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असम में उग्रवाद का ‘द एंड’: कुकी और हमार संगठनों के साथ ऐतिहासिक समझौता, अब विकास की नई लहर

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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा

गुवाहाटी. पूर्वोत्तर भारत के हृदय कहे जाने वाले असम से शांति और स्थिरता की एक बड़ी खबर सामने आई है। असम सरकार ने रविवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए तीन कुकी और एक हमार सशस्त्र उग्रवादी संगठन के साथ अंतिम शांति समझौते (Memorandum of Settlement) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के साथ ही राज्य सरकार ने असम में दशकों से चले आ रहे जातीय उग्रवाद के पूर्णतः समाप्त होने का बड़ा दावा किया है।

इन संगठनों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता

शांति की इस मुख्यधारा में शामिल होने वाले संगठनों में कुकी और हमार समुदाय के प्रमुख समूह शामिल हैं:

  1. यूनाइटेड कुकीगम डिफेंस आर्मी (UKDA)

  2. कुकी रिवोल्यूशनरी आर्मी (KRA)

  3. कुकी लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन/कुकी लिबरेशन आर्मी (KLO/KLA)

  4. हमार पीपुल्स कन्वेंशन-डेमोक्रेटिक (HPC-D)

पूर्वोत्तर भारत की खबरें: matribhumisamachar.com/northeast-news

12 साल का लंबा इंतजार हुआ खत्म

बता दें कि इन चारों संगठनों का सफर साल 2012 में ही शांति की ओर मुड़ गया था। तत्कालीन केंद्र और राज्य सरकार की मौजूदगी में इन समूहों ने भारी मात्रा में हथियार डाले थे। इसके बाद सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) समझौते के तहत इनके कैडर कैंपों में रह रहे थे। त्रिपक्षीय वार्ता के कई दौर चले और अंततः 2024 के इस समझौते ने इस पर अंतिम मुहर लगा दी है।

असम सरकार की योजनाएं: matribhumisamachar.com/assam-govt-schemes

समझौते की बड़ी बातें: क्या मिला कुकी और हमार समुदायों को?

सरकार ने इस समझौते को केवल कागजी नहीं, बल्कि ‘विकासोन्मुख’ बनाने की कोशिश की है। इसके तहत मुख्य प्रावधान निम्नलिखित हैं:

  • कल्याण और विकास परिषदों का गठन: कुकी और हमार समुदायों की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और विकास की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग विकास परिषदों (Development Councils) का गठन किया जाएगा।

  • मुख्यालय: इन परिषदों का प्रशासनिक केंद्र असम की राजधानी गुवाहाटी में होगा, ताकि विकास कार्यों की सीधी निगरानी हो सके।

  • कैडरों का पुनर्वास: सालों तक जंगलों में रहे पूर्व विद्रोहियों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए सरकार ने उनके उचित पुनर्वास और कौशल विकास का आश्वासन दिया है।

  • आर्थिक मुआवजा: संघर्ष के दौरान जान गंवाने वाले उग्रवादियों के परिवारों को मानवीय आधार पर आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

राष्ट्रीय सुरक्षा अपडेट: matribhumisamachar.com/national-security

असम में उग्रवाद का अंत: एक नया युग

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के कार्यकाल में असम ने उग्रवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ और ‘संवाद’ की दोहरी नीति अपनाई है। इससे पहले बोडो शांति समझौता, कार्बी आंगलोंग समझौता और उल्फा (ULFA) के साथ हुए समझौतों ने राज्य में हिंसा को लगभग समाप्त कर दिया था। अब कुकी और हमार समूहों के साथ इस ताजा समझौते ने शेष बची कसर भी पूरी कर दी है।

विशेषज्ञों का मानना है: “पूर्वोत्तर में शांति का मतलब है दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ व्यापार के नए रास्ते खुलना। असम का शांत होना पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।”

आगे की राह

सरकार का दावा है कि इस समझौते के बाद असम में अब कोई भी बड़ा सक्रिय जातीय सशस्त्र समूह नहीं बचा है। हालांकि, असली चुनौती इन समुदायों के भीतर विकास की गति को तेज करने और पूर्व कैडरों को रोजगार सुनिश्चित करने की होगी।

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