रविवार, फ़रवरी 22 2026 | 04:00:03 PM
Breaking News
Home / अंतर्राष्ट्रीय / सिंधु जल संधि: भारत के कड़े रुख से पाकिस्तान में ‘जल प्रलय’, 75 लाख लोगों पर भुखमरी का साया

सिंधु जल संधि: भारत के कड़े रुख से पाकिस्तान में ‘जल प्रलय’, 75 लाख लोगों पर भुखमरी का साया

Follow us on:

शाहपुर कंडी बांध परियोजना का निर्माण कार्य और रावी नदी का प्रवाह।

इस्लामाबाद. 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार द्वारा सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty – IWT) को स्थगित (Abeyance) करने के साहसिक निर्णय ने अब पाकिस्तान की कमर तोड़ दी है। फरवरी 2026 तक आते-आते पाकिस्तान में जल संकट एक ‘राष्ट्रीय आपातकाल’ का रूप ले चुका है। भारत की नई “वॉटर-फर्स्ट” डॉक्ट्रिन ने स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद और पानी का प्रवाह एक साथ नहीं चल सकता।

🚧 शाहपुर कंडी बांध: रावी नदी पर भारत का पूर्ण नियंत्रण

भारत की जल कूटनीति में सबसे बड़ा बदलाव शाहपुर कंडी बांध के साथ आ रहा है।

  • अंतिम समय सीमा: जम्मू-कश्मीर और पंजाब प्रशासन ने 31 मार्च 2026 तक इस परियोजना को चालू करने का लक्ष्य रखा है।

  • प्रभाव: दशकों से रावी नदी का जो अतिरिक्त पानी माधोपुर हेडवर्क्स से होकर पाकिस्तान जा रहा था, उसे अब पूरी तरह रोककर कठुआ और सांबा जैसे सूखाग्रस्त जिलों की ओर मोड़ दिया जाएगा।

  • रणनीतिक चोट: इससे पाकिस्तान के मध्य पंजाब क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था ध्वस्त होने की कगार पर है।

🌾 खरीफ सीजन पर संकट: 21% जल की कमी

पाकिस्तान के इंडस रिवर सिस्टम अथॉरिटी (IRSA) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, आगामी खरीफ सीजन में पाकिस्तान को 21% से अधिक जल की कमी का सामना करना पड़ेगा।

  • डेटा शेयरिंग बंद: भारत द्वारा चिनाब और झेलम का हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा न करने से पाकिस्तान के बांध (मंगला और तरबेला) अब केवल अनुमान के भरोसे चल रहे हैं।

  • फसलों की तबाही: कपास, चावल और गन्ने जैसी नगदी फसलों की बुवाई अनिश्चित हो गई है, जिससे पाकिस्तान के निर्यात क्षेत्र पर बुरा असर पड़ रहा है।

  • खाद्य असुरक्षा: संयुक्त राष्ट्र की फरवरी 2026 की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि इस संकट के कारण पाकिस्तान में लगभग 75 लाख लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का शिकार हो सकते हैं।

⚡ मिशन “ऑपरेशन सिंदूर”: चिनाब पर बांधों का जाल

भारत ने केवल पानी ही नहीं रोका, बल्कि पश्चिमी नदियों पर अपनी पनबिजली परियोजनाओं की रफ्तार को “इमरजेंसी मोड” में डाल दिया है।

परियोजना का नाम क्षमता वर्तमान स्थिति (फरवरी 2026)
सावलकोट (Sawalkote) 1,856 MW ₹5,129 करोड़ का टेंडर जारी, निर्माण कार्य युद्धस्तर पर।
पाकल दुल (Pakal Dul) 1,000 MW दिसंबर 2026 तक पूर्ण होने का लक्ष्य।
किरू (Kiru) 624 MW अंतिम चरण में, 2026 के अंत तक ट्रायल संभव।
किशनगंगा (Kishanganga) परिचालन डेटा साझा करना पूरी तरह बंद।

⚖️ अंतरराष्ट्रीय मंच: भारत ने PCA को नकारा

पाकिस्तान ने इस विवाद को हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (Permanent Court of Arbitration – PCA) और संयुक्त राष्ट्र में उठाया है।

  • पाकिस्तान का दावा: पाकिस्तान इसे “एक्ट ऑफ वॉर” बता रहा है।

  • भारत का कड़ा रुख: भारत ने PCA के क्षेत्राधिकार को ही अवैध करार दिया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट कर दिया है कि संधि निलंबन के दौरान भारत किसी भी डेटा साझा करने या मध्यस्थता के लिए बाध्य नहीं है।

विशेषज्ञ राय: “पाकिस्तान के पास केवल 30 दिनों का जल भंडारण है। भारत द्वारा पश्चिमी नदियों के प्रवाह को केवल ‘विनियमित’ (Regulate) करना ही पाकिस्तान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को डुबाने के लिए काफी है।”

📝 निष्कर्ष और आगामी कदम

भारत की यह ‘हाइड्रो-डिप्लोमेसी’ पाकिस्तान के लिए एक संदेश है कि छद्म युद्ध की कीमत अब उसे अपनी बुनियादी जरूरतों से चुकानी होगी। 31 मार्च 2026 की तारीख दक्षिण एशिया के जल-नक्शे को हमेशा के लिए बदल सकती है।

यह भी पढ़ें : पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ मदद के लिए चीन से लगाई गुहार

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का संबोधन।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: 88 देशों ने अपनाया ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’, भारत बना ग्लोबल एआई लीडर

नई दिल्ली: भारत की राजधानी में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ ने वैश्विक कूटनीति …