चेन्नई | शुक्रवार, 14 अगस्त 2026
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर केंद्र सरकार से मांग की है कि लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों की संख्या को स्थायी रूप से फ्रीज (Freeze) किया जाए।
मुख्यमंत्री विजय ने 12 अगस्त 2026 को तमिलनाडु विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव का हवाला देते हुए केंद्र से इस संबंध में आवश्यक संवैधानिक संशोधन करने का आग्रह किया है।
तमिलनाडु सरकार का मानना है कि राज्यों के बीच लोकसभा सीटों का मौजूदा अनुपात बिना किसी बदलाव के जारी रहना चाहिए।
दक्षिण भारत की मुख्य चिंता: जनसंख्या नियंत्रण का नुकसान न हो
विधानसभा में पारित प्रस्ताव के केंद्र में आगामी परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया को लेकर चिंताएं शामिल हैं।
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संसदीय प्रतिनिधित्व में असंतुलन का डर: तमिलनाडु सहित दक्षिण भारतीय राज्यों ने बीते दशकों में परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण नीतियों को सफलतापूर्वक लागू किया है।
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आशंका: यदि भविष्य में केवल जनसंख्या के आधार पर परिसीमन किया जाता है, तो अधिक आबादी वाले उत्तर भारतीय राज्यों की सीटें बढ़ जाएंगी, जबकि जनसंख्या नियंत्रण करने वाले दक्षिण भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व घट जाएगा।
मुख्य बिंदु: तमिलनाडु विधानसभा के प्रस्ताव में मांग की गई है कि 1971 की जनगणना के आधार पर तय की गई अंतर-राज्यीय सीट व्यवस्था को बरकरार रखा जाए ताकि संघवाद का संतुलन न बिगड़े।
33% महिला आरक्षण बिना सीट बढ़ाए लागू करने पर जोर
मुख्यमंत्री विजय ने यह स्पष्ट किया कि उनकी सरकार महिलाओं के राजनीतिक सशक्तीकरण और 33% महिला आरक्षण के पूरी तरह पक्ष में है।
विजय ने यह मांग रखी है कि महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को मौजूदा 543 सीटों के भीतर ही तत्काल लागू किया जाए, न कि इसे परिसीमन या सीटों की संख्या बढ़ाने से जोड़ा जाए।
तमिलनाडु की मुख्य मांगें एक नज़र में
| विषय | तमिलनाडु सरकार की प्रमुख मांग |
| लोकसभा कुल सीटें | 543 सीटों की संख्या को स्थायी रूप से फ्रीज किया जाए। |
| अंतर-राज्यीय अनुपात | राज्यों के बीच संसदीय सीटों का वर्तमान वितरण बना रहे। |
| महिला आरक्षण | 33% महिला कोटा वर्तमान 543 सीटों में ही लागू हो। |
| राज्यसभा अनुपात | लोकसभा और राज्यसभा का 2.2 : 1 का अनुपात कायम रहे। |
सामान्य प्रश्न उत्तर (FAQ)
1. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay ने प्रधानमंत्री को पत्र क्यों लिखा?
उन्होंने तमिलनाडु विधानसभा में 12 अगस्त 2026 को पारित प्रस्ताव के आधार पर लोकसभा सीटों को 543 पर बनाए रखने तथा परिसीमन से राज्यों के प्रतिनिधित्व पर बुरा असर न पड़ने देने के लिए संवैधानिक संशोधन की मांग की है।
2. परिसीमन (Delimitation) को लेकर दक्षिण भारतीय राज्यों को क्या चिंता है?
दक्षिण भारतीय राज्यों को चिंता है कि जनसंख्या नियंत्रण नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने के कारण केवल आबादी के आधार पर परिसीमन होने पर संसद में उनकी सीटों का प्रतिशत घट सकता है।
3. महिला आरक्षण को लेकर तमिलनाडु सरकार का क्या रुख है?
तमिलनाडु सरकार 33% महिला आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन उसका कहना है कि इसे लोकसभा सीटों की कुल संख्या बढ़ाए बिना मौजूदा 543 सीटों में ही तुरंत लागू किया जाना चाहिए।
अस्वीकरण (Disclaimer)
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