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MP में ‘मंदिर प्रबंधन’ पर छिड़ा सियासी संग्राम: डिग्री से मिलेगा रोजगार या है कोई ‘धार्मिक एजेंडा’? जानें पूरी सच्चाई

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

भोपाल | मंगलवार, 14 अप्रैल 2026

मध्य प्रदेश की उच्च शिक्षा में एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है, लेकिन इसके साथ ही प्रदेश की सियासत में ‘धर्म और डिग्री’ को लेकर घमासान तेज हो गया है। उज्जैन स्थित सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में “टेंपल मैनेजमेंट” (मंदिर प्रबंधन) कोर्स शुरू करने के सरकार के फैसले ने सत्तापक्ष और विपक्ष को आमने-सामने खड़ा कर दिया है।

? क्या है सरकार का ‘मास्टर प्लान’?

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने स्पष्ट किया है कि यह कोर्स पूरी तरह से स्किल-बेस्ड (कौशल आधारित) है। सरकार के तर्क निम्नलिखित हैं:

  • प्रोफेशनल मैनेजमेंट: बड़े मंदिरों में करोड़ों का चढ़ावा और लाखों की भीड़ आती है। इसे संभालने के लिए प्रशिक्षित प्रबंधन विशेषज्ञों की जरूरत है।

  • धार्मिक पर्यटन (Spiritual Tourism): मध्य प्रदेश में ‘महाकाल लोक’ और ‘एकात्म धाम’ जैसे प्रोजेक्ट्स के बाद धार्मिक पर्यटन में भारी उछाल आया है।

  • रोजगार के अवसर: इस कोर्स के बाद युवा मंदिरों में प्रशासक, इवेंट मैनेजर और वित्तीय सलाहकार के रूप में करियर बना सकेंगे।

? कोर्स का सिलेबस: क्या पढ़ेंगे छात्र?

यह सिर्फ धार्मिक शिक्षा नहीं, बल्कि एक आधुनिक मैनेजमेंट कोर्स होगा जिसमें ये विषय शामिल होंगे:

  1. Crowd Management: त्योहारों पर उमड़ने वाली लाखों की भीड़ को बिना किसी हादसे के नियंत्रित करना।

  2. Financial Audit: मंदिर की आय-व्यय और दान राशि का पारदर्शी हिसाब रखना।

  3. Disaster Management: आपातकालीन स्थितियों में सुरक्षा और बचाव कार्य।

  4. Hospitality & Tourism: श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं और सूचना तंत्र विकसित करना।

⚡ विपक्ष के तीखे सवाल: “एजेंडा या शिक्षा?”

विपक्षी दलों ने इस कदम को सरकार की प्राथमिकताओं से भटकाव बताया है। विपक्ष के मुख्य आरोप हैं:

  • शिक्षा का भगवाकरण: आरोप है कि सरकार शैक्षणिक संस्थानों का उपयोग अपने राजनीतिक एजेंडे के विस्तार के लिए कर रही है।

  • बेरोजगारी की अनदेखी: विपक्ष का कहना है कि प्रदेश में पटवारी, शिक्षक और अन्य सामान्य भर्तियों के संकट के बीच इस तरह के ‘प्रयोग’ केवल ध्यान भटकाने के लिए हैं।

  • धर्मनिरपेक्षता पर सवाल: सवाल उठाया गया है कि क्या इस तरह के कोर्स केवल एक धर्म तक सीमित रहेंगे या अन्य धार्मिक स्थलों के प्रबंधन के लिए भी ऐसी पहल होगी?

? निष्कर्ष और आगे की राह

मध्य प्रदेश सरकार ने 13 प्रमुख धार्मिक स्थलों पर ‘कॉरिडोर’ विकसित करने की योजना बनाई है। ऐसे में टेंपल मैनेजमेंट कोर्स जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी होगा, यह इसके प्लेसमेंट और छात्रों की रुचि पर निर्भर करेगा। फिलहाल, उज्जैन का यह विश्वविद्यालय देश का पहला ऐसा केंद्र बनने की ओर है जो पारंपरिक आस्था को आधुनिक मैनेजमेंट के चश्मे से देखेगा।

“मंदिर हमारी आस्था के केंद्र तो हैं ही, लेकिन वे अर्थव्यवस्था के बड़े स्रोत भी बन रहे हैं। प्रोफेशनल मैनेजमेंट से न केवल दर्शन सुलभ होंगे बल्कि स्थानीय युवाओं को सम्मानजनक रोजगार भी मिलेगा।”

इंदर सिंह परमार, उच्च शिक्षा मंत्री, MP

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।