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ईरान में तनाव का भारत पर असर: बासमती चावल निर्यात में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का पूरा विश्लेषण

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मुंबई. ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों और गहराते राजनीतिक संकट ने भारतीय अर्थव्यवस्था के दो प्रमुख स्तंभों—कृषि (बासमती चावल) और ऊर्जा (कच्चा तेल) पर सीधा और गहरा असर डाला है। जनवरी 2026 की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है।

🌾 1. बासमती चावल के निर्यात पर संकट

ईरान भारतीय बासमती चावल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है, लेकिन वर्तमान अशांति ने इस व्यापार को “इमर्जेंसी” जैसी स्थिति में ला दिया है।

  • पेमेंट संकट (Stuck Payments): ईरान में मची अफरा-तफरी और बैंकिंग चैनलों में रुकावट के कारण भारतीय निर्यातकों का लगभग ₹2,000 करोड़ का भुगतान अटक गया है।

  • कीमतों में भारी गिरावट: ईरान से मांग अचानक घटने के कारण भारत की घरेलू मंडियों में बासमती चावल की कीमतें ₹5 से ₹10 प्रति किलो तक गिर गई हैं। 1121 किस्म के चावल जो ₹85/kg थे, वे अब ₹80/kg पर आ गए हैं।

  • IREF की चेतावनी: ‘इंडियन राइस एक्सपोर्टर फेडरेशन’ (IREF) ने निर्यातकों को एडवाइजरी जारी कर ईरान के साथ नए सौदे करने में अत्यधिक सावधानी बरतने को कहा है।

  • मुद्रा का गिरना: ईरान की करेंसी ‘रियाल’ के गिरने से वहां के खरीदार पुराने वादों को निभाने में असमर्थ हो रहे हैं, जिससे भारतीय चावल के शिपमेंट बंदरगाहों पर रुके हुए हैं।

🛢️ 2. कच्चे तेल की कीमतें और भारत की चिंता

कच्चे तेल को लेकर स्थिति वैश्विक और रणनीतिक दोनों स्तरों पर तनावपूर्ण है:

  • सप्लाई चेन और ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’: भारत का लगभग 50-60% कच्चा तेल और LNG ईरान के पास स्थित Strait of Hormuz से होकर गुजरता है। ईरान में तनाव बढ़ने से इस रास्ते के बंद होने का डर बना रहता है, जो वैश्विक तेल कीमतों को $90-$100 प्रति बैरल के पार धकेल सकता है।

  • ट्रंप का टैरिफ दबाव: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में घोषणा की है कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। हालाँकि भारत ने 2019 से ईरान से सीधे तेल खरीदना काफी कम कर दिया है, लेकिन रूस के साथ भारत के संबंधों और ईरान के साथ अन्य व्यापारिक कड़ियों के कारण भारत पर अप्रत्यक्ष आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।

  • रूस-ईरान-भारत त्रिकोण: भारत अब मुख्य रूप से रूस से तेल खरीद रहा है, लेकिन यदि ईरान संकट के कारण वैश्विक कीमतें बढ़ती हैं, तो रूस भी अपने तेल के दाम बढ़ा सकता है, जिससे भारत का ‘इंपोर्ट बिल’ बढ़ जाएगा।

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📊 सारांश: भारतीय निर्यातकों और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

क्षेत्र मुख्य प्रभाव स्थिति
बासमती चावल ₹2000 करोड़ का भुगतान अटका, घरेलू दाम गिरे 🔴 नकारात्मक
कच्चा तेल परिवहन लागत (Freight) और बीमा प्रीमियम में वृद्धि 🟡 चिंताजनक
चाबहार पोर्ट रणनीतिक निवेश और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स में देरी 🔴 मध्यम संकट
महंगाई फ्यूल की कीमतें बढ़ने से घरेलू लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ेगी 🟡 अनिश्चित

ईरान संकट भारतीय निर्यातकों (खासकर पंजाब और हरियाणा के चावल मिल मालिकों) के लिए एक बड़ा झटका है। सरकार अब नए बाजार जैसे सऊदी अरब और मिस्र की ओर रुख करने की कोशिश कर रही है ताकि ईरान पर निर्भरता कम की जा सके।

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