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78वां भारतीय सेना दिवस 2026: नेटवर्किंग और डेटा से लैस हुई देश की सरहदें; जानें इतिहास और महत्व

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नई दिल्ली. आज पूरा देश 78वां भारतीय सेना दिवस मना रहा है। यह दिन न केवल हमारे सैनिकों के अदम्य साहस को नमन करने का है, बल्कि भारतीय सेना के उस गौरवशाली इतिहास को याद करने का भी है जब सेना की कमान पहली बार एक भारतीय के हाथों में आई थी। इस वर्ष राजस्थान की राजधानी जयपुर में सेना दिवस की मुख्य परेड का आयोजन किया जा रहा है, जो सेना की क्षेत्रीय पहुँच और शौर्य का प्रतीक है।

1. 2026 की थीम: ‘Year of Networking and Data Centricity’

थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने वर्ष 2026 को ‘Year of Networking and Data Centricity’ (नेटवर्किंग और डेटा केंद्रितता का वर्ष) घोषित किया है। यह पहल भारतीय सेना के “Decade of Transformation” (परिवर्तन का दशक) का हिस्सा है।

  • उद्देश्य: भविष्य के युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि सूचनाओं और त्वरित फैसलों से जीते जाएंगे।

  • मुख्य बिंदु: इसमें डेटा को एक सामरिक संपत्ति (Operational Asset) के रूप में देखा जा रहा है। इसका लक्ष्य सुरक्षित कनेक्टिविटी, रियल-टाइम सूचना साझाकरण और डेटा-संचालित निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाना है।

  • आधुनिकीकरण: यह पहल 2025 की थीम ‘Year of Technology Absorption’ का अगला चरण है, जहाँ अब तकनीक को नेटवर्क के माध्यम से युद्धभूमि के हर सैनिक तक पहुँचाया जा रहा है।

2. फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा: ‘किप्पर’ का कालजयी योगदान

15 जनवरी का दिन भारतीय इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। इसी दिन 1949 में फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा ने अंतिम ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ जनरल सर रॉय बुचर से भारतीय सेना की कमान संभाली थी।

  • आजाद भारत के पहले सेना प्रमुख: करियप्पा भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ बने।

  • समानता और धर्मनिरपेक्षता: उन्होंने सेना को राजनीति से दूर रखा और जाति-धर्म से ऊपर उठकर ‘भारतीयता’ का मंत्र दिया। उन्होंने ही ‘ब्रिगेड ऑफ द गार्ड्स’ और ‘पैराशूट रेजिमेंट’ जैसी महत्वपूर्ण इकाइयों की नींव रखी।

  • अजेय नेतृत्व: 1947-48 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उन्होंने पश्चिमी मोर्चे पर सेना का कुशल नेतृत्व किया और कश्मीर के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को सुरक्षित किया।

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3. भविष्य की सेना: स्मार्ट और सुरक्षित

आज की भारतीय सेना 1949 की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली और डिजिटल रूप से सक्षम है। आधुनिकीकरण के प्रमुख स्तंभ:

  • स्वदेशी तकनीक (Indigenisation): ‘मेक इन इंडिया’ के तहत अर्जुन टैंक, आकाश मिसाइल और स्वदेशी ड्रोन्स का समावेश।

  • थिएटर कमांड: तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल के लिए इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड्स पर काम।

  • AI और साइबर सुरक्षा: युद्ध के मैदान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर दुश्मन की चालों का सटीक विश्लेषण।

“फील्ड मार्शल करियप्पा ने जिस अनुशासित और गौरवशाली सेना की नींव रखी थी, आज वह 2026 में डेटा और नेटवर्किंग के साथ एक ‘फ्यूचर रेडी फोर्स’ बन चुकी है। यह सेना दिवस हमारे वीरों के प्रति कृतज्ञता और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का दिन है।”

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