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विश्व खाद्य दिवस पर सात्विकदान फाउंडेशन ने 100 कामकाजी महिलाओं तक पहुँचाई पोषण संबंधी जानकारी और भोजन सहायता

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई, 16 अक्टूबर, 2026: महिलाओं के स्वास्थ्य और सेहत में अच्छे पोषण की अहम् भूमिका को देखते हुए, सात्विकदान फाउंडेशन ने विश्व खाद्य दिवस के मौके पर मुंबई के भांडुप में ‘सेहत की थाली/आरोग्याची थाली’ (सेहत से भरपूर थाली) पहल आयोजित की। इस पहल का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर कामकाजी महिलाओं को पोषण के प्रति जागरूक करना और उन्हें भोजन संबंधी जरूरी मदद देना था। इसके तहत श्याम नगर, शंकर नगर और भांडुप ईस्ट की करीब 100 महिलाओं को पोषण से जुड़ी जरूरी जानकारी दी गई और पोषण किट भेंट किए गए। ये महिलाएँ घर की जिम्मेदारियाँ संभालने के साथ घरेलू सहायिका, निर्माण कार्य, छोटे उद्योगों और रेहड़ी-पटरी जैसे असंगठित क्षेत्रों में काम करती हैं।

शारीरिक मेहनत करने वाली महिलाओं के लिए समय और पैसों की कमी के कारण अपने खानपान पर ध्यान देना अक्सर मुश्किल होता है। यह भी देखने में आता है कि वे अपनी जरूरतों से पहले परिवार के दूसरे सदस्यों के खानपान का ध्यान रखती हैं। ‘सेहत की थाली/आरोग्याची थाली’ पहल के माध्यम से महिलाओं को सही पोषण की जानकारी देने के साथ उनकी भोजन संबंधी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में भी मदद की गई।

इस पहल की जरूरत राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (2019-21) के आँकड़ों से भी समझी जा सकती है। सर्वेक्षण के मुताबिक, भारत में 15 से 49 वर्ष की 57 प्रतिशत महिलाएँ खून की कमी यानि एनीमिया से पीड़ित हैं। सही पोषण न मिलने से एनीमिया हो सकता है, जिसका असर शरीर की ऊर्जा और शारीरिक मेहनत करने की क्षमता पर पड़ता है।

कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में सहायक श्रम आयुक्त (मुंबई शहर) सुश्री राजश्री पाटिल उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में संतुलित भारतीय भोजन पर बातचीत की गई और आसानी से मिलने वाली स्थानीय खाद्य सामग्री के बारे में बताया गया। महिलाओं को दाल, सोया चंक्स, मूँगफली, भुना चना और मौसमी हरी सब्जियों जैसी कम कीमत वाली चीजों से प्रोटीन, आयरन, विटामिन और दूसरे जरूरी पोषक तत्व पाने की जानकारी दी गई। साथ ही, पोषण से जुड़ी गलत धारणाओं को दूर किया गया और बताया गया कि खाना बनाने और भोजन की योजना में छोटे-छोटे बदलाव करके बिना खर्च बढ़ाए खानपान को बेहतर कैसे बनाया जा सकता है।

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कार्यक्रम के बारे में बात करते हुए, सहायक श्रम आयुक्त (मुंबई शहर) सुश्री राजश्री पाटिल ने कहा, “असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाएँ हर दिन शारीरिक मेहनत करती हैं, लेकिन अक्सर उनके पोषण पर ध्यान नहीं दिया जाता। इस समस्या के समाधान के रूप में, व्यावहारिक तरीके से ‘सेहत की थाली’ पहल शुरू करने के लिए मैं सात्विकदान फाउंडेशन की सराहना करती हूँ। भोजन संबंधी मदद के साथ पोषण की उपयोगी जानकारी देकर, फाउंडेशन महिलाओं को अपने रोजमर्रा के घरेलू बजट में ही अपनी सेहत का ध्यान रखने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।”

