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उत्तराखंड में बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश नाकाम: गदरपुर से संदिग्ध सलाउद्दीन गिरफ्तार, पाकिस्तान-मलेशिया कनेक्शन का पर्दाफाश

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देहरादून । गुरुवार, 18 जून 2026

उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने देश की आंतरिक सुरक्षा को चुनौती देने वाली एक बेहद संवेदनशील और बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया है। एसटीएफ की विशेष विंग ने उधमसिंहनगर जिले के गदरपुर क्षेत्र में एक बेहद गुप्त और सटीक खुफिया इनपुट के आधार पर जाल बिछाकर राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में सक्रिय रूप से लिप्त संदिग्ध मोहम्मद सलाउद्दीन को गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से घातक हथियारों का जखीरा और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है, जिससे राज्य सहित देश के अन्य हिस्सों में किसी बड़े हमले को अंजाम देने की साजिश रची जा रही थी।

देर रात सर्च ऑपरेशन: मिलिट्री ग्रेड डेटोनेटर और AK-47 के कारतूस बरामद

गिरफ्तारी के तुरंत बाद एसटीएफ की स्पेशल विंग ने देर रात आरोपी मोहम्मद सलाउद्दीन को साथ लेकर उसके संदिग्ध ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान (सर्च ऑपरेशन) चलाया। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने छिपाकर रखे गए घातक हथियारों का जखीरा बरामद किया। बरामद की गई सामग्री में शामिल हैं:

  • 01 अत्याधुनिक इंग्लिश पिस्तौल और 5 जिंदा कारतूस

  • 04 मिलिट्री ग्रेड डेटोनेटर (विस्फोटक को दूर से एक्टिवेट करने वाले संवेदनशील डिवाइस)

  • 02 प्रतिबंधित AK-47 राइफल के कारतूस

इतनी संवेदनशील और मिलिट्री ग्रेड सामग्री की बरामदगी ने देश की तमाम केंद्रीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के भी कान खड़े कर दिए हैं।

पाकिस्तान-मलेशिया कनेक्शन: डिजिटल माध्यम से रची जा रही थी साजिश

एसटीएफ की प्राथमिक पूछताछ और तकनीकी छानबीन में जो खुलासे हुए हैं, वे सुरक्षा तंत्र को चौंकाने वाले हैं। आरोपी सलाउद्दीन सीधे तौर पर पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के संपर्क में था। यह पूरा नेटवर्क पाकिस्तान द्वारा मलेशिया में मौजूद एक मुख्य हैंडलर के जरिए संचालित किया जा रहा था। सुरक्षा को चकमा देने के लिए आरोपी को इंटरनेट कॉलिंग और ‘वर्चुअल नंबर्स’ (Virtual Numbers) के जरिए विदेशों से लगातार निर्देश मिल रहे थे। वह देश विरोधी ताकतों के इशारे पर स्थानीय स्तर पर युवाओं को जोड़कर एक ‘स्लीपर सेल’ (Sleeper Cell) तैयार करने के मिशन पर लगा हुआ था।

सिग्नल और टेलीग्राम पर युवाओं का ब्रेनवॉश, डेटा डिलीट कर छिपने की कोशिश

जांच अधिकारियों के मुताबिक, मोहम्मद सलाउद्दीन सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए सोशल मीडिया के सबसे सुरक्षित और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड ऐप्स जैसे सिग्नल (Signal) और टेलीग्राम (Telegram) का इस्तेमाल कर रहा था। वह इसके जरिए उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश (जैसे रामपुर और आसपास के क्षेत्र) और पड़ोसी राज्यों के स्थानीय युवाओं से संपर्क साधकर उन्हें कट्टरपंथी बनाने (ब्रेनवॉश) की कोशिशों में जुटा था।

पकड़े जाने के डर से आरोपी ने कई महत्वपूर्ण ग्रुप्स और चैट हिस्ट्री को डिलीट कर दिया था। इस डेटा को रिकवर करने और साजिश की गहराई तक पहुँचने के लिए एसटीएफ की साइबर फॉरेंसिक टीम मोबाइल और हार्ड ड्राइव की गहन तकनीकी जांच कर रही है।

BNS और आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज: जांच का दायरा बढ़ा

एसटीएफ उत्तराखंड ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर और राष्ट्रविरोधी धाराओं के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। चूंकि मामला देश की संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए केंद्रीय जांच एजेंसियां भी एसटीएफ के साथ समन्वय स्थापित कर रही हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब सलाउद्दीन के पूरे लोकल नेटवर्क, हथियारों की सप्लाई चेन (की वे उत्तराखंड तक कैसे पहुँचे) और उसके बैंक खातों में विदेशों से आए संदिग्ध फंड (टेरर फंडिंग कड़ियों) को खंगालने में जुट गई हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य :

सुरक्षा मामलों के जानकारों और पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस तरह के मामलों में तकनीकी जांच सबसे अहम होती है:

  1. लोकल कड़ियों की पड़ताल: प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी उत्तर प्रदेश के रामपुर के भी कुछ संदिग्धों के संपर्क में था, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है।

  2. वर्चुअल नंबर्स की चुनौती: विदेशी हैंडलर्स द्वारा इस्तेमाल किए गए वर्चुअल नंबर्स की आईपी (IP) ट्रेसिंग के लिए तकनीकी विंग अंतरराष्ट्रीय सर्वर प्रदाताओं से संपर्क साध रही है ताकि डिलीट की गई चैट का पूरा बैकअप लिया जा सके।

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