मुंबई. भारतीय सिनेमा के संगीत जगत के सबसे बड़े नामों में से एक, ए.आर. रहमान, वर्तमान में अपने करियर के सबसे विवादास्पद दौर से गुजर रहे हैं। जनवरी 2026 में दिए गए उनके एक इंटरव्यू ने न केवल बॉलीवुड बल्कि देश के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में भी बहस छेड़ दी है। जनवरी 2026 में रहमान ने एक सनसनीखेज दावा किया कि पिछले आठ वर्षों में बॉलीवुड में हुए “सत्ता परिवर्तन” (Power Shift) के कारण उन्हें जानबूझकर हाशिए पर धकेला जा रहा है। उन्होंने संगीत उद्योग में “सांप्रदायिक आधार” पर भेदभाव किए जाने का संकेत दिया।
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रहमान का पक्ष: उनका तर्क है कि एक विशिष्ट विचारधारा के उदय ने फिल्म निर्माण के तरीके को बदल दिया है, जिससे उनके जैसे कलाकारों के लिए जगह कम हो गई है।
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जावेद अख्तर की असहमति: प्रसिद्ध गीतकार जावेद अख्तर ने इस दावे पर कड़ा ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि फिल्म इंडस्ट्री व्यावसायिकता पर चलती है और यहाँ केवल “टैलेंट” ही मुद्रा है, धर्म नहीं।
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शोभा डे का प्रहार: लेखिका शोभा डे ने रहमान के बयान को “खतरनाक” और “गैर-जिम्मेदाराना” करार दिया, जिससे समाज में दरार पैदा हो सकती है।
‘छावा’ और ऐतिहासिक फिल्मों पर टिप्पणी
विवाद तब और गहरा गया जब रहमान ने विक्की कौशल की आगामी फिल्म ‘छावा’ (Chhaava) को “विभाजनकारी” (Divisive) कह दिया।
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यह फिल्म छत्रपति संभाजी महाराज के जीवन पर आधारित है।
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आलोचकों का तर्क है कि ऐतिहासिक वीरता की कहानियों को “विभाजनकारी” कहना इतिहास और महान नायकों का अपमान है।
विक्की कौशल स्टारर फिल्म ‘छावा’ (Chhaava) को लेकर ए.आर. रहमान की टिप्पणी ने 2026 की शुरुआत में एक बड़ा सांस्कृतिक और राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। यह विवाद इसलिए भी गहरा है क्योंकि यह फिल्म मराठा साम्राज्य के गौरवशाली इतिहास और छत्रपति संभाजी महाराज के बलिदान पर आधारित है।
इस विवाद के मुख्य पहलुओं को नीचे विस्तार से समझाया गया है:
1. विवाद की शुरुआत: रहमान का “विभाजनकारी” बयान
जनवरी 2026 में एक साक्षात्कार के दौरान, जब रहमान से बॉलीवुड के बदलते स्वरूप और ऐतिहासिक फिल्मों के चलन पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने ‘छावा’ का उदाहरण देते हुए इसे “विभाजनकारी” (Divisive) करार दिया।
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उनका तर्क: रहमान का संकेत था कि वर्तमान समय में ऐतिहासिक फिल्मों का इस्तेमाल एक खास तरह के ध्रुवीकरण (Polarization) के लिए किया जा रहा है, जिससे समाज के दो समुदायों के बीच दूरियां बढ़ सकती हैं।
2. फिल्म ‘छावा’ की पृष्ठभूमि
यह फिल्म महान मराठा शासक छत्रपति संभाजी महाराज (छत्रपति शिवाजी महाराज के पुत्र) के जीवन पर आधारित है। फिल्म में उनके शौर्य और मुगल शासक औरंगजेब के खिलाफ उनके संघर्ष को दिखाया गया है।
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फिल्म का निर्देशन लक्ष्मण उतेकर ने किया है।
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विक्की कौशल इसमें मुख्य भूमिका में हैं।
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ऐतिहासिक रूप से, संभाजी महाराज का अंत अत्यंत दुखद और वीरतापूर्ण था, जिसे इस फिल्म का मुख्य केंद्र माना जा रहा है।
3. विवाद पर तीखी प्रतिक्रियाएं
रहमान की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक जगत में भारी आक्रोश देखा गया:
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ऐतिहासिक अस्मिता का सवाल: आलोचकों और इतिहासकारों का कहना है कि संभाजी महाराज का इतिहास “तथ्य” है, “विभाजनकारी एजेंडा” नहीं। उनका तर्क है कि एक योद्धा के बलिदान को सांप्रदायिक चश्मे से देखना गलत है। इतिहास को जैसा है वैसा ही दिखाया जाना चाहिए। यदि औरंगजेब के अत्याचारों को दिखाया जा रहा है, तो उसे “विभाजनकारी” कहना सत्य को झुठलाने जैसा है।
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विक्की कौशल के प्रशंसकों की नाराजगी: सोशल मीडिया पर ‘Boycott Rahman’ जैसे ट्रेंड्स देखने को मिले, जहाँ लोगों ने कहा कि रहमान एक महान नायक की बायोपिक को निशाना बना रहे हैं।
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फिल्म बिरादरी का रुख: उद्योग के कई लोगों ने इसे रहमान की व्यक्तिगत राय बताया, लेकिन दबे स्वर में यह भी कहा गया कि ऐसी टिप्पणियां फिल्म के व्यवसाय और सुरक्षा को खतरे में डाल सकती हैं।
व्यक्तिगत और पेशेवर विवादों का सिलसिला (2023-2025)
रहमान की छवि पर पिछले कुछ वर्षों में कई अन्य घटनाओं से भी आंच आई है:
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वैवाहिक विच्छेद (2024): नवंबर 2024 में सायरा बानो के साथ 29 साल पुराने रिश्ते के टूटने की खबर ने सबको चौंका दिया। इस दौरान सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों के खिलाफ रहमान की कानूनी टीम ने कड़ा रुख अपनाया।
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जानी मास्टर विवाद (2025): यौन उत्पीड़न (POCSO) के आरोपों से घिरे कोरियोग्राफर जानी मास्टर के साथ काम करने को लेकर रहमान की कड़ी आलोचना हुई। लोगों ने सवाल उठाया कि एक “नैतिक” छवि वाले कलाकार ने ऐसे व्यक्ति के साथ सहयोग क्यों किया?
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चेन्नई कॉन्सर्ट त्रासदी (2023): सितंबर 2023 में उनके चेन्नई कॉन्सर्ट में मची भगदड़ और कुप्रबंधन ने प्रशंसकों के बीच उनकी साख को काफी ठेस पहुँचाई थी।
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कॉपीराइट उल्लंघन: फिल्म ‘पोन्नियिन सेल्वन 2’ के गाने ‘वीरा राजा वीरा’ को लेकर डागर ब्रदर्स ने उन पर संगीत चोरी का आरोप लगाया था।
कई फिल्म समीक्षकों का मानना है कि रहमान का संगीत अब पुराना (Outdated) होता जा रहा है और वे अपनी गिरती लोकप्रियता को छिपाने के लिए “सांप्रदायिक कार्ड” का सहारा ले रहे हैं।
Matribhumisamachar


