बुधवार, मार्च 18 2026 | 06:42:16 AM
Breaking News
Home / राज्य / दक्षिण-भारत / हिंदी को दरकिनार कर स्टालिन का नया दांव: गैर-हिंदी भाषाओं के लेखकों को मिलेंगे 5-5 लाख

हिंदी को दरकिनार कर स्टालिन का नया दांव: गैर-हिंदी भाषाओं के लेखकों को मिलेंगे 5-5 लाख

Follow us on:

चेन्नई. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने एक बार फिर भाषाई राजनीति की बिसात पर बड़ा दांव खेला है। चेन्नई अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले के समापन पर स्टालिन ने ‘सेम्मोझी इल्लाकिया विरुधु’ (शास्त्रीय भाषा साहित्य पुरस्कार) की घोषणा की है। इस पुरस्कार के तहत तमिल के अलावा अन्य शास्त्रीय और क्षेत्रीय भाषाओं—तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, ओडिया, बंगाली और मराठी—के लेखकों को 5-5 लाख रुपये और प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा।

हैरान करने वाली बात यह है कि इस सूची से हिंदी को पूरी तरह बाहर रखा गया है, जिसे लेकर अब राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

साहित्य अकादमी विवाद से उपजा ‘प्रतिरोध’

मुख्यमंत्री स्टालिन ने इस घोषणा को केंद्र सरकार के खिलाफ एक ‘सांस्कृतिक प्रतिरोध’ के रूप में पेश किया है। हाल ही में केंद्र द्वारा साहित्य अकादमी पुरस्कारों की घोषणा में हुई देरी और कथित राजनीतिक हस्तक्षेप पर निशाना साधते हुए स्टालिन ने कहा, “जब केंद्र सरकार साहित्य और कला का राजनीतिकरण कर रही है, तब तमिलनाडु सरकार लेखकों के सम्मान के लिए आगे आएगी।”

पुरस्कार के पीछे की असली सियासत

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम के पीछे तीन मुख्य रणनीतियां हैं:

  1. हिंदी विरोधी छवि को मजबूती: 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले DMK एक बार फिर ‘हिंदी थोपे जाने’ के मुद्दे को हवा देकर भाषाई गौरव (Linguistic Pride) के जरिए वोट बैंक मजबूत करना चाहती है।

  2. क्षेत्रीय दलों का नेतृत्व: गैर-हिंदी भाषी राज्यों (जैसे पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, ओडिशा) की भाषाओं को पुरस्कृत कर स्टालिन खुद को उत्तर भारत के खिलाफ ‘क्षेत्रीय पहचान’ के एक बड़े चेहरे के रूप में स्थापित कर रहे हैं।

  3. केंद्र बनाम राज्य की नई जंग: साहित्य अकादमी जैसे केंद्रीय संस्थानों के समानांतर राज्य स्तरीय पुरस्कार शुरू करना संघीय ढांचे में केंद्र के प्रभाव को कम करने की एक कोशिश मानी जा रही है।

क्या कहते हैं जानकर?

जहाँ एक तरफ साहित्यकारों का एक वर्ग इसे क्षेत्रीय भाषाओं को प्रोत्साहन देने वाला कदम बता रहा है, वहीं आलोचकों का तर्क है कि साहित्य को ‘हिंदी बनाम गैर-हिंदी’ के चश्मे से देखना देश की अखंडता और भाषाई सद्भाव के लिए उचित नहीं है। हिंदी को दरकिनार करना यह दर्शाता है कि पुरस्कार का आधार ‘साहित्यिक योग्यता’ से अधिक ‘राजनीतिक विचारधारा’ है।


SEO और सोशल मीडिया के लिए जरूरी जानकारी

  • Focus Keyphrase:

  • Keywords:

  • Meta Description:

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

कोच्चि तट पर तैनात ईरानी युद्धपोत IRIS Lavan की फोटो।

कोच्चि तट पर ईरानी युद्धपोत की फोटो लेना पड़ा भारी: दो पत्रकार और नाव चालक गिरफ्तार

कोच्चि. केरल के कोच्चि तट पर सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का एक गंभीर मामला सामने …