नई दिल्ली । सोमवार, 18 मई, 2026
दक्षिण एशिया के रणनीतिक परिदृश्य में इन दिनों हलचल तेज है। भारत द्वारा अपनी मिसाइल क्षमताओं को लगातार अपग्रेड किए जाने से पड़ोसी देश पाकिस्तान में बेचैनी साफ देखी जा रही है। हाल ही में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद स्थित एक प्रतिष्ठित रणनीतिक मामलों के थिंक टैंक, सेंटर फॉर इंटरनेशनल स्ट्रेटेजिक स्टडीज़ (CISS) ने बंगाल की खाड़ी में भारत के बैक-टू-बैक मिसाइल परीक्षणों को लेकर शहबाज शरीफ सरकार को एक गंभीर चेतावनी जारी की है।
CISS का मानना है कि नई दिल्ली रणनीतिक, सामरिक और नौसैनिक तीनों मोर्चों पर अपनी बहुस्तरीय (Multi-layered) मिसाइल क्षमताओं के विकास को अभूतपूर्व गति दे रहा है, जिससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल सकता है।
अग्नि-5 और K-4: पाकिस्तान की मुख्य चिंताएं
पाकिस्तानी थिंक टैंक ने विशेष रूप से भारत के दो हालिया मिसाइल परीक्षणों को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए “बड़ा खतरा” बताया है:
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अग्नि-5 (MIRV तकनीक): भारत ने अपनी इस अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) को MIRV (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle) तकनीक से लैस किया है। इसका मतलब है कि एक ही मिसाइल एक साथ कई परमाणु हथियार ले जा सकती है और अलग-अलग ठिकानों को निशाना बना सकती है। CISS के अनुसार, यह तकनीक पाकिस्तान के मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह बेअसर करने की क्षमता रखती है।
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K-4 पनडुब्बी-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM): समुद्र-आधारित यह मिसाइल भारत की ‘सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी’ (Second Strike Capability) को बेहद मजबूत करती है। यदि भारत पर कोई पहला परमाणु हमला होता है, तो भारत पानी के नीचे छिपी अपनी पनडुब्बियों से जवाबी हमला करने में सक्षम है।
इसके अतिरिक्त, हाल ही में बंगाल की खाड़ी के लिए जारी किया गया NOTAM (Notice to Airmen) जो अग्नि-5 के परीक्षण के ठीक बाद आया, इस बात का प्रमाण है कि भारत अपनी मिसाइलों का केवल परीक्षण नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें तेजी से परिचालन (Operational) स्तर पर तैनात कर रहा है।
भारत का पक्ष: ‘क्रेडिबल मिनिमम डिटरेंस’
एक तरफ जहां पाकिस्तान इसे आक्रामक कदम के रूप में देख रहा है, वहीं भारत का रुख हमेशा से बेहद स्पष्ट रहा है। भारतीय रक्षा मंत्रालय और रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, ये सभी परीक्षण भारत की ‘क्रेडिबल मिनिमम डिटरेंस’ (Credible Minimum Deterrence – विश्वसनीय न्यूनतम निवारक) नीति का हिस्सा हैं। भारत की परमाणु नीति ‘नो फर्स्ट यूज’ (पहले परमाणु हथियार न इस्तेमाल करने) पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि भारत के हथियार केवल किसी भी संभावित हमले (विशेषकर चीन और पाकिस्तान की दोहरी चुनौतियों) को रोकने के लिए एक सुरक्षा कवच के रूप में हैं।
ब्रह्मोस और हाइपरसोनिक हथियारों का खौफ
पाकिस्तान पहले भी भारतीय मिसाइलों की अचूक मारक क्षमता का गवाह रह चुका है (जैसे कि ब्रह्मोस मिसाइल की आकस्मिक लैंडिंग की घटना)। CISS ने अपनी रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि बंगाल की खाड़ी का उपयोग उन्नत बैलिस्टिक मिसाइलों, हाइपरसोनिक हथियारों और लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइलों के परीक्षण क्षेत्र के रूप में किया जाना दक्षिण एशिया में सैन्य प्रतिस्पर्धा को और तेज करेगा।
थिंक टैंक के अनुसार, अत्यधिक गतिशील मिसाइल तकनीकों और समुद्र-आधारित परमाणु प्रणालियों के कारण पड़ोसी देशों में ‘खतरे की धारणा’ (Threat Perception) गहरी हो रही है, जिससे इस क्षेत्र में ‘डिटरेंस बैलेंस’ यानी प्रतिरोधक संतुलन प्रभावित हो सकता है।
DRDO का आत्मनिर्भर मिसाइल कार्यक्रम
पिछले कुछ वर्षों में, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के नेतृत्व में भारत ने अपनी रक्षा आत्मनिर्भरता को तेजी से बढ़ाया है। भारत ने न केवल अग्नि श्रृंखला की मिसाइलों को अपग्रेड किया है, बल्कि हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमॉन्स्ट्रेटर (HSTDV) और आधुनिक एंटी-शिप मिसाइलों का भी सफल विकास किया है। भारत का मुख्य ध्यान अब अपनी नौसैनिक परमाणु क्षमता (Naval Nuclear Triad) को मजबूत करने पर केंद्रित है, ताकि हिंद महासागर क्षेत्र में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को रोका जा सके।
निष्कर्ष
वैश्विक रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान के थिंक टैंक द्वारा इसे केवल “पड़ोसी देशों के लिए खतरा” बताना एकतरफा दृष्टिकोण हो सकता है। वास्तव में, भारत का मिसाइल आधुनिकीकरण केवल पाकिस्तान केंद्रित नहीं है, बल्कि इसका एक बड़ा हिस्सा चीन की बढ़ती सैन्य और नौसैनिक चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। दक्षिण एशिया में हथियारों की यह होड़ वास्तव में एक ‘सुरक्षा दुविधा’ (Security Dilemma) को जन्म दे रही है, जहां एक देश की आत्मरक्षा की तैयारी दूसरे देश को असुरक्षित महसूस कराती है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शहबाज सरकार इस रणनीतिक असंतुलन से निपटने के लिए क्या कूटनीतिक या सैन्य कदम उठाती है।
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