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उत्तराखंड UCC के पहले हलाला केस में नया मोड़: पीड़िता के भाई का फोन हैक, मुख्य साक्ष्य मिटाने की साज़िश

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रुड़की । सोमवार, 18 मई 2026

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद दर्ज हुए देश के पहले हलाला और तीन तलाक मामले में एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज मोड़ आ गया है। कानूनी लड़ाई लड़ रहे पीड़ित परिवार को अब एक नए और गंभीर डिजिटल हमले (साइबर क्राइम) का सामना करना पड़ रहा है। ताज़ा घटनाक्रम में, पीड़िता के सगे भाई का मोबाइल फोन हैक कर लिया गया है, जिसका सीधा उद्देश्य अदालती कार्यवाही से जुड़े बेहद अहम डिजिटल सबूतों को नष्ट करना था।

डिजिटल साक्ष्यों को मिटाने का गंभीर आरोप

पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, पीड़िता के भाई का मोबाइल फोन पूरी तरह से हैक कर लिया गया। आरोप है कि महिला के पति के एक करीबी रिश्तेदार, रहमान (निवासी टर्नल रोड, देहरादून), ने भाई की पर्सनल ई-मेल आईडी और पासवर्ड हैक कर फोन का सारा डेटा रिमोटली डिलीट कर दिया।

इस साइबर अटैक के कारण केस से जुड़ी कई महत्वपूर्ण फाइलें, व्हाट्सएप चैट्स, ऑडियो रिकॉर्डिंग्स और कॉल लॉग्स गायब हो गए हैं, जो अदालत में आरोपियों के खिलाफ सबसे बड़े सबूत थे।

पहचान की चोरी (Identity Theft) का भी ख़तरा

पीड़िता के भाई ने पुलिस को बताया कि कुछ महीने पहले आरोपी रहमान ने उसकी एक वेबसाइट बनाई थी। उस दौरान उसने भाई से पैन कार्ड (PAN Card) और अन्य महत्वपूर्ण पहचान संबंधी दस्तावेज लिए थे। पीड़ित परिवार ने आशंका जताई है कि रहमान इन निजी दस्तावेजों और वेबसाइट का इस्तेमाल किसी बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी या अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों के लिए कर सकता है।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई और आईटी एक्ट में केस दर्ज

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हरिद्वार के एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने तत्काल जांच के आदेश दिए थे।

एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर का बयान:

“पीड़िता के भाई की शिकायत पर जब तकनीकी जांच की गई, तो मोबाइल हैक होने और डेटा डिलीट किए जाने के आरोपों की पुष्टि हुई है। इसके बाद आरोपी रहमान के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। साइबर सेल की मदद से डिलीट हुए डेटा को रिकवर करने का प्रयास किया जा रहा है।”

देश का पहला UCC केस क्यों बना नजीर?

यह पूरा मामला कानूनी इतिहास में एक मील का पत्थर बन चुका है। उत्तराखंड में इसी साल समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद, बुग्गावाला थाना क्षेत्र की एक पीड़ित महिला ने 5 अप्रैल को अपने पति मोहम्मद दानिश और ससुराल पक्ष के 5 अन्य लोगों (सास, ससुर, जेठ, देवर और ननंद) के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

महिला का आरोप था कि उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया, तीन तलाक दिया गया और फिर ‘हलाला’ के लिए गंभीर मानसिक व शारीरिक दबाव बनाया गया। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने देश में पहली बार यूसीसी एक्ट की धारा-32(1)(2) व 32(3) के तहत मुकदमा दर्ज किया था। अभी हाल ही में, रुड़की कोर्ट में इस मामले की चार्जशीट (आरोप पत्र) भी दाखिल की गई थी।

आगे की राह और सुधार

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस केस ने यह साबित कर दिया है कि यूसीसी लागू होने के बाद अब पीड़ित महिलाओं को न्याय के लिए अलग-अलग कानूनों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, बल्कि सीधे यूसीसी की धाराओं के तहत त्वरित कार्रवाई होगी। हालांकि, गवाहों और डिजिटल साक्ष्यों की सुरक्षा अब पुलिस के लिए एक नई चुनौती बन गई है।

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