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क्या एल्युमीनियम के बर्तन सुरक्षित हैं? जानें खाना पकाने के लिए कौन सा बर्तन है सबसे अच्छा

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नई दिल्ली. भारतीय रसोइयों में प्रेशर कुकर से लेकर कड़ाही तक, एल्युमीनियम के बर्तनों का राज है। सस्ता, हल्का और खाना जल्दी पकाने वाला होने के कारण यह हर घर की पसंद है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस बर्तन में आप अपने परिवार के लिए प्यार से खाना बना रहे हैं, वह उनकी सेहत को धीरे-धीरे नुकसान पहुँचा सकता है?

1. एल्युमीनियम के बर्तनों में छिपा खतरा

वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, एल्युमीनियम एक ‘रिएक्टिव’ (प्रतिक्रियाशील) धातु है। जब हम इसमें खाना पकाते हैं, खासकर खट्टी चीजें (जैसे टमाटर, इमली, नींबू या दही), तो एल्युमीनियम खाने के साथ घुलकर हमारे शरीर में प्रवेश कर जाता है।

सेहत पर होने वाले दुष्प्रभाव:

  • किडनी पर दबाव: हमारे गुर्दे एल्युमीनियम को फिल्टर करने के लिए बहुत मेहनत करते हैं। अधिक मात्रा में जमा होने पर यह किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है।

  • याददाश्त की कमी: कई शोध एल्युमीनियम के अत्यधिक संचय को ‘अल्जाइमर’ (भूलने की बीमारी) से जोड़कर देखते हैं।

  • पाचन तंत्र: इसके कण आंतों की परत को नुकसान पहुँचा सकते हैं, जिससे एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याएं होती हैं।

2. भारतीय रसोई के लिए कौन सा बर्तन है सबसे सुरक्षित?

अगर एल्युमीनियम असुरक्षित है, तो विकल्प क्या हैं? आइए जानते हैं विशेषज्ञों की पसंद:

अ) मिट्टी के बर्तन (सर्वश्रेष्ठ)

आयुर्वेद के अनुसार, मिट्टी के बर्तन में खाना पकने से उसके 100% पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं। यह भोजन की एसिडिटी को सोख लेता है और उसे क्षारीय (Alkaline) बनाता है, जो पाचन के लिए सर्वोत्तम है।

ब) पीतल और कांसा (पारंपरिक)

  • पीतल: इसमें पका हुआ भोजन 90% पोषक तत्व बनाए रखता है। ध्यान रहे कि पीतल के बर्तन हमेशा ‘कलई’ (Tin coating) किए हुए होने चाहिए।

  • कांसा: इसे आयुर्वेद में ‘आरोग्यवर्धक’ माना गया है। यह भोजन के 97% पोषक तत्व सुरक्षित रखता है।

स) स्टेनलेस स्टील (आधुनिक और सुरक्षित)

आज के समय में स्टेनलेस स्टील सबसे व्यावहारिक और सुरक्षित विकल्प है। यह भोजन के साथ कोई प्रतिक्रिया नहीं करता। ‘ट्राई-प्लाई’ (Tri-ply) स्टील के बर्तन एल्युमीनियम की तरह ही जल्दी गर्म होते हैं और सेहत को नुकसान भी नहीं पहुँचाते।

द) लोहे की कड़ाही (आयरन बूस्टर)

लोहे के बर्तन में खाना पकाने से भोजन में आयरन की मात्रा प्राकृतिक रूप से बढ़ जाती है। यह एनीमिया (खून की कमी) के रोगियों के लिए वरदान है।

3. अगर एल्युमीनियम इस्तेमाल करना ही पड़े तो क्या करें?

यदि आप तुरंत बर्तन नहीं बदल सकते, तो इन बातों का ध्यान रखें:

  1. पुराने बर्तन बदलें: अगर आपके एल्युमीनियम के बर्तन पतले हो गए हैं या उनमें गड्ढे पड़ने लगे हैं, तो उन्हें तुरंत हटा दें।

  2. खट्टा न पकाएं: टमाटर, कढ़ी या खट्टे पदार्थों को कभी भी एल्युमीनियम में न पकाएं।

  3. एनोडाइज्ड एल्युमीनियम: साधारण एल्युमीनियम की जगह ‘हार्ड एनोडाइज्ड’ (Hard Anodized) बर्तनों का उपयोग करें, क्योंकि इनकी सतह भोजन के साथ कम रिएक्ट करती है।

नोट : यह लेख आयुर्वेद से जुड़ी प्रचलित मान्यताओं के आधार पर लिखा गया है, कुछ विशेषज्ञों की राय इससे अलग हो सकती है.

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