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ईरान में फंसे 150 कश्मीरी छात्रों की वतन वापसी तेज; अराक में धमाके के बाद बढ़ी दहशत, दिल्ली-मुंबई में अलर्ट

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ईरान के विभिन्न विश्वविद्यालयों में फंसे छात्रों की निकासी का रूट मैप।

जम्मू. ईरान में बिगड़ते सुरक्षा हालातों के बीच वहां पढ़ रहे भारतीय मेडिकल छात्रों, विशेषकर कश्मीरी छात्रों की वतन वापसी की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर तेज कर दी गई है। ताजा अपडेट के मुताबिक, उर्मिया विश्वविद्यालय के छात्रों का पहला बड़ा जत्था सफलतापूर्वक ईरान-आर्मेनिया सीमा पार कर चुका है।

1. मिशन ‘घर वापसी’: उड़ानों का शेड्यूल

जानकारी के अनुसार, लगभग 150 कश्मीरी छात्र 15 मार्च को दिल्ली और मुंबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर पहुंच सकते हैं।

  • कन्फर्म टिकट: जिन छात्रों के पास 14 मार्च की पुष्ट टिकटें हैं, उन्हें आर्मेनिया के हवाई अड्डों से सीधे भारत भेजा जा रहा है।

  • रूट: सुरक्षा कारणों से छात्रों को सड़क मार्ग के जरिए पड़ोसी देश आर्मेनिया या अजरबैजान ले जाया जा रहा है, जहाँ से वे हवाई मार्ग से भारत आ रहे हैं।

2. अलग-अलग विश्वविद्यालयों की ताज़ा स्थिति

ईरान के विभिन्न शहरों में फंसे छात्रों की स्थिति इस प्रकार है:

विश्वविद्यालय वर्तमान स्थिति आगामी योजना
उर्मिया यूनिवर्सिटी आर्मेनिया में सुरक्षित 15 मार्च को भारत आगमन
शिराज यूनिवर्सिटी क़ोम (Qom) शहर पहुंचे वीजा प्रक्रिया के बाद अजरबैजान रूट
अराक यूनिवर्सिटी सीमा के पास होटल में सुरक्षित 20 मार्च की उड़ानें निर्धारित
इस्फ़हान यूनिवर्सिटी कैंपस में फंसे तत्काल स्थानांतरण की मांग

3. युद्ध के साये में दहशत: अराक और इस्फ़हान की स्थिति

निकासी की खबरों के बीच जमीनी हकीकत डराने वाली भी है। ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIIMSA) के डॉ. मोहम्मद मोमिन खान ने बताया कि 12 मार्च की शाम अराक यूनिवर्सिटी के हॉस्टल के पास एक धमाका/हमला हुआ, जिससे छात्र भारी मानसिक दबाव में हैं। इस्फ़हान यूनिवर्सिटी के छात्रों ने भी भारतीय दूतावास से गुहार लगाई है कि उन्हें जल्द से जल्द वहां से निकाला जाए क्योंकि स्थानीय सुरक्षा स्थिति तेजी से बिगड़ रही है।

“हम ईरान में भारतीय दूतावास के साथ पल-पल के संपर्क में हैं। प्राथमिकता उन छात्रों को निकालने की है जो संघर्ष क्षेत्रों के सबसे करीब हैं।” > — डॉ. मोहम्मद मोमिन खान, AIIMSA

4. परिजनों की बढ़ी धड़कनें, सरकार से बड़ी उम्मीद

श्रीनगर और घाटी के अन्य हिस्सों में रह रहे माता-पिता के लिए यह समय बेहद तनावपूर्ण है। हालांकि, छात्रों के आर्मेनिया पहुंचने की खबर ने थोड़ी राहत दी है, लेकिन अभिभावकों की मांग है कि जब तक आखिरी छात्र भारत नहीं लौट आता, सरकार को यह रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रखना चाहिए।

आगे क्या होगा?

दिल्ली और मुंबई पहुंचने के बाद, राज्य सरकारों ने छात्रों को उनके गृह नगर (श्रीनगर और जम्मू) तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रबंध किए हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले एक हफ्ते में ईरान में फंसे अधिकांश भारतीय छात्र सुरक्षित अपने घर लौट आएंगे।

matribhumisamachar.com

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