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इंदौर का चमत्कारी मंदिर: यहाँ सिंदूर नहीं, हल्दी से होता है गणपति का श्रृंगार; हार्वर्ड भी मान चुका है लोहा

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भोपाल | बुधवार, 15 अप्रैल 2026

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर अपने खान-पान के साथ-साथ अब अपनी अनूठी धार्मिक परंपराओं के लिए भी विश्व पटल पर चमक रही है। शहर के सिरपुर क्षेत्र में स्थित ‘हरिद्रा गणपति मंदिर’ इन दिनों सोशल मीडिया और वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। यहाँ की सबसे बड़ी विशेषता भगवान गणेश का वह दुर्लभ स्वरूप है, जहाँ उन्हें पारंपरिक सिंदूर के बजाय हल्दी का चोला चढ़ाया जाता है।

2019 में हुई थी स्थापना, नक्षत्रों से जुड़ा है गहरा नाता

मंदिर के मुख्य पुजारी बांके बिहारी शास्त्री बताते हैं कि इस मंदिर की नींव वर्ष 2019 में रखी गई थी। धार्मिक गणनाओं के अनुसार, भगवान गणेश का प्राकट्य पुष्य नक्षत्र के तीसरे चरण में माना जाता है। इसी ज्योतिषीय आधार पर यहाँ ‘हरिद्रा गणपति’ (हल्दी वाले गणेश) की सेवा की जाती है। हल्दी को भारतीय संस्कृति में शुद्धता, आरोग्य और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

क्यों खास है यहाँ का ‘हल्दी चोला’?

आमतौर पर गणेश मंदिरों में सिंदूर और चमेली के तेल का चोला चढ़ाने की परंपरा है, लेकिन यहाँ केवल शुद्ध हल्दी का उपयोग होता है। इस परंपरा की लोकप्रियता का आलम यह है कि:

  • लंबी वेटिंग लिस्ट: भगवान को चोला चढ़ाने के लिए भक्तों को 2 से 3 महीने पहले बुकिंग करानी पड़ती है।

  • सात समंदर पार से आस्था: मंदिर प्रबंधन के अनुसार, न केवल भारत बल्कि दुबई, अमेरिका और यूरोप में रहने वाले श्रद्धालु भी ऑनलाइन बुकिंग के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

तंत्र-मंत्र और कार्य सिद्धि का केंद्र

हरिद्रा गणपति को केवल सुख-समृद्धि ही नहीं, बल्कि तंत्र-मंत्र साधना का अधिष्ठाता देव भी माना जाता है। तांत्रिक मान्यताओं के अनुसार, पीली हल्दी की गणेश प्रतिमा की पूजा से शत्रुओं पर विजय और जटिल कार्यों में सफलता मिलती है। यही कारण है कि नए व्यवसाय या शुभ कार्य की शुरुआत से पहले लोग यहाँ आशीर्वाद लेने खिंचे चले आते हैं।

बुधवार की विशेष ‘मन्नत परंपरा’

मंदिर में हर बुधवार शाम को होने वाली महाआरती में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता है। यहाँ एक विशेष परंपरा प्रचलित है:

  1. पीला वस्त्र और नारियल: भक्त अपनी मन्नत मांगते समय एक नारियल को पीले कपड़े में बांधकर मंदिर परिसर में लटकाते हैं।

  2. 5 बुधवार का संकल्प: कहा जाता है कि लगातार 5 बुधवार तक दर्शन करने से हर मनोकामना पूरी होती है।

  3. मन्नत पूरी होने पर: कार्य सिद्ध होने के बाद भक्त पुनः आकर उस नारियल को भगवान के चरणों में अर्पित करते हैं।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से मिला ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड’ का सम्मान

इस मंदिर की ख्याति तब और बढ़ गई जब इसकी विशिष्ट परंपराओं और सांस्कृतिक प्रभाव के लिए हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (World Book of Records) की ओर से विश्व रिकॉर्ड का प्रमाणपत्र प्रदान किया गया। यह सम्मान इंदौर के धार्मिक पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दे रहा है।

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