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UP Egg News: अब अंडे भी होंगे ‘स्मार्ट’, मुहर देखकर पता चलेगी ताजगी; जानें गुलाबी और नीली स्याही का राज

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उत्तर प्रदेश में अंडों पर गुलाबी और नीली मुहर के साथ एक्सपायरी डेट की नई व्यवस्था।

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के अंडा प्रेमियों और शाकाहार (एगिटेरियन) जीवनशैली अपनाने वालों के लिए एक बहुत बड़ी खबर है। अब बाजार में बिकने वाले अंडों की ताजगी और गुणवत्ता पर कोई संदेह नहीं रहेगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने खाद्य सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अंडों की बिक्री के नियमों में आमूल-चूल परिवर्तन कर दिया है।

अब तक हम दवाइयों, ब्रेड या दूध के पैकेट पर एक्सपायरी डेट देखते थे, लेकिन अब उत्तर प्रदेश देश का ऐसा राज्य बनने जा रहा है जहाँ खुले में बिकने वाले हर अंडे पर उसकी उत्पादन तिथि (Manufacturing Date) और उपयोग की अंतिम तिथि (Expiry Date) अंकित होगी।

पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के निर्देशानुसार, यह व्यवस्था उपभोक्ताओं को बासी और सेहत के लिए हानिकारक अंडों से बचाने के लिए की गई है।

🎨 रंगीन स्याही का गणित: गुलाबी और नीली मुहर का मतलब

सरकार ने अंडों की ताजगी पहचानने के लिए एक स्मार्ट कलर-कोडिंग सिस्टम तैयार किया है। ग्राहकों को अब दूर से ही पता चल जाएगा कि अंडा कहाँ से आ रहा है:

  • 🟣 गुलाबी स्याही (Pink Ink): यह मुहर उन अंडों पर होगी जिन्हें सामान्य तापमान (लगभग $30^\circ \text{C}$) पर रखा गया है। इनकी शेल्फ लाइफ 2 हफ्ते निर्धारित की गई है।

  • 🔵 नीली स्याही (Blue Ink): यह मुहर कोल्ड स्टोरेज (तापमान $2-8^\circ \text{C}$) में रखे गए अंडों के लिए होगी। ये अंडे 5 हफ्ते तक सुरक्षित माने जाएंगे।

विशेष नोट: मुहर लगाने के लिए केवल फूड-ग्रेड स्याही का ही उपयोग किया जाएगा, ताकि अंडे के पोषक तत्वों पर कोई बुरा असर न पड़े।

मुख्य समाचार: यूपी में खाद्य सुरक्षा के नए नियम – मातृभूमि समाचार

⚖️ बिना मुहर वाले अंडों पर ‘कड़ा पहरा’

नए नियमों के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 के बाद यदि कोई दुकानदार बिना मुहर या बिना तारीख वाले अंडे बेचता पाया जाता है, तो:

  1. उन अंडों को ‘खाने योग्य नहीं’ (Unfit for consumption) घोषित कर दिया जाएगा।

  2. खाद्य विभाग की टीमें ऐसे अंडों को मौके पर ही नष्ट कर देंगी।

  3. नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं और पोल्ट्री फार्म संचालकों पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

पशुपालन विभाग अपडेट: मुकेश मेश्राम के कड़े निर्देश – मातृभूमि समाचार

📊 क्यों जरूरी था यह फैसला?

सीतापुर के पोल्ट्री एक्सपर्ट्स और सरकारी अधिकारियों की मानें तो इस फैसले के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:

  • फूड पॉइजनिंग से बचाव: बासी अंडे खाने से साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया का खतरा बढ़ जाता है।

  • पारदर्शिता: अक्सर कोल्ड स्टोरेज के पुराने अंडों को ताजा बताकर ऊंचे दामों पर बेचा जाता था, अब ऐसा संभव नहीं होगा।

  • गुणवत्ता मानक: इससे पोल्ट्री फार्म संचालकों के बीच बेहतर रखरखाव की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

सेहत और खानपान: बासी अंडे खाने के नुकसान और साल्मोनेला का खतरा

💡 उपभोक्ताओं के लिए क्या बदलेगा?

अब आपको अंडा हिलाकर या पानी में डालकर उसकी ताजगी चेक करने की ‘देसी ट्रिक’ नहीं लगानी पड़ेगी। बस अंडे पर छपी तारीख देखें और सुरक्षित चुनाव करें। यह नियम खासतौर पर जिम जाने वाले युवाओं, बच्चों और उन लोगों के लिए वरदान है जो प्रोटीन के लिए अंडों पर निर्भर हैं।

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