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Trump at Davos 2026: यूरोप से ट्रेड वॉर और भारत के लिए ‘ग्रेट डील’ का संकेत, क्या बदलेगी वैश्विक अर्थव्यवस्था?

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ग्रीनलैंड और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव

वाशिंगटन. दावोस (WEF 2026) में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का संबोधन वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए किसी बड़े भूकंप से कम नहीं है। विशेष रूप से ग्रीनलैंड अधिग्रहण की उनकी मांग और टैरिफ की धमकियों ने दुनिया भर के बाजारों में हलचल मचा दी है।

🌍 दावोस 2026: ट्रंप के संबोधन के मुख्य बिंदु

  • ग्रीनलैंड और टैरिफ की चेतावनी: ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड का अधिग्रहण अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए “अनिवार्य” है। उन्होंने उन 8 यूरोपीय देशों पर 10% आयात शुल्क (Tariff) लगाने की घोषणा की है जो इस सौदे का विरोध कर रहे हैं। यदि जून तक समझौता नहीं हुआ, तो इसे बढ़ाकर 25% और अंततः 100% तक किया जा सकता है।

  • यूरोप की कड़ी आलोचना: उन्होंने यूरोपीय देशों को “अविश्वसनीय साझेदार” बताते हुए उनकी ग्रीन एनर्जी नीतियों को “ग्रीन न्यू स्कैम” करार दिया।

  • भारत पर रुख: दिलचस्प बात यह है कि जहाँ एक ओर ट्रंप ने यूरोप और चीन पर कड़ा प्रहार किया, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए भारत के साथ एक “बड़ी व्यापारिक डील” (Great Deal) होने की उम्मीद जताई।

यह भी पढ़ें : India-EU FTA: भारत और यूरोप के बीच ऐतिहासिक ट्रेड डील! अमेरिका को क्यों लगा बड़ा झटका?

भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों पर असर: विश्लेषण

भारत के लिए ट्रंप का यह रुख ‘अवसर’ और ‘चुनौती’ दोनों लेकर आया है:

1. “अमेरिका फर्स्ट” बनाम “मेक इन इंडिया”

ट्रंप की टैरिफ नीति का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है। भारत वर्तमान में अमेरिका पर 50% तक के जवाबी टैरिफ का सामना कर रहा है। ट्रंप के दावोस में दिए गए सकारात्मक बयान से संकेत मिलता है कि भारत को यूरोपीय देशों की तुलना में ‘तरजीही’ (Preferred) व्यवहार मिल सकता है।

2. यूरोप बनाम भारत (Trade Shift)

अगर अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के बीच ट्रेड वॉर छिड़ता है, तो अमेरिकी कंपनियां अपने सप्लाई चेन के लिए यूरोप के विकल्प के रूप में भारत की ओर देख सकती हैं। विशेष रूप से टेक और फार्मा सेक्टर में भारत को बड़ा फायदा हो सकता है।

3. रक्षा और तकनीक (The Greenland Factor)

ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप का जुनून दिखाता है कि वे रणनीतिक क्षेत्रों पर नियंत्रण चाहते हैं। भारत-अमेरिका के बीच पहले से ही iCET (क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी) पर काम चल रहा है। अमेरिका भारत को अपने “सुरक्षा घेरे” के एक मजबूत स्तंभ के रूप में देख रहा है, जो व्यापारिक वार्ताओं में भारत को बेहतर मोलभाव (Bargaining) की शक्ति देता है।

4. ऊर्जा और जलवायु (Energy Gap)

ट्रंप ने ग्रीन एनर्जी को “होक्स” (Hoax) कहा है। भारत नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) में निवेश कर रहा है, लेकिन ट्रंप प्रशासन के तहत जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) और परमाणु ऊर्जा पर अमेरिका का जोर भारत के लिए सस्ती ऊर्जा आयात (LNG) के रास्ते खोल सकता है।

📊 सारांश: भारत के लिए प्रभाव तालिका

क्षेत्र संभावित प्रभाव प्रभाव का प्रकार
आईटी सेक्टर एच-1बी वीजा नियमों में सख्ती की आशंका ⚠️ नकारात्मक
निर्यात (Export) यूरोपीय उत्पादों पर टैरिफ लगने से भारतीय माल को बाजार मिलेगा ✅ सकारात्मक
विदेशी निवेश (FDI) अमेरिकी कंपनियों का भारत में निवेश बढ़ने की संभावना ✅ सकारात्मक
टैरिफ वार्ता नई ट्रेड डील के जरिए टैक्स दरों में कमी की उम्मीद 🔄 तटस्थ/सकारात्मक

ट्रंप का दावोस भाषण यह स्पष्ट करता है कि अमेरिका अब “सहयोग” से ज्यादा “सौदा” (Transactional approach) करने में विश्वास रखता है। भारत के लिए चुनौती यह होगी कि वह मोदी-ट्रंप की निजी केमिस्ट्री का लाभ उठाकर अपने निर्यातकों के लिए कम टैरिफ सुनिश्चित करे।

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