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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की बढ़ी मुश्किलें: प्रयागराज कोर्ट के आदेश पर यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. प्रयागराज की एक अदालत ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद और अन्य सहयोगियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया यह मामला गंभीर लैंगिक उत्पीड़न का प्रतीत होता है।

न्यायालय की तल्ख टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का गहराई से अध्ययन किया। कोर्ट ने अपने आदेश में निम्नलिखित बिंदुओं को रेखांकित किया:

  • पीड़ितों के बयान: पीड़ित बच्चों और स्वतंत्र साक्षियों के बयानों को विश्वसनीय माना गया।

  • जांच रिपोर्ट: पुलिस कमिश्नर द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट और संकलित सामग्री से स्पष्ट हुआ कि आरोप संज्ञेय अपराध (Cognizable Offense) की श्रेणी में आते हैं।

  • स्पष्ट आरोप: कोर्ट ने माना कि बच्चों के साथ लैंगिक उत्पीड़न के आरोप स्पष्ट हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

पुलिस की कार्रवाई शुरू

कोर्ट के कड़े रुख के बाद प्रयागराज पुलिस तत्काल एक्शन मोड में आ गई है। झुंसी थानाध्यक्ष महेश मिश्रा ने पुष्टि की है कि अदालत के आदेश के अनुपालन में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद सहित अन्य के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है।

“अदालत के आदेश पर अभियोग पंजीकृत कर लिया गया है। विवेचना टीम ने साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू कर दी है, जल्द ही नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।”

महेश मिश्रा, थानाध्यक्ष, झुंसी

क्या है मामला?

यह पूरा विवाद बच्चों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार और लैंगिक शोषण से जुड़ा है। पुलिस अब इस मामले में संकलित सामग्री और बयानों का मिलान कर रही है ताकि आरोपों की वैज्ञानिक पुष्टि की जा सके। इस हाई-प्रोफाइल मामले के कारण आध्यात्मिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

पुलिस जल्द ही इस मामले में संबंधित पक्षों को पूछताछ के लिए समन भेज सकती है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।