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कानपुर देहात: शिवली में तालाब की भूमि पर चला प्रशासन का बुलडोजर, अवैध निर्माण ध्वस्त

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कानपुर देहात. जनपद के शिवली क्षेत्र में शुक्रवार को प्रशासन ने अवैध कब्जेदारों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए एक बड़ी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को अंजाम दिया। सरकारी आदेशों की अवहेलना कर ग्राम समाज और सार्वजनिक तालाब की भूमि पर किए गए अवैध निर्माण को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर ढहा दिया गया।

जांच में सही पाई गई शिकायत

जानकारी के अनुसार, क्षेत्र के लकड़ी कारोबारी मोहम्मद हनीफ पर आरोप था कि उन्होंने सरकारी जमीन और सार्वजनिक उपयोग के तालाब पर अवैध रूप से पक्का निर्माण कर रखा था। स्थानीय ग्रामीणों की शिकायत पर राजस्व विभाग की टीम ने भूमि की पैमाइश की थी, जिसमें अतिक्रमण की पुष्टि हुई।

नोटिस की अनदेखी पड़ी भारी

उपजिलाधिकारी (SDM) और राजस्व अधिकारियों के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई के बारे में बताया गया कि संबंधित पक्ष को पूर्व में ही कानूनी नोटिस जारी किया गया था। प्रशासन ने उन्हें खुद अतिक्रमण हटाने के लिए पर्याप्त समय दिया था, लेकिन समयसीमा बीत जाने के बाद भी जब निर्माण नहीं हटाया गया, तो शुक्रवार को प्रशासनिक अमला बुलडोजर लेकर मौके पर पहुँच गया।

जल संरक्षण को प्राथमिकता

मौके पर मौजूद राजस्व अधिकारियों ने बताया कि तालाब की जमीन पर कब्जा न केवल अवैध है, बल्कि यह जल संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ी बाधा था।

“सरकारी तालाब और सार्वजनिक भूमि को कब्जा मुक्त कराना हमारी प्राथमिकता है ताकि इनका उपयोग जनहित और पर्यावरण संरक्षण के लिए किया जा सके।”

राजस्व अधिकारी

कड़े सुरक्षा घेरे में हुई कार्रवाई

ध्वस्तीकरण के दौरान क्षेत्र में तनाव की स्थिति को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।

अपराध और प्रशासन: matribhumisamachar.com/category/crime-news/

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।