं।
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यात्रा से बचें: भारतीय नागरिकों को अगली सूचना तक ईरान की किसी भी यात्रा से पूरी तरह बचने (Strictly Avoid) की सलाह दी गई है।
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दस्तावेज तैयार रखें: जो लोग अभी ईरान में हैं, वे अपने पासपोर्ट, आईडी और इमिग्रेशन दस्तावेज हर समय साथ रखें।
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संपर्क सूत्र: किसी भी आपात स्थिति के लिए दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं: +989128109115 और +989128109109।
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💥 युद्ध की आहट: क्यों बिगड़े हालात?
ईरान में मौजूदा संकट केवल आंतरिक नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध की संभावनाओं से जुड़ा है:
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अमेरिका की सैन्य चेतावनी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में हो रहे प्रदर्शनों के दमन पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि यदि ईरान ने प्रदर्शनकारियों को फांसी देना जारी रखा, तो अमेरिका “कड़ी सैन्य कार्रवाई” कर सकता है।
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आंतरिक विद्रोह और हिंसा: ईरान में महंगाई और सब्सिडी खत्म होने के खिलाफ पिछले दो हफ्तों से भीषण प्रदर्शन जारी हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक हिंसा में 2,500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 18,000 से अधिक लोग हिरासत में हैं।
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ईरान की जवाबी धमकी: ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि यदि उन पर हमला हुआ, तो वे क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों (सऊदी अरब, कतर, यूएई) को ध्वस्त कर देंगे।
🇮🇳 भारत की चिंता: 10,000 भारतीयों की सुरक्षा
अनुमान के मुताबिक, वर्तमान में ईरान में करीब 10,000 भारतीय रह रहे हैं। इनमें एक बड़ी संख्या उन छात्रों की है जो वहां मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं, साथ ही बड़ी संख्या में तीर्थयात्री भी वहां मौजूद हैं। इंटरनेट शटडाउन और संचार ठप होने की वजह से कई परिवारों का संपर्क टूट गया है, जिससे भारत में भी चिंता का माहौल है।
भारत का यह कड़ा कदम संकेत देता है कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है। चाबहार पोर्ट जैसे सामरिक हितों के बावजूद, भारत सरकार की प्राथमिकता अपने नागरिकों की जान बचाना है।
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