यह कार्यक्रम किसी व्याख्यान की तरह नहीं, बल्कि बातचीत के रूप में आयोजित किया गया। इसमें तस्वीरों और सवाल-जवाब के माध्यम से पोषण से जुड़ी बातों को आसान तरीके से समझाया गया। महिलाओं को कुछ आसान तरीके भी बताए गए, जैसे दालों को अंकुरित करना, अनाज के साथ दालें खाना और भोजन में मौसमी सब्जियों को ज्यादा शामिल करना।

इस पहल के तहत कार्यक्रम में शामिल हर महिला को एक पोषण किट दी गई, जिसमें रोजमर्रा के भोजन में इस्तेमाल होने वाली जरूरी सूखी खाद्य सामग्री थी। इस किट में दालें, सोया चंक्स, मूँगफली, भुना चना, गुड़, खाना पकाने का तेल, आयोडीन वाला नमक और चावल शामिल थे। आसानी से मिलने वाली और लंबे समय तक रखी जा सकने वाली इन चीजों से परिवारों को भोजन के लिए तुरंत मदद मिली। साथ ही, महिलाओं को कार्यक्रम के दौरान पोषण से जुड़ी जरूरी जानकारी भी दी गई।

श्री इपे वॉलियावेटिल, सीईओ, सात्विकदान फाउंडेशन, ने कहा, “सात्विकदान फाउंडेशन देशभर में कार्यरत एक गैर-सरकारी संगठन है, जो बच्चों को अच्छी शिक्षा, सही पोषण, जरूरी स्वास्थ्य सेवाएँ और सुरक्षा उपलब्ध कराकर उनके जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह जमीनी स्तर पर काम करने वाला धर्मार्थ ट्रस्ट है, जिसका उद्देश्य पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा से जुड़ी पहलों के जरिए गरीबी के कारण होने वाली उपेक्षा को खत्म करना है। कम आय वाले परिवारों में कामकाजी महिलाएँ पूरे परिवार की जिम्मेदारी संभालती हैं, लेकिन अक्सर वे सबसे आखिर में खाना खाती हैं और सबसे पहले अपनी सेहत से समझौता करती हैं। एक बार भोजन देने से एक दिन की भूख मिट सकती है, लेकिन लंबे समय तक स्वस्थ रहने के लिए सम्मान, जागरूकता और आसानी से अपनाए जा सकने वाले उपाय भी जरूरी हैं। ‘सेहत की थाली/आरोग्याची थाली’ पहल के माध्यम से हमारा उद्देश्य इन मेहनती महिलाओं को यह बताना नहीं है कि उन्हें अपनी रसोई कैसे चलानी चाहिए, बल्कि उनके साथ मिलकर यह दिखाना है कि रोजमर्रा के घरेलू बजट में भी संतुलित और आयरन व प्रोटीन से भरपूर भोजन शामिल किया जा सकता है। अच्छा पोषण कोई विशेष सुविधा नहीं, बल्कि हर व्यक्ति का बुनियादी अधिकार है।”

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शिक्षा और भोजन सहायता को साथ लेकर चलने वाली ‘सेहत की थाली/आरोग्याची थाली’ पहल का उद्देश्य सिर्फ खाद्य सामग्री बाँटना नहीं है। इसके माध्यम से कामकाजी महिलाओं के अनुभवों को महत्व देते हुए, उन्हें कम खर्च में पौष्टिक भोजन तैयार करने के आसान तरीके बताए गए।

यह पहल इस बात को ध्यान में रखकर तैयार की गई कि पोषण से जुड़ी जानकारी आसान हो और महिलाएँ उसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकें। कार्यक्रम के तहत कम कीमत पर मिलने वाली खाद्य सामग्री के इस्तेमाल और सेहतमंद खानपान की आदतों को बढ़ावा दिया गया। इसका उद्देश्य उन महिलाओं को बेहतर खानपान के लिए जागरूक करना है, जो समाज और अर्थव्यवस्था में अहम् भूमिका निभाती हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।