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NALSAR विवाद में सुप्रीम कोर्ट की BCI को फटकार: “छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार, दंडात्मक कार्रवाई पर लगाई रोक”

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read
हैदराबाद । शुक्रवार, 14 अगस्त 2026
हैदराबाद स्थित प्रतिष्ठित NALSAR University of Law के 2026 बैच के स्नातकों (Graduates) का एक विवाद उस समय सुर्खियों में आया, जब छात्रों के एक वर्ग ने विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र लिखकर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को अपने आगामी दीक्षांत समारोह (Convocation) में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई।
छात्रों का तर्क था कि एक पूर्व मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस कार्रवाई पर मुख्य न्यायाधीश द्वारा की गई मौखिक टिप्पणियाँ उनके विचारों से मेल नहीं खाती थीं। इसके बाद छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध व्यक्त किया था।

Bar Council of India (BCI) का मनमाना आदेश और यू-टर्न

इस विरोध प्रदर्शन के सामने आने के बाद वकीलों की नियामक संस्था Bar Council of India (BCI) ने कड़ा रुख अपनाया और देश के सभी राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दे दिया कि NALSAR के वर्ष 2026 बैच के छात्रों का वकीलों (Advocate) के रूप में नामांकन रोक दिया जाए।
BCI ने यह तर्क दिया कि देश के सर्वोच्च न्यायिक पद का अनादर करने वाले छात्र कानूनी पेशे के योग्य नहीं माने जा सकते।
हालांकि, विधिक समुदाय, वरिष्ठ अधिवक्ताओं और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की ओर से इस फैसले को असंवैधानिक और मनमाना बताए जाने के बाद BCI को भारी चौतर्फा विरोध का सामना करना पड़ा। इसके बाद BCI ने अपना सामूहिक नामांकन प्रतिबंध (Blanket Ban) का आदेश वापस तो ले लिया, लेकिन छात्रों और संकाय (Faculty) के खिलाफ जांच जारी रखने की बात कही।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: CJI सूर्यकांत ने उठाए गंभीर सवाल

मामला सुप्रीम कोर्ट की पीठ के समक्ष पहुँचा, जिसकी अध्यक्षता खुद मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत कर रहे थे (साथ में जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे)। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने BCI के हस्तक्षेप पर कड़ा ऐतराज जताया और निम्नलिखित मुख्य बातें कहीं:
  1. संवाद का विषय: CJI ने कहा, “यह मेरे और छात्रों के बीच का सीधा संवाद है। इसमें BCI का दखल देने का कोई औचित्य या काम नहीं है।”
  2. विरोध का संवैधानिक अधिकार: अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से किसी बात से असहमत हैं और अपनी राय रख रहे हैं, तो यह उनका अधिकार है।
  3. दंडात्मक कार्रवाई पर पूर्ण रोक: शीर्ष अदालत ने निर्देश जारी करते हुए BCI को 2 सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का नोटिस दिया। साथ ही, आदेश दिया कि NALSAR के छात्रों या फैकल्टी के खिलाफ इस प्रकरण से संबंधित कोई भी coercive या punitive (दंडात्मक) कार्रवाई नहीं की जाएगी।

मामले से जुड़ी मुख्य जानकारियाँ (एक नज़र में)

पहलूविवरण
संस्थानNALSAR University of Law, हैदराबाद
संबंधित बैच2026 पासआउट लॉ स्टूडेंट्स
नियामक संस्थाBar Council of India (BCI)
सुप्रीम कोर्ट बेंचCJI सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची, जस्टिस वी. मोहना
कोर्ट का अंतरिम आदेशBCI को 2 सप्ताह का नोटिस; छात्रों/फैकल्टी पर दंडात्मक कार्रवाई पर रोक

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. NALSAR यूनिवर्सिटी विवाद का मुख्य कारण क्या था?

NALSAR के वर्ष 2026 बैच के छात्रों द्वारा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य न्यायाधीश (CJI) को मुख्य अतिथि बनाए जाने पर शांतिपूर्ण विरोध जताया गया था।

2. Bar Council of India (BCI) ने इस पर क्या कदम उठाया था?

BCI ने शुरुआत में एक सर्कुलर जारी कर 2026 बैच के सभी NALSAR स्नातकों के अधिवक्ता के रूप में राज्य बार काउंसिलों में नामांकन (Enrollment) पर रोक लगा दी थी, जिसे बाद में विरोध के चलते वापस ले लिया गया।

3. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में BCI को क्या निर्देश दिए हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने BCI को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है और अंतरिम राहत देते हुए छात्रों या फैकल्टी के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध अदालती कार्यवाहियों, विधिक समाचारों और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य किसी भी संस्था या व्यक्ति की मानहानि करना नहीं है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।