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CSA यूनिवर्सिटी कानपुर में छात्रों के बीच खूनी संघर्ष: ABM और PhD छात्रों में चले लाठी-डंडे, कई घायल

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कानपुर. चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CSA) एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन किसी शोध की वजह से नहीं बल्कि छात्रों के बीच हुई हिंसक झड़प के कारण। शनिवार देर रात विश्वविद्यालय परिसर में एग्री बिजनेस मैनेजमेंट (ABM) और पीएचडी के छात्रों के बीच जमकर लाठी-डंडे चले, जिसमें कई छात्रों के सिर फट गए और कई गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

मामूली विवाद और फिर आधी रात को हमला

मिली जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत एक मामूली बात से हुई थी। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि रात के अंधेरे में एबीएम के छात्र पीएचडी स्कॉलर्स के हॉस्टल जा धमके। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों पक्षों में तीखी बहस हुई जो जल्द ही मारपीट में बदल गई। छात्र अपने साथ लाठी-डंडे लेकर आए थे, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में छात्रों को लहूलुहान हालत में और परिसर में भारी भीड़ जमा होते हुए देखा जा सकता है।

सुरक्षा व्यवस्था की खुली पोल

इस घटना ने विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब छात्र कैंपस में हथियारों के साथ एकत्र हो रहे थे और मारपीट कर रहे थे, तब सुरक्षा विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। संघर्ष खत्म होने और छात्रों के घायल होने के बाद गार्ड मौके पर पहुँचे।

प्रशासन का पक्ष

विश्वविद्यालय के डीन स्टूडेंट वेलफेयर (DSW) डॉ. मुकेश श्रीवास्तव ने बताया कि:

“घायल छात्रों को तुरंत प्राथमिक उपचार के लिए भेजा गया है। मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और सोमवार को इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की जाएगी। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।”

लगातार दूसरी घटना से दहशत का माहौल

गौरतलब है कि नवंबर महीने में भी विश्वविद्यालय के दो हॉस्टलों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें सीनियर छात्रों ने जूनियर छात्रों के कमरे पर पथराव किया था। बार-बार हो रही इन घटनाओं से परिसर में भय का माहौल है और अभिभावक छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

matribhumisamachar.com/

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।