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विशाखापत्तनम बनेगा दुनिया का अगला AI हब: गूगल करेगा ₹1.26 लाख करोड़ का निवेश

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नई दिल्ली. दिल्ली में आयोजित ‘AI-India Impact Summit’ के चौथे दिन टेक्नोलॉजी जगत में उस वक्त हलचल मच गई, जब गूगल के CEO सुंदर पिचाई ने भारत को भविष्य की तकनीकी क्रांति का केंद्र घोषित किया। पिचाई ने न केवल AI को मानव इतिहास का सबसे बड़ा ‘प्लेटफॉर्म शिफ्ट’ बताया, बल्कि आंध्र प्रदेश के तटीय शहर विशाखापत्तनम (Vizag) को लेकर एक बड़ा विजन साझा किया।

विशाखापत्तनम: शांत शहर से ‘फुल-स्टैक AI हब’ तक

पिचाई ने घोषणा की कि गूगल विशाखापत्तनम में 15 बिलियन डॉलर (लगभग 1,26,000 करोड़ रुपये) का निवेश कर रहा है। कभी एक साधारण तटीय शहर माना जाने वाला विशाखापत्तनम अब गूगल के ‘फुल-स्टैक AI हब’ का घर होगा।

इस प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं:

  • गीगावॉट कंप्यूटिंग क्षमता: बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग के लिए विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर।

  • सबसी केबल गेटवे: अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए समुद्र के नीचे केबल नेटवर्क।

  • रोजगार के अवसर: इस निवेश से न केवल तकनीकी विशेषज्ञों बल्कि स्थानीय व्यवसायों के लिए भी लाखों अवसर पैदा होंगे।

“असंभव को संभव बनाता है AI”

समिट को संबोधित करते हुए सुंदर पिचाई ने कहा, “AI यह साबित करता है कि जब इंसान बड़े सपने देखता है, तो कुछ भी असंभव नहीं होता।” उन्होंने जोर देकर कहा कि AI के माध्यम से विकासशील देश पुरानी तकनीकी सीमाओं को लांघकर सीधे भविष्य की दौड़ में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने सचेत भी किया कि यह बदलाव रातों-रात नहीं होगा, इसके लिए निरंतर प्रयास और सही दिशा की आवश्यकता है।

विज्ञान के क्षेत्र में ‘नोबेल’ वाली कामयाबी

पिचाई ने AI के व्यावहारिक लाभों को समझाते हुए Google DeepMind के AlphaFold का उदाहरण दिया।

  • 50 साल पुरानी गुत्थी सुलझी: AlphaFold ने प्रोटीन स्ट्रक्चर की भविष्यवाणी कर वैज्ञानिक जगत को हैरान कर दिया, जिसके लिए इसे नोबेल पुरस्कार से भी नवाजा गया है।

  • वैश्विक पहुंच: वर्तमान में 190 देशों के 30 लाख से ज्यादा शोधकर्ता इस ओपन डेटाबेस का उपयोग कर रहे हैं।

  • बीमारियों का इलाज: इसकी मदद से मलेरिया की वैक्सीन और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जैसी वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों पर काम किया जा रहा है।

भविष्य की राह: AI एजेंट और DNA रिसर्च

सुंदर पिचाई के अनुसार, आने वाला समय ‘AI एजेंट्स’ का है, जो वैज्ञानिकों के सहयोगी के रूप में काम करेंगे। DNA से जुड़ी बीमारियों की पहचान से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं के लोकतांत्रीकरण तक, AI हर उस क्षेत्र में पहुंचेगा जहाँ अब तक तकनीक की पहुंच सीमित थी।

“भारत केवल AI का उपयोग नहीं करेगा, बल्कि भारत दुनिया के लिए AI का निर्माण करेगा।” — सुंदर पिचाई

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