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UNGA 2026: अमेरिका ने फिर रोका फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास का रास्ता, वीजा देने से किया इनकार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
6 Min Read
वॉशिंगटन । 
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) 2026 के 81वें सत्र के आयोजन से ठीक पहले एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विवाद सामने आया है। अमेरिका ने फिलिस्तीनी प्राधिकरण (PA) के अध्यक्ष महमूद अब्बास और फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) के वरिष्ठ अधिकारियों को न्यूयॉर्क जाने के लिए वीजा देने से इनकार कर दिया है। यह लगातार दूसरा वर्ष है जब महमूद अब्बास को संयुक्त राष्ट्र के मंच पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से रोका गया है।
इस फैसले ने मध्य पूर्व की राजनीति, अमेरिका-फिलिस्तीन संबंधों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संयुक्त राष्ट्र के नियमों को लेकर एक नई बहस छिड़ दी है।

अमेरिका ने क्यों लगाया यह कूटनीतिक प्रतिबंध?

अमेरिकी विदेश विभाग ने इस फैसले के पीछे फिलिस्तीनी पक्ष द्वारा शांति वार्ताओं और पूर्व प्रतिबद्धताओं (commitments) के पालन में विफलता का तर्क दिया है। वाशिंगटन का मानना है कि फिलिस्तीनी नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का इस्तेमाल करके एकतरफा फैसले थोपने की कोशिश कर रहा है।
वीजा से इनकार करने के मुख्य अमेरिकी आधार:
  • अंतरराष्ट्रीय अदालतों में अपील: अमेरिका का आरोप है कि फिलिस्तीनी प्राधिकरण (PA) ने इजरायल-फिलिस्तीन विवाद को डायरेक्ट वार्ता के बजाय International Court of Justice (ICJ) और International Criminal Court (ICC) में ले जाकर पूर्व द्विपक्षीय समझौतों की अनदेखी की है।
  • एकतरफा राज्य की मान्यता: वाशिंगटन के अनुसार, फिलिस्तीनी पक्ष सीधी शांति वार्ता प्रक्रिया को दरकिनार कर संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न मंचों से एकतरफा स्वतंत्र राज्य की मान्यता हासिल करने के प्रयासों में जुटा है।
  • सुधार प्रक्रियाओं में सुस्ती: अमेरिकी कानून के तहत PA पर यह आरोप भी है कि उसने वाशिंगटन के साथ तय किए गए प्रशासनिक, सुरक्षा और वित्तीय सुधारों को लागू करने में पर्याप्त प्रगति नहीं दिखाई है।

UN Headquarters Agreement (1947) और विधिक सवाल

महमूद अब्बास का वीजा रोके जाने के बाद संयुक्त राष्ट्र और मेजबान देश अमेरिका के बीच 1947 में हुए UN Headquarters Agreement पर सवाल उठने लगे हैं।
  1. संधि का नियम: इस समझौते के अनुसार, मेजबान देश होने के नाते अमेरिका का यह दायित्व है कि वह संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित होने वाली बैठकों में भाग लेने आ रहे सदस्य और पर्यवेक्षक देशों के प्रतिनिधियों के आवागमन में बाधा न डाले।
  2. अमेरिका का पक्ष: वाशिंगटन अपनी सुरक्षा और विदेश नीति का हवाला देते हुए कहता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) और आतंकवाद-विरोधी कानूनों के आधार पर उसे किसी भी व्यक्ति का वीजा रोकने का संप्रभु अधिकार प्राप्त है।

क्या महमूद अब्बास UNGA को संबोधित कर पाएंगे?

वीजा खारिज होने के बाद महमूद अब्बास का व्यक्तिगत रूप से न्यूयॉर्क पहुंचकर मंच पर भाषण देना संभव नहीं है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र में उनका संबोधन पूरी तरह खारिज नहीं हुआ है:
  • वर्चुअल संबोधन (Video Link): वर्ष 2025 की तरह ही इस बार भी संयुक्त राष्ट्र महासभा की विशेष अनुमति और प्रक्रियागत वोटिंग के माध्यम से अब्बास को वीडियो संदेश रिकॉर्ड करके या लाइव वीडियो लिंक के जरिए UNGA को संबोधित करने की अनुमति दी जा सकती है।
  • प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी: संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीनी मिशन का आधिकारिक प्रतिनिधित्व जारी रहेगा और उनके प्रतिनिधि सत्र की कार्यवाही में भाग लेंगे।

फिलिस्तीनी पक्ष की तीखी प्रतिक्रिया

फिलिस्तीनी अधिकारियों ने अमेरिकी सरकार के इस कदम की कड़े शब्दों में निंदा की है। उनका कहना है कि इस तरह का एकतरफा प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है और यह मध्य पूर्व क्षेत्र में शांति प्रक्रिया स्थापित करने के प्रयासों को भारी नुकसान पहुंचाएगा।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1: अमेरिका ने महमूद अब्बास को UNGA 2026 का वीजा क्यों नहीं दिया?
Ans: अमेरिका का कहना है कि फिलिस्तीनी प्राधिकरण ने ICJ और ICC जैसे मंचों पर मामले ले जाकर और एकतरफा मान्यता की कोशिश करके द्विपक्षीय शांति प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन किया है।
Q2: क्या 1947 के UN Headquarters Agreement के तहत अमेरिका वीजा मना कर सकता है?
Ans: नियम के अनुसार अमेरिका को UN प्रतिनिधियों के आवागमन की सुविधा देनी होती है, लेकिन अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के अपवादों का हवाला देकर वीजा रोकने का अपना अधिकार बताता है।
Q3: क्या महमूद अब्बास UNGA 2026 में अपनी बात रख पाएंगे?
Ans: हाँ, यदि संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रक्रियात्मक समिति इसे मंजूरी देती है, तो अब्बास पिछले वर्ष की तरह वीडियो लिंक के माध्यम से अपना भाषण दे सकते हैं।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध कूटनीतिक बयानों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के विश्लेषण पर आधारित है। अंतरराष्ट्रीय वीजा नियम, कूटनीतिक फैसले और संयुक्त राष्ट्र की प्रक्रियात्मक व्यवस्थाएं समय-समय पर संबंधित सरकारों व निकायों के आधिकारिक निर्णयों के अधीन बदल सकती हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।