कोलकाता. झारखंड की राजनीति में ‘जायंट किलर’ बनकर उभरे जयराम महतो अब पश्चिम बंगाल की सत्ता के गलियारों में दस्तक दे रहे हैं। शनिवार को पुरुलिया के बाघमुंडी स्थित झालदा में हुई उनकी पहली बड़ी चुनावी जनसभा ने यह साफ कर दिया है कि 2026 के विधानसभा चुनावों में मुकाबला केवल TMC और BJP के बीच नहीं, बल्कि एक तीसरी ताकत के साथ भी होने वाला है।
1. ‘टाइगर’ की दहाड़: खराब मौसम पर भारी पड़ा जनून
झालदा के उहूपिरी मैदान में शनिवार को नजारा कुछ अलग ही था। आसमान से बरसती बारिश भी समर्थकों के उत्साह को कम नहीं कर पाई। जयराम महतो ने मंच से गरजते हुए कहा:
“यह भीड़ गवाह है कि बंगाल की जनता अब केवल नाम की राजनीति नहीं, बल्कि अपनी माटी और अधिकारों की राजनीति चाहती है। बारिश में आपका यहां रुकना बदलाव की पहली दस्तक है।”
2. क्यों है पुरुलिया जयराम महतो के लिए खास?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जयराम महतो की पार्टी झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) की नजर उन सीटों पर है जहां कुर्मी (महतो) समुदाय की आबादी निर्णायक भूमिका में है।
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कुर्मी वोट बैंक: बंगाल के पुरुलिया, बांकुरा और झारग्राम जिलों में कुर्मी समुदाय लंबे समय से खुद को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल करने की मांग कर रहा है।
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खतियानी मुद्दा: झारखंड की तरह बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में भी ‘स्थानीयता’ और ‘खतियान’ (1932 के आधार पर पहचान) जैसे मुद्दे युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रहे हैं।
3. बंगाल चुनाव 2026: JLKM की रणनीति पर एक नजर
जयराम महतो ने अभी तक किसी बड़े दल (TMC या BJP) के साथ गठबंधन के पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन सूत्रों के मुताबिक पार्टी इन सीटों पर फोकस कर रही है:
| जिला | संभावित हॉट सीटें | मुख्य कारक |
| पुरुलिया | बाघमुंडी, झालदा, जयपुर | कुर्मी बहुल इलाका और झारखंड सीमा से सटा होना। |
| बांकुरा | रानीबांध, रायपुर | जनजातीय और पिछड़ी जातियों का बड़ा वोट बैंक। |
| झारग्राम | झारग्राम सदर, नयाग्राम | स्थानीय भाषा और सांस्कृतिक समानता। |
4. सत्ताधारी और विपक्षी दलों के लिए खतरे की घंटी
झारखंड के पिछले विधानसभा चुनाव (2024) में जयराम महतो ने NDA और इंडिया ब्लॉक, दोनों के वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी की थी।
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BJP के लिए चुनौती: पुरुलिया और जंगलमहल क्षेत्र फिलहाल भाजपा के गढ़ माने जाते हैं। जयराम महतो की एंट्री यहां हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण को प्रभावित कर सकती है।
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TMC की चिंता: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए कुर्मी वोटों का खिसकना सत्ता बचाने की राह में रोड़ा बन सकता है।
5. क्या जयराम बनेंगे ‘किंगमेकर’?
जयराम महतो ने अपनी सभा में बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को मुख्य मुद्दा बनाया। उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि पार्टी की विचारधारा को “गांव-गांव और घर-घर” तक पहुंचाएं। यदि JLKM बंगाल में 5 से 10 सीटों पर भी अपना प्रभाव दिखा पाती है, तो वह 2026 के नतीजों में ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकती है।
निष्कर्ष: बंगाल की राजनीति में ‘टाइगर’ की एंट्री ने चुनावी बिसात बिछा दी है। क्या जयराम झारखंड जैसा करिश्मा बंगाल में भी दोहरा पाएंगे? इसका फैसला पुरुलिया के ये युवा और बारिश में भी डटे रहने वाले समर्थक ही करेंगे।
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