जम्मू. पैरालंपिक पदक विजेता और दुनिया के नंबर-1 पैरा-तीरंदाज राकेश कुमार ने जम्मू-कश्मीर सरकार की हालिया 222 खिलाड़ियों की भर्ती सूची (SO-12) में अपना नाम न होने पर गहरी निराशा और हैरानी व्यक्त की है। कटड़ा के नताली गांव के निवासी और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित राकेश कुमार ने इस संबंध में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को एक प्रतिनिधित्व सौंपकर चयन प्रक्रिया की पारदर्शी समीक्षा की मांग की है।
उपलब्धियों का अंबार, फिर भी सूची से बाहर
राकेश कुमार का खेल करियर उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने न केवल पैरालंपिक में कांस्य पदक जीतकर देश का सिर ऊंचा किया, बल्कि एशियन गेम्स और विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की धाक जमाई। उनके नाम अब तक कुल 33 अंतरराष्ट्रीय पदक हैं। खेल क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत सरकार उन्हें अर्जुन अवार्ड से भी नवाज चुकी है।
चयन प्रक्रिया पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री को सौंपे गए पत्र में राकेश कुमार ने चयन के मानदंडों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा:
“विश्व स्तर पर लगातार प्रदर्शन करने और देश को पदक दिलाने के बावजूद, यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाओं को सरकारी नियुक्तियों में नजरअंदाज किया जाएगा, तो यह प्रदेश के आगामी खिलाड़ियों के मनोबल को तोड़ने वाला होगा।”
राकेश कुमार की प्रमुख मांगें:
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पारदर्शी समीक्षा: 222 पदों के लिए जारी भर्ती सूची की दोबारा और निष्पक्ष जांच हो।
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सार्वजनिक मानदंड: चयन के लिए अपनाए गए मूल्यांकन के मानकों को सार्वजनिक किया जाए।
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मेरिट को प्राथमिकता: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अर्जित अंकों और मेरिट के आधार पर उनके मामले पर पुनर्विचार किया जाए।
सिद्धांतों की लड़ाई
राकेश कुमार ने स्पष्ट किया कि यह केवल उनके व्यक्तिगत रोजगार का मामला नहीं है, बल्कि यह खेल भावना और ‘मेरिट’ के सम्मान का प्रश्न है। उन्होंने विश्वास जताया है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के हस्तक्षेप से इस मामले में न्याय होगा और वास्तविक खेल प्रतिभाओं को उनका हक मिलेगा।
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