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चैत्र नवरात्रि 2026: आज से शुरू हुआ हिंदू नववर्ष ‘विक्रम संवत 2083’, जानें कलश स्थापना का सबसे सटीक मुहूर्त और महत्व

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

नई दिल्ली. आज 19 मार्च 2026, गुरुवार से शक्ति की उपासना का महापर्व चैत्र नवरात्रि शुरू हो गया है। इसी के साथ भारतीय कालगणना के अनुसार हिंदू नववर्ष ‘विक्रम संवत 2083’ का भी शुभारंभ हो गया है, जिसे इस वर्ष ‘रौद्र’ संवत्सर के नाम से जाना जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस नए साल के राजा गुरु (बृहस्पति) और मंत्री मंगल होंगे।

? विक्रम संवत 2083 क्यों है खास?

इस बार का नव संवत्सर कई मायनों में दुर्लभ है:

  • 13 महीने का साल: इस वर्ष विक्रम संवत 2083 में ‘अधिक मास’ होने के कारण यह साल 12 नहीं बल्कि 13 महीनों का होगा।

  • मां का आगमन: इस साल मां दुर्गा का आगमन ‘डोली’ (पालकी) पर हो रहा है, जिसे शास्त्रों में शुभ और लोक-कल्याणकारी माना गया है।

  • शुभ योग: आज प्रतिपदा पर सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का अद्भुत संयोग बन रहा है।

पूजा विधि के लिए: चैत्र नवरात्रि पूजन सामग्री और कलश स्थापना की विस्तृत विधि यहाँ पढ़ें

⏰ घटस्थापना (कलश स्थापना) के शुभ मुहूर्त

यदि आप आज घर में कलश स्थापित कर रहे हैं, तो इन समयों का विशेष ध्यान रखें:

मुहूर्त का नामसमय (प्रातः/दोपहर)महत्व
सर्वश्रेष्ठ मुहूर्तसुबह 06:48 से 07:30 तकदेवी पूजन के लिए सर्वोत्तम
सामान्य प्रातः कालसुबह 06:54 से 10:15 तकचौघड़िया अनुसार शुभ
अभिजीत मुहूर्तदोपहर 11:38 से 12:26 तकबिना पंचांग देखे सबसे श्रेष्ठ
लाभ-अमृत मुहूर्तदोपहर 12:50 से 03:50 तकधन-धान्य वृद्धि के लिए

विशेष सावधानी: आज राहुकाल और पंचक के समय का ध्यान रखते हुए शुभ मुहूर्त में ही घटस्थापना करना फलदायी रहेगा।

ज्योतिषीय गणना के लिए: विक्रम संवत 2083: जानें ‘रौद्र’ संवत्सर और गुरु-मंगल की युति का भविष्यफल

?️ प्रथम दिन: मां शैलपुत्री की आराधना

नवरात्रि के पहले दिन हिमालय पुत्री मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। वे स्थिरता और शक्ति का प्रतीक हैं।

  • पसंदीदा रंग: मां शैलपुत्री को सफेद रंग अत्यंत प्रिय है। भक्त आज सफेद या पीले वस्त्र धारण कर पूजा कर सकते हैं।

  • विशेष भोग: मां को गाय के शुद्ध घी का भोग लगाने से आरोग्य की प्राप्ति होती है।

  • सिद्ध मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः या वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

राम नवमी विशेष: राम नवमी 2026: शुभ मुहूर्त और अयोध्या में उत्सव की तैयारियां

? कलश स्थापना की संक्षिप्त एवं शुद्ध विधि

  1. भूमि पूजन: उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) की सफाई कर गंगाजल छिड़कें।

  2. जौ बोना: मिट्टी के पात्र में सप्तधान्य या जौ बोएं।

  3. कलश तैयारी: तांबे या मिट्टी के कलश में जल, सिक्का, सुपारी और दूर्वा डालें।

  4. पल्लव और नारियल: कलश पर आम या अशोक के 5 पत्ते रखें और उसके ऊपर कलावा लपेटा हुआ नारियल (मुख अपनी ओर करके) रखें।

  5. संकल्प: हाथ में जल और अक्षत लेकर 9 दिनों के व्रत और पूजा का संकल्प लें।

? नवरात्रि 2026 का कैलेंडर (प्रमुख तिथियां)

  • 19 मार्च: मां शैलपुत्री पूजा (घटस्थापना)

  • 24 मार्च: मां कात्यायनी पूजा (छठ)

  • 26 मार्च: महाअष्टमी / मां महागौरी पूजा

  • 27 मार्च: महानवमी / राम नवमी / व्रत पारण

निष्कर्ष: चैत्र नवरात्रि का यह पर्व न केवल आध्यात्मिक शुद्धि का समय है, बल्कि नव संवत्सर 2083 के साथ नए संकल्पों को सिद्ध करने का अवसर भी है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।