नई दिल्ली । गुरुवार, 20 अगस्त 2026
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हाल ही में संसद की अत्यंत महत्वपूर्ण ‘अधीनस्थ विधान संबंधी समिति’ (Committee on Subordinate Legislation) का पुनर्गठन करते हुए इसके नए सदस्यों और अध्यक्ष की घोषणा की है। इस पुनर्गठित समिति की कमान जनसेना पार्टी के सांसद बालाशौरी वल्लभनेनी को सौंपी गई है।
यह समिति संसद द्वारा पारित कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा बनाए जाने वाले नियमों, विनियमों और उप-नियमों (Rules, Regulations, and Bye-laws) की बारीक निगरानी करती है।
समिति में बहुदलीय प्रतिनिधित्व
संसदीय लोकतंत्र की परंपरा को बनाए रखते हुए इस पुनर्गठित समिति में विभिन्न प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसदों को शामिल किया गया है।
समिति के प्रमुख सदस्य:
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अध्यक्ष: बालाशौरी वल्लभनेनी (जनसेना पार्टी)
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कांग्रेस: कार्ति चिदंबरम, मोहम्मद जावेद
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तृणमूल कांग्रेस (TMC): महुआ मोइत्रा
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आरएसपी (RSP): एन.के. प्रेमचंद्रन
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डीएमके (DMK): ए. राजा
नियमों के अनुसार इस समिति में कुल 15 सदस्यों का प्रावधान होता है। फिलहाल समिति में तीन पद रिक्त हैं, जिन्हें जल्द ही भरा जाएगा। विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के प्रतिनिधियों की उपस्थिति समिति की निष्पक्षता और व्यापक दृष्टिकोण को सुनिश्चित करती है।
क्या है अधीनस्थ विधान संबंधी समिति?
संसद का मुख्य काम कानून बनाना है। हालांकि, किसी भी कानून को लागू करने की बारीकियों, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और तात्कालिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए संसद मूल ढांचा तैयार कर देती है और विस्तृत नियम बनाने की शक्ति कार्यपालिका (मंत्रालयों व विभागों) को सौंप देती है। इसे ही ‘अधीनस्थ विधान’ या ‘प्रत्यायोजित विधान’ (Delegated Legislation) कहा जाता है।
अधीनस्थ विधान संबंधी समिति का मुख्य कार्य यह देखना है कि:
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कार्यपालिका को दी गई शक्तियों का उपयोग निर्धारित सीमा के भीतर ही हो रहा है या नहीं।
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बनाए गए नियम मूल अधिनियम (Parent Act) के प्रावधानों या संविधान की आत्मा के विपरीत न हों।
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कार्यपालिका अपनी विधायी शक्तियों का आवश्यकता से अधिक विस्तार (Overreach) न करे।
इस समिति की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?
यदि कार्यपालिका बिना किसी अंकुश के नियम बनाने लगे, तो संसद की विधायी सर्वोच्चता को चुनौती मिल सकती है। ऐसे में यह समिति कार्यपालिका पर प्रत्यक्ष संसदीय निगरानी (Parliamentary Oversight) स्थापित करती है।
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संसदीय नियंत्रण: यह सुनिश्चित करती है कि नियम बनाते समय जनता के अधिकारों का हनन न हो।
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लोकसभा में रिपोर्ट पेश करना: समिति अपनी जांच और टिप्पणियों के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर लोकसभा के पटल पर रखती है।
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सुधारात्मक कदम: यदि समिति को किसी नियम में अस्पष्टता या गड़बड़ी लगती है, तो वह संबंधित मंत्रालय को उसमें संशोधन करने का सुझाव देती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. अधीनस्थ विधान संबंधी समिति का मुख्य कार्य क्या है?
Ans: इसका मुख्य कार्य मंत्रालयों और सरकारी विभागों द्वारा बनाए जाने वाले नियमों, विनियमों और उप-नियमों की जांच करना है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे संसद द्वारा बनाए गए मूल कानून के दायरे में हैं।
Q2. समिति का नया अध्यक्ष किसे नियुक्त किया गया है?
Ans: जनसेना पार्टी के सांसद बालाशौरी वल्लभनेनी को समिति का नया अध्यक्ष बनाया गया है।
Q3. इस समिति में कितने सदस्य होते हैं?
Ans: इस समिति में कुल 15 सदस्य होते हैं, जिन्हें लोकसभा अध्यक्ष द्वारा नामांकित किया जाता है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। इसमें दी गई सामग्री संसद बुलेटिन और आधिकारिक सूचनाओं पर आधारित है।
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