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मेसी कोलकाता दौरा विवाद: पूर्व खेल मंत्री अरूप विश्वास पर गंभीर आरोप, मेसी की टीम ने पुलिस को भेजा ईमेल

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कोलकाता । बुधवार, 17 जून 2026

फुटबॉल के वैश्विक महानायक लियोनेल मेसी के ‘GOAT इंडिया टूर’ के दौरान पिछले वर्ष दिसंबर (13 दिसंबर 2025) में कोलकाता के युवा भारती क्रीड़ांगन (सॉल्ट लेक स्टेडियम) में जो अभूतपूर्व अव्यवस्था और तोड़फोड़ देखने को मिली थी, उसमें अब एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। इस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय को अर्जेंटीना के स्टार फुटबॉलर लियोनेल मेसी की टीम के एक प्रमुख सदस्य और सलाहकार की ओर से एक आधिकारिक ईमेल प्राप्त हुआ है। इस ईमेल में सीधे तौर पर पश्चिम बंगाल के तत्कालीन खेल मंत्री अरूप विश्वास को सुरक्षा में हुई इस भारी चूक और मैदान पर फैली अफरातफरी के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है।

मैदान पर वीआईपी दखलअंदाजी और मेसी की असहजता

पुलिस कमिश्नर को भेजे गए इस ईमेल में मेसी के सलाहकार ने दावा किया है कि स्टेडियम के भीतर स्थिति तब नियंत्रण से बाहर होनी शुरू हुई, जब तत्कालीन खेल मंत्री अरूप विश्वास अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए अनधिकृत लोगों के साथ सीधे मैदान (पिच) पर दाखिल हो गए।

ईमेल के मुताबिक, मंत्री लगातार प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए मेसी के बेहद करीब आने, उनके साथ तस्वीरें खिंचवाने की कोशिश कर रहे थे और बार-बार मेसी के कंधे और कमर को छू रहे थे। इस वीआईपी व्यवहार और सुरक्षा घेरा टूटने के कारण अर्जेंटीना का यह महान फुटबॉलर बेहद असहज हो गया था।

सुरक्षा चूक: 3 की जगह मैदान पर मौजूद थे 40 लोग

मेसी की टीम ने मैदान की सुरक्षा व्यवस्था और वहां मौजूद अनधिकृत भीड़ पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। तय कार्यक्रम और सुरक्षा गाइडलाइंस के अनुसार, उस वक्त मैदान पर केवल तीन अधिकृत (एक्रेडिटेड) फोटोग्राफरों को रहने की अनुमति दी गई थी। इसके विपरीत, मंत्री के प्रभाव के कारण वहां करीब 40 से अधिक अनधिकृत लोग जमा हो गए, जिन्होंने मेसी को चारों तरफ से घेर लिया।

इस भारी भीड़ और अपनी सुरक्षा को खतरे में देखते हुए मेसी और उनके सुरक्षाकर्मियों को तय कार्यक्रम से पहले (मात्र 22 मिनट के भीतर) ही मैदान छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। मेसी के अचानक चले जाने से निराश प्रशंसकों ने स्टैंड्स से कुर्सियां और बोतलें फेंकनी शुरू कर दी थीं, जिससे स्टेडियम में व्यापक तोड़फोड़ हुई थी।

मुख्य आयोजक सतद्रु दत्ता को मिली ‘क्लीन चिट’

इस ईमेल का एक और सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मेसी की टीम ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए मुख्य आयोजक सतद्रु दत्ता को पूरी तरह निर्दोष बताया है। ईमेल में स्पष्ट किया गया है कि स्टेडियम के भीतर की स्थिति आयोजकों के नियंत्रण से बाहर चली गई थी और इसके लिए केवल राजनीतिक हस्तक्षेप जिम्मेदार था।

गौरतलब है कि दिसंबर 2025 में इस हंगामे के तुरंत बाद तत्कालीन सरकार के समय सतद्रु दत्ता को ही गिरफ्तार कर लिया गया था और उन्हें 37 दिन जेल में बिताने पड़े थे। अब मेसी की टीम के इस बयान के बाद दत्ता ने राहत की सांस ली है और कहा है कि यह ईमेल जांच में सच्चाई को सामने लाने के लिए सबसे बड़ा हथियार साबित होगा।

टिकटों की ब्लैक-मार्केटिंग और हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन और भाजपा सरकार के आने के बाद इस मामले ने और गति पकड़ ली है। सतद्रु दत्ता ने बिधाननगर पुलिस में अरूप विश्वास, टीएमसी पार्षद जुई विश्वास और तत्कालीन डीजीपी राजीव कुमार के खिलाफ औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई है। दत्ता का बेहद गंभीर आरोप है कि:

  • इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के लिए कुल 70,000 टिकट छापे गए थे।

  • इनमें से 22,000 टिकट तत्कालीन खेल मंत्री अरूप विश्वास ने अपने प्रभाव का दुरुपयोग कर जबरन हासिल किए।

  • इन टिकटों को न केवल अपने करीबियों में बांटा गया, बल्कि उनकी कथित तौर पर अवैध बिक्री (ब्लैक-मार्केटिंग) भी की गई।

इसी सिलसिले में मंगलवार को सतद्रु दत्ता ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अरूप विश्वास को मिली कानूनी सुरक्षा को चुनौती देते हुए मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ के समक्ष याचिका दायर करने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया है। इस मामले पर इसी सप्ताह हाईकोर्ट में सुनवाई होने की उम्मीद है।

पुलिस जांच और पूछताछ से बच रहे हैं पूर्व मंत्री

बिधाननगर पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है और वर्तमान खेल मंत्री निसिथ प्रामाणिक ने भी इस फाइल को दोबारा खोलकर निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है। हालांकि, आरोपी पूर्व मंत्री अरूप विश्वास को पुलिस द्वारा अब तक कई बार पूछताछ के लिए नोटिस (समंस) जारी किए जा चुके हैं, लेकिन वे हर बार स्वास्थ्य कारणों या अन्य बहानों का हवाला देकर पुलिस के सामने पेश होने से बचते रहे हैं।

फिलहाल, मेसी की टीम द्वारा भेजे गए इस ईमेल ने अरूप विश्वास की मुश्किलें बढ़ा दी हैं और अब खेल प्रेमियों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक की नजरें कलकत्ता हाईकोर्ट में होने वाली आगामी सुनवाई पर टिकी हुई हैं।

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